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Lalita Jayanti 2022 : पूर्णिमा के अलावा आज मनाई जा रही है ललिता जयंती, जानिए महत्व और पूजा विधि !

आज 16 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा (Magh Purnima) तिथि है. इसे बेहद शुभ तिथि माना गया है. आज ही के दिन संत रविदास जयंती (Ravidas Jayanti) भी होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन ही ललिता जयंती (Lalita Jayanti) भी मनाई जाती है. मां ललिता (Maa Lalita) दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें त्रिपुर सुंदरी के नाम से जाना जाता है. मां ललिता को चंडी के समान माना गया है. मान्यता है कि आज के दिन मां ललिता की विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. यहां जानिए ललिता जयंती से जुड़ी खास बातें.

ललिता जयंती शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि 15 फरवरी मंगलवार को रात 09:12 बजे से शुरू हो चुकी है और 16 फरवरी 2022, बुधवार को रात 10:09 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के हिसाब से पूर्णिमा आज है, इसलिए ललिता जयंती भी आज 16 फरवरी को मनाई जा रही है. आज सुबह से ही शोभन योग का निर्माण भी हो रहा है, जो रात 08:44 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि इस योग में किया गया कोई भी शुभ काम या पूजा जरूर सफल होती है. ऐसे में आप दिन में किसी भी समय शोभन योग में मां ललिता की विधि विधान से पूजा करके उनसे मनोकामना पूर्ति की कामना कर सकते हैं.

ये है पूजा विधि

सुबह उठकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा के स्थान की साफ सफाई करें और मां की तस्वीर सामने रखकर उनका ध्यान करें. तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित करें. माता को रोली, कुमकुम, वस्त्र, अक्षत, पुष्प, धूप, दक्षिणा आदि अर्पित करें. इसके बाद खीर-पूरी और गुड़ के सात पुए या फिर सात मीठी पूड़ियों का भोग लगाएं. माता के मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां ललिता की आरती करें और परिवार और संतान की सलामती की प्रार्थना करें. इसके बाद अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें. इसके बाद माता को प्रणाम करके उनका भोग सबके बीच प्रसाद के तौर पर वितरित करें.

ये है महत्व

कहा जाता है कि ललिता जयंती के दिन मां ललिता की आराधना करने से व्यक्ति की सभी कामनाएं पूरी होती हैं, साथ ही उसे जीवन और मरण के चक्र से छुटकारा मिलता है और व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर हो जाता है. मां ललिता माता पार्वती का ही रूप मानी जाती हैं. उन्हें दस महाविद्याओं में से एक माना गया है और राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुर सुंदरी आदि के नामों से भी जाना जाता है. इस दिन कई जगहों पर मेले का आयोजन किया जाता है. मां ललिता के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग जाती है.

 

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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