शनिवार के दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान, नहीं होंगे शनि देव कभी नाराज
हिंदू धर्म (Hinduism) में पूजा-पाठ का खास महत्व होता है. यही कारण है कि सनातन धर्म में हर एक देवी-देवता का अपना एक खास महत्व भी होता है. सनातन धर्म के अनुसार सप्ताह के सातो दिन किसी ना किसी भगवान को अर्पित होते हैं. इसी में से एक है शनिवार. शनिवार का दिन भक्तों के लिए बेहद खास होता है. शनिवार को शनि देव (Lord Shani) की पूजा करने से हर एक कष्ट का निवारण होता है . शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित किया गया है. इस दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना का विधान है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन शनि देव की पूजा (Shani Puja) करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में आए संकट दूर होते हैं. धार्मिक पुराणों में भी शनि पूजा के बारे में बताया गया है. आइए जानते हैं कौन सी है वह बातें जिनका शनिवार को विशेष ध्यान रखना चाहिए.
शनिवार को इन बातों का रखें ध्यान
ब्रह्मचर्य का पालन
शास्त्रों में भी शनि देव के अध्यात्म और धर्म के बारे में बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि अगर आपका शनि खराब चल रहा है और पूजा पाठ कर रहे हैं तो फिर इस दिन पार्ट्नर के साथ संबंध नहीं बनाने चाहिए.
जूते और चप्पल न खरीदें
शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि शनिवार के दिन गलती से भी किसी भी व्यक्ति को कभी जूते या चप्पल नहीं खरीदना चाहिए. इससे शनि देव नाराज हो जाते हैं. हालांकि अगर आप इस दिन किसी जरूरतमंद को जूते चप्पल देते हैं तो फिर उससे आपको फल मिलता है और शनिदेव की कृपा मिलती है.
लोहे का सामान न खरीदें
शनिवार के दिन लोहे का दान करने से भी शनिदेव की कृपा मिलती है. इस दिन होला नही खरीदना चाहिए, क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं फिर इससे आपको शनि देव की वक्र दृष्टि का सामना करना पड़ सकता है.
घर नमक खरीद कर न लाएं
नमक का हर एक घर में होता ही है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि हम नमक कब खरीद रहे हैं. जीहां शनिवार के दिन गलती से नमक ना खरीदें. अगर इस दिन नमक खरीदते हैं तो शनि देव क्रोधित हो सकते हैं. शास्त्रों के मुताबिक शनिवार के दिन नमक खरीद कर घर लाने से आर्थिक स्थिति पर बुरा असर होता है.
नहीं काटने चाहिए बाल और नाखून
शनिवार के दिन अक्सर लोग बाल और नाखून काटते हैं. हालांकि ऐसा किसी को नहीं करना चाहिए. शनिवार के दिन आप ऐसा करते हैं तो आप पर शनि देव की वक्र दृष्टि पढ़ सकती है.
(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
