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गौड़ ब्राह्मणों का नाम एक प्राचीन प्रांत के नाम पर पड़ा है। यह प्रांत अब गौड़ नगर है, जो चिरकाल तक बिहार और बंगाल की राजधानी रहा है। गौड़ ब्राहमण के पाँच भेदों में से एक खास गौड़ ब्राह्मण भी कहा गया है | जिसे आदि गौड़ भी कहते हैं | गौड़ देश में निवेश करने वाले ब्राह्मण कहलाये | जाति भास्कर मैं लिखा है कि बंगदेश से लेकर अमरनाथ तक गौड़ देश स्थित है | ब्रह्मोत्पत्ति निबन्ध के निर्णय अध्याय मैं लिखा है कि जो वेदपाठी , तपस्वी ब्राह्मण सर्वप्रथम ब्रह्मक्षेत्र मैं पैदा हुए थे , वेद के धारण करने वाले तथा सदाचार प्रवर्तक थे | इन्ही ब्राह्मणो को आदि गौड़ मानना चाहिए |  गौड़ ब्राह्मणों की उप-शाखाएं काफ़ी संख्या में हैं। उनमें से सर्वाधिक इस प्रकार हैं-

गौड़ अथवा केवल गोड़ | आदि-गौड़ |  श्री-गौड़ | आदि-श्री गौड़ | गुर्जर गौड़

 

ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को आज भी है। चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो वह गायत्री दीक्षा लेकर ब्रह्माण बन सकता है, लेकिन नियमों का पालन करना होता है। अपने ब्राह्मण कर्म छोड़कर अन्य कर्मों को अपना लिया है। हालांकि अब वे ब्राह्मण नहीं रहे कहलाते अभी भी ब्राह्मण है। > स्मृति-पुराणों में ब्राह्मण के 8 भेदों का वर्णन है:- मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि। ब्राह्मण को धर्मज्ञ विप्र और द्विज भी कहा जाता है।

यूं तो प्रभु परशुराम ने प्रभु श्रीराम के पृथ्वी पर आगमन से पूर्व ही बार-बार यह पृथ्वी जीत कर ब्राह्मणों को शासन स्वरूप देना प्रारंभ कर दिया था। उस समय पृथ्वी पर रहने वाले समस्त उत्तर भारतीय ब्राह्मण संयुक्त रुप से गौड़ कहलाते थे। परंतु लंका विजय के बाद, इन ब्राह्मणों में वर्ग या समूह स्थापित होने प्रारंभ हो गए। परंतु वर्गीकरण से पूर्व प्रभु परशुराम ने जिन ब्राह्मणों को शासन दिया सभी गौड़ वंश के भाग रहे। शासन गौड़ वंश के पास रहने का मुख्य कारण यह था कि श्रीराम के प्रभाव में रहने के कारण अन्य वर्गीय ब्राह्मण स्वयं शासन धारण करने के इच्छुक नहीं थे , अतिरिक्त अन्य ब्राह्मण भी शासन धारण कर सकते हैं परंतु यदि समस्त ब्राह्मण शासन ग्राही ब्राह्मण हो जाते तो चारों वेदों में केवल यजुर्वेद और धनुर्वेद को ही पढ़ते या ज्यादा से ज्यादा सामवेद धारण कर लेते और ऋग्वेद तथा अथर्ववेद रह जाते हैं इससे ब्राह्मणों की निधि नष्ट हो जाती है। अतः गौड़ वंश ने शस्त्र और शास्त्र दोनों धारण किए तथा यजुर्वेद को अपना मुख्य वेद तथा धनुर्वेद को उपवेद बनाया। परंतु गौड़ वंश को सबसे ज्यादा शासन पांडवों के वंशज राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने दिए। ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्डय तथा महाभारत में जनमेजय के छः और भाई बताये गये हैं। यह भाई हैं कक्षसेन, उग्रसेन, चित्रसेन, इन्द्रसेन, सुषेण तथा नख्यसेन। महाकाव्य के आरम्भ के पर्वों में जनमेजय की तक्षशिला तथा सर्पराज तक्षक के ऊपर विजय के प्रसंग हैं। सम्राट जनमेजय अपने पिता परीक्षित की मृत्यु के पश्चात् हस्तिनापुर की राजगद्दी पर विराजमान हुये। पौराणिक कथा के अनुसार परीक्षित पाण्डु के एकमात्र वंशज थे। उनको श्रंगी ऋषि ने शाप दिया था कि वह सर्पदंश से मृत्यु को प्राप्त होंगे। ऐसा ही हुआ और सर्पराज तक्षक के ही कारण यह सम्भव हुआ। जनमेजय इस प्रकरण से बहुत आहत हुये। उन्होंने सारे सर्पवंश का समूल नाश करने का निश्चय किया। इसी उद्देश्य से उन्होंने सर्प सत्र या सर्प यज्ञ के आयोजन का निश्चय किया।

पृथ्वी के “प्रथम शासक” आदि गौड़ या गौड़ ब्राह्मण। 

आदि गौड़ (सृष्टि के प्रारंभ से गौड़ या आदि काल से गौड़ ) या गौड़ ब्राह्मण “पृथ्वी के प्रथम शासक ब्राह्मण” उत्तर भारतीय ब्राह्मणों की पांच गौड़ब्राह्मणों की मुख्य शाखा का प्रमुख भाग है, गौड़ ब्राह्मण, आदि गौड़ तथा श्री आदि गौड़ एक ही ब्राह्मण वंश हैl

(ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्डय प्रथम प्रकरण के अमुसार) राजा जन्मेजय ने सर्पदमन यज्ञ करने हेतु महामुनि बटटेश्वर / बटुकेश्वर / तुर को आमंत्रित किया मुनि अपने 1444 शिष्यों सहित ‘सर्पदमन’ वर्त्तमान ‘सफीदों’ कुरुक्षेत्र नमक स्थान पर (कहीं कहीं यह स्ताहन हिरन ग्राम उत्तरप्रदेश भी बताया जाता है) पधारें तथा यज्ञ अरंभ किया, यह यज्ञ इतना भयंकर था कि विश्व के सारे सर्पों का महाविनाश होने लगा। परन्तु वास्तविक स्थान ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्डाय के अनुसरा सर्पदमन ग्राम ही है

उस समय एक बाल ऋषि अस्तिक उस यज्ञ परिसर में आये। उनकी माता मनसा देवी एक नाग थीं तथा उनके पिता मुनि जरत्कारु एक ब्राह्मण थे।

प्राचीन समय में जब गौड़ ब्राह्मणों को पंच गौड़ ब्राह्मण की विभिन्न शाखाओं के रूप में जाने जाने लगा। गौड़, सारस्वत, उत्कल, मैथिल और कान्यकुब्ज । तब वास्तविक गौड़ ब्राह्मणों स्वयं की मूल पहचान सिद्ध करने हेतु स्वयं के नाम के आगे आदि शब्द का प्रयोग किया गया, ताकि यह बात समझी जा सके कि पंच गौड़ ब्राह्मणों में वह मूल गौड़ ब्राह्मण है जिनका का संबंध सृष्टि के प्रारंभ से है। भारत में सभाओं के नाम के आगे श्री शब्द लगाने का प्रचलन आदिकाल से है , अतः गौड़ ब्राह्मणों की सभा के सम्मुख श्री शब्द का प्रयोग कुछ ब्राह्मणों द्वारा किए जाने लगा। जिससे ब्राह्मणों में यह भ्रांति उत्पन्न हो गई कि यह समस्त ब्राह्मण भिन्न भिन्न है। वास्तव में यह सभी ब्राह्मण मूल गौड़ ब्राह्मण ही है। इन सभी ब्राह्मणों के शासन वही 1444 शासन में से है जो महाराजा जन्मेजय द्वारा मूल गौड़ ब्राह्मणों को प्रदत्त किए गए थे।

ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्डया के अनुसार पृथ्वी के प्रथम ब्राह्मण जो छुआछूत के विरोधी 

आदि गौड़ या गौड़ ब्राह्मण केवल और केवल वेदों को ही सत्य मानते हैं और उन्ही केनुसरण की शिक्षा देते हैं, ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्डया के अनुसार पृथ्वी के प्रथम ब्राह्मण हैं जो छुआछूत के दोष को नहींमानते तथा मनव मात्र के हाथ का भोजन ग्रहण करने में कोई बुराई नहीं मनाता क्योंकि प्रत्येक मनुष्य में इश्वर का वास् होता है गौड़ ब्राह्मणों का यह गुण, दूसरों के द्वारा पृथ्वी के ‘आधुनिक ब्राह्मण’ कहा गया वेदों में भी छुआछूत को अपराध कहागया है अतः गौड़ वंश आदि काल से छुआछूत का विरोधी रहा है इसप्रकार आदि गौड़ वंश समाज में छुआछूत को एक धार्मिक षड़यंत्र कहता आया है

आदि गौड / गौर / पंचगौड़ { आदि गौड़ ब्राह्मण समाज उजीना ( हरियाणा )}

Mission

 

To helph humanity, encouragepatriostism and to help national, poor, destitute, illness down trodden, weak, and needy people without any difference. Make to each Gou Seva (cowraksha), national unity, patriotism and goodwill to people to people. To unite the community and bring into the way to peak .Help to give education to poor, orphan, and helpless children, Maintain their health and help their marriage. To maintain Indian culture and motivate the coming young generation for their bright future.

 

Vision

 

Our samaj to become a part of our nation’s development in coming years. Our young boys and girls to make brilliant role in education and our youth participate in making a new Bharat Save Girl, Educate Girl. Women Empowerment, Save Environment, cleanliness. To makes awareness about communal violence, drowry, child marriage. Superstition and to stand for Humanity Nationality, Unity and Goodwill

 

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