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Phalguna Amavasya 2022 : पितृ दोष निवारण के लिए बेहतर है फाल्गुन अमावस्या की तिथि, जानें क्या करना चाहिए

हर माह में एक अमावस्या तिथि (Amavasya Tithi) जरूर आती है. अमावस्या पितरों को समर्पित मानी गई है. अगर आप अपने पितरों के निमित्त कोई शुभ काम करना चाहते हैं, तो अमावस्या के दिन जरूर करें. इससे आपके पितरों को काफी संतुष्टि मिलती है. उन्हें लगता है कि उनके वंशज उन्हें भूले नहीं हैं. ऐसे में वे हमेशा अपने बच्चों पर आशीर्वाद बनाकर रखते हैं. वहीं अगर आपके घर में पितृ दोष (Pitra Dosh) लगा है, जिसके कारण आप लंबे समय से तमाम परेशानियां झेल रहे हैं, तो इसका निवारण करने के लिए भी अमावस्या तिथि बेहतर मानी गई है. 2 मार्च को फाल्गुन मास (Phalguna Month) की अमावस्या ​तिथि है. ऐसे में यहां जानिए पितृदोष क्यों लगता है, इसके लगने पर क्या होता है और इसके निवारण के लिए क्या करना चाहिए?

क्यों लगता है पितृदोष

ज्योतिष के मु​ताबिक पितृदोष की कई वजह हो सकती हैं, जैसे आपके परिजनों का विधिवत अंतिम संस्कार या श्राद्ध न होना, अकाल मृत्यु होना, पितरों का अपमान करना, धर्म कार्यो में पितरों को याद न करना, धर्मयुक्त आचरण न करना, पीपल, नीम या बरगद के पेड़ को काटना या कटवाना, नाग की हत्या करना या करवाना आदि कारणों से पितृ दोष लग सकता है. पितृदोष की पहचान व्यक्ति की कुंडली देखकर की जाती है. कुंडली में सूर्य और राहु की युति जब नवम भाव में होती है तो पितृ दोष का निर्माण होता है. नवम भाव को पिता का भाव माना गया है, साथ ही उन्नति, आयु, धर्म का भी कारक माना जाता है. इसके अलावा भी पितृदोष कुंडली में कई तरह से प्र​दर्शित हो सकता है.

जीवन बर्बाद कर देता है पितृ दोष

ज्योतिष में पितृ दोष को बहुत खराब माना गया है. पितृ दोष से पीड़ित परिवार कभी पनप नहीं पाता. पितृ दोष होने पर व्यक्ति को कदम कदम पर दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है. उसके घर में आर्थिक संकट बना ही रहता है. मेहनत करने के बावजूद उसका फल नहीं मिलता, विवाह में बाधा आती है, संतान संबन्धी सुख आसानी से प्राप्त नहीं होता, गर्भपात या गर्भधारण में बहुत ज्यादा समस्या, कॅरियर में बार बार रुकावट आती है. यदि समय रहते इसका निवारण नहीं किया गया तो ये लोगों को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है.

 

पितृ दोष होने पर करें ये उपाय

1. अमावस्या के दिन किसी गरीब को भोजन कराएं. भोजन में उसे खीर जरूर परोसें. इसके बाद यथा सामर्थ्य दान देकर विदा करें.

2. अमावस्या के दिन पीपल का पेड़ लगाएं और उस पेड़ की सेवा जरूर करें.

3. अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करें. इससे पितर संतुष्ट होते हैं.

4. गीता का पाठ करें. संपूर्ण गीता पढ़ना संभव नहीं तो सातवें अध्याय का पाठ जरूर करें, इससे आपके पितरों के कष्ट कम होते हैं और उनकी नाराजगी दूर होती है.

5. नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य को मजबूती मिलती है और पितृ दोष का प्रभाव कम हो जाता है.

6. पीपल को मीठा जल दें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं. ऐसा रोजाना कर सकें तो बहुत अच्छा है, वरना अमावस्या के दिन तो जरूर करें.

 

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