क्‍यों खास है चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन? नोट कर लें तिथि! 

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन की पूजन विधि?

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: चैत्र नवरात्रि का चौथे दिन मां कूष्‍मांडा को स‍मर्पित है। देवी कूष्‍मांडा को ब्रह्मांड के निर्माता के रूप में पूजा जाता है। एस्‍ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्‍लॉग में हम आपको नवरात्रि के चौथे दिन के महत्‍व, तिथि, समय, पूजन विधि और मां दुर्गा के चौथे स्‍वरूप के बारे में बता रहे हैं। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं नवरात्रि के चौथे दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: तिथि

22 मार्च, 2026 को रविवार के दिन चौथा नवरात्रि पड़ रहा है। इस बार चौथा नवरात्रि भरणी नक्षत्र में पड़ रहा है। इस दिन पूरे विधि-विधान से मां कूष्‍मांडा की पूजा की जाएगी।

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन की पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि 2026 पर चौथे दिन मां कूष्‍मांडा की पूजा करने की निम्‍न विधि है:

  • सबसे पहले सूर्योदय के समय उठ जाएं और स्‍नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्‍त्र पहन लें।
  • इस पवित्र दिन पर सबसे पहले कलश और उसमें विराजमान सभी देवी-देवताओं की पूजा करें और फिर मां कूष्‍मांडा की उपासना करें।
  • अब अपने हाथ में ताज़े पुष्‍प लें और माता के सामने अपना सिर झुकाएं एवं पूरे भक्‍ति-भाव से उनके मंत्रों का जाप करें।
  • देवी को फल, फूल और सूखे मेवे अर्पित करें।
  • इसके बाद दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें। यदि किसी कारण से आप पूरे ग्रंथ का पाठ नहीं कर सकते हैं, तो आप कम से कम कवच, अर्गला और कीलक का पाठ कर सकते हैं।
  • मां कूष्‍मांडा से अपनी मनोकामना मांगें और प्रार्थना करते हुए आरती करें।
  • पूजन के समय मौजूद सभी भक्‍तों में प्रसाद बांटें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए देवी मां से क्षमा मांगें।

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मां कूष्‍मांडा से संबंधित ग्र‍ह

मां कूष्‍मांडा का संबंध सूर्य देव से है जो कि ऊर्जा, शक्‍ति और उत्‍साह का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इस दिन देवी कूष्‍मांडा की पूजा करने से भक्‍तों को शक्‍ति, प्रतिभा और सफलता की प्राप्‍ति होती है।

मां कूष्‍मांडा के नाम में कू का अर्थ छोटा, फिर उष्‍मा यानी ऊर्जा और अंडा का अर्थ ब्रह्मांड होता है। यह नाम सृष्टि की रचना में उनकी भूमिका को दर्शाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी मुस्‍कान से ब्रह्मांड का अंधकार दूर हुआ और वे प्रकाश एवं जीवन का स्रोत हैं। वह स्‍वास्‍थ्‍य और समृद्धि प्रदान करती हैं एवं नकारात्‍मकता और चिंता को दूर करती हैं।

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कैसा है मां कूष्माण्डा का स्वरूप?

कूष्मांडा शब्द का अर्थ होता है कुम्हड़ा यानी पेठा की बलि देना। मां कूष्‍मांडा अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं। मां की 8 भुजाएं हैं इसीलिए यह अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। मां को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय होता है। कहा जाता है मां का निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में स्थित है। सूर्य लोक में निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल माँ कुष्माण्डा में ही मौजूद होती है।

मान्यता है कि मां के शरीर की शांति और प्रभाव सूर्य के समान है। कोई भी अन्य देवी देवता उनके तेज और प्रभाव की क्षमता नहीं कर सकता है। मां कूष्‍मांडा के तेज और प्रकाश से ही दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं।

मां कुष्माण्डा की 8 भुजाएं हैं जिनमें उन्होंने कमंडल, धनुष, बाण्ड, कमल पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र, गदा लिया हुआ है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियां और निधियों को देने वाली जपमाला मौजूद होती है और मां का वाहन सिंह हैं।

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मां कूष्‍मांडा की पूजा करने से क्‍या होता है?

ऐसा माना जाता है कि सच्‍चे मन से मां कूष्‍मांडा की भक्ति और पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होने लगते हैं, व्यक्ति को निरोगी काया का वरदान मिलता है, घर से और जीवन से नकारात्मकता दूर होती है, सुख समृद्धि आती है, दुश्मनों से रक्षा मिलती है।

इसके अलावा अगर कोई विवाहित लड़की मनचाहे वर को प्राप्त करना चाहती है तो उन्हें भी मां कूष्‍मांडा की पूजा करने की सलाह दी जाती है। अगर आप सुहागन हैं और आप माँ की पूजा करती हैं तो आपको अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही देवी कूष्‍मांडा प्रसन्न होने पर अपने भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।

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चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: प्रिय भोग  

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के लिए अलग-अलग भोग निर्धारित किए गए हैं। अगर आप इन नियमों का पालन करते हुए देवी को उनकी पसंद के अनुसार भोग अर्पित करते  हैं तो माता अवश्य प्रसन्‍न होती हैं। मां कूष्‍मांडा को मालपुआ बेहद ही प्रिय है। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा में मालपुआ का भोग अवश्य लगाएं। पूजा के बाद वहां उपस्थित सभी लोगों को यह भोग अवश्य दें। कहा जाता है कि मालपुआ का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती हैं, कष्टों का निवारण होता है और सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन के लिए शुभ रंग  

मां कूष्‍मांडा को नारंगी रंग बेहद प्रिय होता है। ऐसे में चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा में उन्हें नारंगी रंग के फूल अर्पित करें। माँ को नारंगी रंग के वस्त्र पहनाएं, खुद भी इसी रंग के वस्त्र पहनकर ही इस दिन की पूजा करें।

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चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन के लिए मंत्र 

  1. सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च, दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्माँ डा शुभदास्तु मे
  2. ऐं ह्री देव्यै नम:
  3. ॐ कूष्माण्डायै नम:
  4. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ  कूष्‍माँडा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

चैत्र नवरात्रि के चौथा दिन के लिए अचूक उपाय

चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर आप निम्‍न उपाय कर सकते हैं:

नवरात्रि का चौथा दिन आने पर पान के पत्ते में गुलाब की 7 पंखुड़ियां रखकर मां लक्ष्मी मंत्र पढ़ते हुए इसे देवी को अर्पित करें। इस उपाय को करने से आपके जीवन में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होगी।

मां कूष्मांडा को गुलाब के फूल में कपूर रखकर अर्पित करें। इससे आपकी मनोकामना की पूर्ति होगी।

चौथे नवरात्रि के दिन इमली के पेड़ की डली काट कर घर में ले आएं। इस दल पर माता के मंत्र का 11 बार जाप करें और फिर इस दल को अपनी तिजोरी या फिर धन रखने वाली जगह पर रख दें। इससे आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। 

नवरात्रि के चौथे दिन शाम के समय बेल के पेड़ की जड़ पर मिट्टी, दही और इत्र अर्पित कर दें। अगले दिन की सुबह मिट्टी, इत्र, पत्थर और दही चढ़ाई बेल के पेड़ के उत्तर पूर्व दिशा की एक छोटी टहनी तोड़कर घर में ले आयें। इस टहनी पर 108 बार महालक्ष्मी मंत्र का जाप करें और इसे अपनी तिजोरी में रखें।

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

1. चैत्र नवरात्रि 2026 का चौथा दिन कब है?

उत्तर. चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन 22 मार्च, 2026 को है।

2. नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के किस रूप की पूजा की जाती है?

उत्तर. इस दिन देवी कूष्‍मांडा की पूजा होती है।

3. देवी कूष्‍मांडा से किस ग्रह का संबंध है?

उत्तर. देवी कूष्‍मांडा से सूर्य ग्रह का संबंध है।

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