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Basant Panchami 2022 : बसंत पंचमी के दिन रखा है व्रत तो भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां

बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार आने वाला है. माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ये पर्व मनाया जाता है. इस बार बसंत पंचमी 5 फरवरी शनिवार के दिन पड़ रही है. माना जाता है कि इस दिन माता सरस्वती (Mata Saraswati) प्रकट हुई थीं, इसलिए ये दिन मां सरस्वती को ही समर्पित है. इस दिन माता के लिए उनके भक्त व्रत रखते हैं और विशेष पूजन करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से ज्ञान की देवी मां सरस्वती अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इस बार बसंत पंचमी के दिन दो शुभ योग (Auspicious Yoga on Basant Panchami) भी बनने जा रहे हैं. 5 फरवरी को मकर राशि में सूर्य और बुध के रहने से बुधादित्य योग बन रहा है. वहीं केदार योग का भी निर्माण हो रहा है. इस कारण बसंत पंचमी की महत्ता कहीं ज्यादा बढ़ गई है. अगर आप भी इस बार बसंत पंचमी के दिन व्रत रखने के बारे में सोच रहे हैं, तो कुछ गलतियां भूलकर भी न करें.

इन गलतियों को न करें

1. बसंत पंचमी के दिन काले रंग के वस्त्र पहनने की भूल न करें. काला रंग नकारात्मकता को दर्शाता है. माता सरस्वती की पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.

2. अगर आप पूरे दिन व्रत नहीं रह पा रहे हैं, तो भी कम से कम पूजन के समय तक व्रत जरूर रखें. खाने पीने के बाद पूजा न करें. पूरे दिन का व्रत रख सकते हैं तो बहुत ही उत्तम है.

3. पूजा करने के बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलें. इसके बाद सात्विक भोजन करें. चटपटा मसालेदार भोजन या प्याज लहसुन से निर्मित भोजन न करें.

4. घर में बसंत पंचमी के दिन किसी भी सदस्य को मांस और मदिरा का सेवन न करने दें. स्वच्छता और पवित्रता का पूरा खयाल रखें.

5. किसी से भी झगड़ा न करें. न ही किसी की बुराई या चुगली करें. शांति से मन में मां सरस्वती का ध्यान करें.

6. किसी गरीब, जरूरतमंद या असहायों को परेशान न करें. बुजुर्गों की सेवा करें और उनके सम्मान का पूरा खयाल रखें.

7. कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन जुबां पर एक बार माता सरस्वती जरूर आती हैं. इसलिए उस दिन सब कुछ शुभ बोलना चाहिए. कोई भी ऐसी बात न कहें, जो सच होने पर आपको पछतावा हो.

ये काम जरूर करें

1. विद्यार्थी ‘ॐ ऐं हृं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा’ मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे उनकी मनोकामना पूरी होगी.

2. सुबह की शुरुआत अपनी हथेलियों को देखकर करें. हथेलियों में मां सरस्वती की छवि को देखें और उनको नमन करें.

3. हकलाने और तुतलाने की समस्या है तो बसंत पंचमी के दिन एक बांसुरी लेकर उसके छेद से उसमें शहद भरें और मोम से छेद बंद करके बांसुरी को जमीन में गाड़ दें.

4. वाक सिद्धि के लिए विद्यार्थी अपनी जीभ को तालू में लगाकर माता के बीज मंत्र ऐं का जाप करें. संभव हो तो बसंत पंचमी के दिन से ये शुरू करके रोजाना इसका अभ्यास करें.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

 

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