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महाराष्ट्र: इस मंदिर में है देश का सबसे बड़ा शिवलिंग, औरंगाबाद में आज से दर्शन प्रारंभ; 60 फीट है ऊंचाई

 महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास ऐतिहासिक एलोरा की गुफाओं (Ellora caves) और बारहवें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर महादेव मंदिर से एक किलो मीटर की दूरी पर देश का सबसे बड़ा शिवलिंग आकार का मंदिर (Largest shivlinga shaped temple) निर्माण किया गया है. विश्वकर्मा मंदिर परिसर में यह भव्य मंदिर बनाया गया है. यहां 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिष्ठापन किया गया है. आज (मंगलवार, 1 मार्च) से महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के अवसर पर ऋद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए हैं. इस अवसर पर विश्वकर्मा देवस्थान ट्रस्ट के सद्गुरु श्री महेंद्रबापू इलोडगड के मार्गदर्शन में यहां पांच दिनों का धार्मिक उत्सव आयोजित किया गया है.

वेरुल इलाके से कन्नड की ओर जाने वाले महामार्ग पर श्री विश्वकर्मा तीर्थधाम में भगवान श्री विश्वकर्मा का मंदिर है. इस मंदिर के परिसर में बारा ज्योतिर्लिंग मंदिर निर्माण का काम शुरू है. मंदिर के गर्भ गृह में एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिष्ठापन किया गया है. करीब 23 सालों से चल रहे इस भव्य मंदिर के निर्माण का काम अब पूरा हो गया है. ऐसे में इसे 1 मार्च यानी महाशिवरात्रि के पुनीत अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है.

स्थानीय पत्रकार वैभव किरगत द्वारा दी गई जानकारियों के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन सुबह शिवलिंग का प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ संपन्न किया गया. दोपहर से शिवभक्त जयंती भाई शास्त्री द्वारा शिवकथा का आयोजन किया गया है. इस अवसर पर गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त यहां उपस्थित हुए हैं. महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवलिंग का प्रतिष्ठापन और शिवकथा संपन्न हो रही है.

मंदिर की ऊंचाई करीब 60 फुट है. इसका  पिंड 40 फुट और शलाका का आकार 38 फुट तक है. मंदिर का आकार 108 फुट बाई 108 फुट है. यह मंदिर सोलापुर धुले महामार्ग पर स्थित है. इस मार्ग से आने-जाने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए यह भव्य मंदिर आकर्षण का केंद्र बन रहा है. बड़ी संख्या में लोग इसकी भव्यता देख कर मोहित हो रहे हैं और मंदिर की ओर खिंचे चले आ रहे हैं.

यह मंदिर ना सिर्फ अपनी भव्यता की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है बल्कि इस मंदिर की अन्य विशेषताएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यह देश का सबसे ऊंचा शिव लिंग आकार का मंदिर है. यह काफी विस्तृत क्षेत्रों में फैला हुआ है. एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिष्ठापन किया गया है. ऐसे में यह आगे चलकर ना सिर्फ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को यहां आने के लिए प्रेरित करेगा बल्कि यह एक बड़ा पर्यटन स्थल बन कर भी उभरेगा.

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