भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग है सोमनाथ, जानें सावन के पहले सोमवार पर इसकी पूजा का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में उनकी पूजा का बहुत ज्यादा महत्व होता है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में शिव भक्त देश के तमाम शिवालयों में उनके दर्शन एवं पूजन के लिए पहुंचते हैं. भगवान शिव के मंदिरों में द्वादश ज्योतिर्लिंग की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. देश के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग में सोमनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग को पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जो कि गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थित है. महादेव के इस पावन धाम के बारे में मान्यता है कि यह हर काल पर यहीं मौजूद रहता है. आइए भगवान शिव के इस पावन धाम के धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं.

चंद्र देवता ने की थी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना

भगवान सोमनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्र देवता से किया था लेकिन चंद्र देवता उनमें से रोहिणी को ज्यादा प्रेम करते थे. इससे राजा दक्ष की बाकी बेटियां बहुत दु:खी रहा करती थीं. जब उन्होंने अपने दु:ख का कारण अपने पिता राजा दक्ष प्रजापति से ​बताया तो राजा दक्ष ने चंद्र देव के प्रकाश को कम हो जाने का श्राप दे दिया. इसके बाद चंद्र देवता ने इस श्राप से मुक्ति का उपाय पूछने के लिए ब्रह्मा जी के पास गए तो उन्होंने समुद्र तट पर शिव साधना का उपाय बताया. मान्यता है कि चंद्र देव की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि मास के कृष्ण पक्ष में तुम्हारा प्रकाश धीरे-धीरे कम होगा लेकिन शुक्ल पक्ष में धीरे-धीरे एक बार फिर बढ़ता चला जाएगा. इसके बाद चंद्र देवता समुद्र तट पर भगवान सोमनाथ की प्रतिष्ठा करके उनकी साधना-आराधना की.

सावन में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा का फल

समुद्र तट पर स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि यहां पर विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन, रुद्राभिषेक आदि करने पर शिव भक्त के सभी संकट और पाप दूर हो जाते हैं और पुण्य फल की प्राप्ति होती है. यहां पर सच्चे मन से शिव साधना करने वाले भक्त की महादेव पलक झपकते सभी मनोकामना पूरी कर देते हैं और जीवन में कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती है.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा का ज्योतिषीय महत्व

चंद्र देवता का एक नाम सोम भी है. ऐसे में जिस चंद्र देवता को भगवान शिव ने अपने मस्तक पर मुकुट की तरह शोभायमान कर रखा है और जिन्होंने खुद भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग यानि सोमनाथ की स्थापना की थी, उनकी सावन के महीने में पूजा करने पर व्यक्ति की कुंडली में स्थित चंद्र दोष दूर होता है. कहने का तात्पर्य यह है कि श्रावण मास में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा से व्यक्ति को भगवान शिव के साथ चंद्र देवता का भी पूरा आशीर्वाद मिलता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *