जल्द ही मंगल होंगे मिथुन राशि में वक्री, बनाएंगे षडाष्टक योग

मंगल ग्रह जल्द ही मिथुन राशि में वक्री होने जा रहे हैं और इसका प्रभाव देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों पर भी पड़ेगा। एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग आपको इस गोचर के प्रभाव के साथ-साथ शेयर मार्किट पर होने वाले असर के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगा। जानने के लिए इस ब्लॉग को अंत तक जरूर पढ़ें।        

मिथुन में वक्री मंगल की समयावधि 

हिन्दू पंचांग के अनुसार, लाल ग्रह मंगल ने हाल ही में 16 अक्टूबर 2022 को अपना राशिपरिवर्तन किया और इस दौरान उन्होंने शुक्र की राशि वृषभ से निकलकर बुध देव की राशि मिथुन में गोचर किया था। परंतु अब वे गोचर से महज़ 15 दिनों के बाद ही मिथुन मे वक्री हो जाएंगे। मंगल का मिथुन मे ये वक्री 30 अक्टूबर 2022, रविवार शाम 18:19 बजे होगा। इस स्थिति मे वक्री मंगल 13 नवंबर 2022 तक रहेंगे और उसके बाद वृषभ राशि मे अपना वक्री गोचर कर जाएंगे। 

ज्योतिष शास्त्रों मे “वक्री” का तात्पर्य “पीछे की ओर बढ़ना” होता है। इस दौरान कोई ग्रह पृथ्वी से देखने पर सामान्य गति से अलग वो पीछे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है, जिसे हम ज्योतिष मे उस ग्रह का वक्री होना कहते हैं। अगर मंगल के वक्री की बात करें तो, मंगल हर दो वर्षों मे करीब दो से ढाई महीने के लिए वक्री गति चलता है, जिसका प्रभाव विशेष महत्व रखता है। 

एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञों की मानें तो क्रोध, पराक्रम, आक्रामकता आदि के कारक मंगल जब-जब अपना वक्री करते हैं, तब-तब उसका प्रभाव जातक के स्वभाव मे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, निराशा और आक्रामकता की वृद्धि करने का कार्य करता है। इसलिए हमारे वरिष्ठ ज्योतिषी व्यक्ति को इस दौरान सावधानी बरतते हुए, अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को शुरुआत से ही सही दिशा मे लगाने की सलाह देते हैं। तो चलिए अब विस्तार से जानते हैं कि मिथुन मे मंगल के इस वक्री का देश-दुनिया पर शुभ-अशुभ प्रभाव। 

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मिथुन राशि मे मंगल होंगे वक्री

राशिचक्र की तीसरी राशि “मिथुन” को समझें तो यह सम ग्रह बुध के स्वामित्व वाली राशि है। ग्रह मैत्री चक्र के अनुसार, बुध से मंगल का शत्रुता का भाव होता है और अब 30 अक्टूबर को मंगल अपना वक्री अपने शत्रु की राशि मिथुन मे ही करेंगे। ऐसे मे मंगल की ये स्थिति सामान्य से कम अनुकूल सिद्ध होगी। हालांकि इस अवधी मे मंगल पर अन्य ग्रहों का प्रभाव होने से परिणाम थोड़े अलग हो सकते हैं। परंतु प्रत्येक जातक की कुंडली मे मंगल की स्थिति और उनके प्रभाव को देखकर ही, मंगल के इस वक्री से जुड़ी स्पष्ट जानकारी प्राप्त की जा सकती है।   

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ज्योतिषाचार्यों के दृष्टिकोण से देश-दुनिया पर वक्री मंगल का प्रभाव 

मिथुन राशि पर वक्री मंगल का प्रभावमंगल इस दौरान अपने शत्रु ग्रह बुध की राशि मिथुन मे होते हुए वक्री गति आरंभ करेंगे। जिसके फलस्वरूप मिथुन जातकों के स्वभाव में नकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। उन्हें क्रोध और आक्रामकता के मुद्दे से संबंधित समस्या हो सकती है। अहंकार मे भी वृद्धि होने से करियर की रफ़्तार पर कुछ ब्रेक लग जाएगी। शिक्षा से अलग खेल गतिविधियों मे भाग लेना आपकी छवि को प्रभावित करेगा। इस दौरान कुछ जातकों को चोट लगने की आशंका भी है। लग्न भाव में उपस्थित मंगल इस दौरान आपके विवाह यानी सप्तम भाव पर अपनी दृष्टि डालेंगे। शादीशुदा जातक कुछ असंतुष्ट दिखाई देंगे। प्रेमी जातक यदि प्रेम विवाह करना चाहते हैं तो, उसके लिए अवधि प्रतिकूल रहेगी। 

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मंगल-शनि षडाष्टक योग30 अक्टूबर को जब मंगल वक्री गति आरंभ करेंगे तब उनका शनि के साथ पहले से बन रहा षडाष्टक योग भी कुछ अंश प्रभावित होगा। षडाष्टक योग का अर्थ है जब दो राशियों के बीच दूरी का संबंध 6-8 का हो जाता है।मंगल-शनि के इस षडाष्टक योग के बनने से आपदाओं के योग बनेंगे। खासतौर से इस दौरान कई जातकों को अनेक परेशानियों और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। ये योग प्राकृतिक आपदाएं और राष्ट्रों के बीच आपसी विवाद को बढ़ाने का कार्य करेगा। 

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भारत और विश्व पर वक्री मंगल का प्रभावमंगल जब मिथुन मे अपनी वक्री गति आरंभ करेंगे, तब बुध स्वामी नक्षत्र में प्रवेश करते हुए अपना प्रभाव देशभर में दिखाएंगे। आजाद भारत की कुंडली कर्क लग्न की है और मिथुन में वक्री मंगल कर्क से द्वादश भाव में होंगे। इसके फलस्वरूप देश की जनता अपने खर्चों को लेकर परेशान दिखाई देगी। युवाओं मे बेरोज़गार का भय उन्हें मानसिक तनाव दे सकता है। हालांकि इस दौरान भारत कई बड़े देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की ओर अपने कदम बढ़ाता देखा जाएगा। इससे भारत के साथ किसी बड़े देश का ऊर्जा और शस्त्रों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई गुप्त समझौता या डील भी हो सकती है।  केंद्र सरकार अच्छी आर्थिक नीतियां अपना सकती है। शेयर बाज़ार पर वक्री मंगल का प्रभावमिथुन मे मंगल का वक्री होना जहाँ खुदरा बाज़ार में रुई, अलसी, गेहूं, इलायची, मूंग दाल, पिस्ता व अन्य लाल वस्तुओं के दामों मे अचानक तेजी आने के योग बनाएगा। वहीं शेयर बाज़ारों मे भी बैंकिंग, सोने, चांदी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों मे काफी तेजी देखने को मिलेगी। इसलिए इस दौरान मुनाफ़ा काटना आपके लिए बेहतर विकल्प सिद्ध होगा।  

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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