अपार धन देती हैं अपरा एकादशी; सिर्फ एक उपाय करने से कभी खाली नहीं होगा घर का भंडार!
सनातन धर्म में हर एक एकादशी का विशेष महत्व है। माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस तरह से साल में 24 एकादशी पड़ती हैं। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस व्रत का विशेष महत्व है। इस एकादशी के महत्व के बारे में स्वयं भगवान कृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को बताया था और कहा था कि इस एकादशी व्रत को रखने वाला व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेगा और अपने अच्छे कर्मों के आधार पर प्रसिद्धि प्राप्त करेगा। अपरा एकादशी को ‘अचला एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है।
ख़ास बात यह है कि इसे पूरे देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है और विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। पंजाब, जम्मू कश्मीर और हरियाणा राज्य में, अपरा एकादशी को ‘भद्रकाली एकादशी’ के नाम से जाना जाता है और इस दिन देवी भद्रकाली की पूजा करना शुभ माना जाता है जबकि उड़ीसा में इसे ‘जलक्रीड़ा एकादशी’ के रूप में जाना जाता है और भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है। तो आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं अपरा एकादशी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और पौराणिक कथा के बारे में।
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अपरा एकादशी: तिथि व मुहूर्त
इस वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 15 मई 2023 को पड़ेगी। अपरा एकादशी तिथि का आरंभ 15 मई 2023 सोमवार की मध्यरात्रि 02 बजकर 48 मिनट से होगा जबकि समापन अगले दिन 16 मई की मध्यरात्रि 01 बजकर 04 मिनट पर होगा।
अपरा एकादशी 2023: व्रत पारण मुहूर्त
अपरा एकादशी पारण मुहूर्त: 16 मई 2023 की सुबह 06 बजकर 43 से 08 बजकर 13 मिनट तक।
अवधि : 1 घंटे 29 मिनट
हरि वासर समाप्त होने का समय: 16 मई 2023 की सुबह 06 बजकर 43 पर।
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अपरा एकादशी का महत्व
अपरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन अनजाने में हुई गलतियों और पापों को नष्ट के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। एकादशी व्रत करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो फल पितरों को पिंडदान करने से प्राप्त होता है, वही फल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है। जो फल कुंभ में केदारनाथ के दर्शन या बद्रीनाथ के दर्शन तथा सूर्यग्रहण में स्वर्ण दान करने मिलता है वही फल अपरा एकादशी के व्रत को करने से मिलता है।
अपरा एकादशी 2023: पूजा विधि
एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद से ही व्रत का नियम शुरू हो जाता है।एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर साफ-सफाई करने के बाद स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए और उन्हें पूजन में तुलसी, चंदन, गंगाजल और फल का प्रसाद अर्पित करना चाहिए। साथ ही, भगवान विष्णु जी के मंत्रों का जाप भी जरूर करें।व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन छल-कपट, बुराई और झूठ बोलने से दूर रहना चाहिए। आखिरी में भगवान विष्णु की विधिवत तरीके से पूजा करने के बाद भूल चूक के लिए माफी मांगनी चाहिए और विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।एकादशी के दिन बिना अन्न खाएं व्रत रखें केवल फल का ही सेवन करें और दूसरे दिन यानी द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त के अनुसार व्रत खोलें।इस दिन चावल खाने से बचें। हालांकि समा के चावल का उपयोग किया जा सकता है।
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अपरा एकादशी: व्रत कथा
जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के महत्व को बताने का निवेदन किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने इस कथा के बारे में चर्चा की।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक राज्य में महीध्वज नाम का राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज था जो बड़ा ही पापी था। वह अधर्म करने वाला, दूसरों के साथ अन्याय करने वाला था और अपने बड़े भाई महीध्वज से घृणा करता था। एक दिन उसने अपने बड़े भाई के खिलाफ एक साजिश रची और साजिश के तहत अपने बड़े भाई की हत्या कर दी। हत्या के बाद वह अपने भाई का शव जंगल में पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ आया। राजा महीध्वज अकाल मृत्यु के कारण प्रेतात्मा बनकर उस पीपल के पेड़ पर रहने लगे। फिर वह प्रेतात्मा बड़ा ही उत्पात मचाने लगा। एक दिन उस पीपल के पेड़ के बगल से धौम्य ऋषि गुजर रहे थे, तभी उन्होंने उस प्रेत को पीपल के पेड़ पर देखा और अपने तपोबल से उस प्रेत राजा के बारे में सब कुछ जान लिया। तब ऋषि ने प्रेतात्मा को परलोक विद्या के बारे में बताया। धौम्य ऋषि ने उस प्रेतात्मा को प्रेत योनि से छुटकारा दिलाने के लिए स्वयं ही अपरा एकादशी का व्रत रखा। विधि विधान से अपरा एकादशी का व्रत करने के बाद भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि इस व्रत का पूरा पुण्य उस प्रेतात्मा मिल जाए ताकि वह इससे मुक्त होकर बैकुंठ धाम चले जाए। इसके बाद भगवान विष्णु के आशीर्वाद से उस राजा को अपरा एकादशी व्रत का पुण्य मिल गया और वह प्रेत योनि से मुक्ति पा गया।
अपरा एकादशी के दिन करें ये ख़ास उपाय
कर्ज से छुटकारा पाने के लिए
इस एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना चाहिए और घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है और हर तरह के कर्ज/लोन से छुटकारा मिलता है।
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए
एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के नीचे एक दीपक जलाना चाहिए। इससे भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है और आर्थिक तंगी दूर हो जा जाती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए
अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से गाय के दूध से अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होगा और जीवन में खुशियां बनी रहेगी। साथ ही, घर से सभी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएंगी।
मनोकामना पूर्ति के लिए
अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ इस मंत्र का करीब 108 बार जाप करना चाहिए। मंत्र- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र’। इससे व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
सुख-शांति के लिए
अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को खीर का भोग जरूर लगाएं और इसमें तुलसी की एक पत्ती जरूर रख दें क्योंकि तुलसी श्री हरि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।
दरिद्रता दूर करने के लिए
इस एकादशी की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन करा कर उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार भेंट और दान दक्षिणा देकर उनका आर्शीवाद लेना चाहिए। साथ ही इस दिन तिल का दान करना बहुत शुभ होता है। ऐसा करने से घर से दरिद्रता दूर होती है।
अपरा एकादशी के दिन इन मंत्रों का करें जाप
भगवते वासुदेवाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
श्री विष्णु मंत्र
मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः।
मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥
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