इंसान की बुद्धि उम्र नहीं ज्ञान से बढ़ती है, पढ़ें इससे जुड़े 5 अनमोल विचार

दुनिया के तमाम सुखों को भोगने और दु:खों से बचने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले जिस चीज की जरूरत पड़ती है वो बुद्धि होती है. बुद्धि उस प्रकाश के समान होती है, जिसके आते ही जीवन का अंधियारा दूर हो जाता है. यही कारण है कि कोई चाहता है कि उसे तमाम चीजों का ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हो. इस ज्ञान को पाने और बढ़ाने के लिए वह खूब प्रयास भी करता है, लेकिन क्या कारण है कि कुछ लोगों को बहुत ज्यादा और कुछ लोगों को बहुत कम ज्ञान होता है.

जीवन में आखिर इंसान ज्ञान कहां-कहां से प्राप्त करता है? इसे सहेज कर रखने का क्या तरीका होता है? क्या जीवन में सिर्फ ज्ञान का होना ही काफी होता है? अपने ज्ञान का सदुपयोग इंसान को कब करना चाहिए? इंसान क्या करे कि उसका ज्ञान हमेशा बढ़ता चला जाए? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो अक्सर लोगों के मन में आते रहते हैं. यदि ज्ञान या फिर कहें बुद्धिमत्ता को लेकर आपके भी यही सवाल हैं तो आपके लिए नीचे दिए बुद्धिमत्ता पर प्रेरक वाक्य बहुत काम के हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद आपकी सारी जिज्ञासा शांत और भ्रम दूर हो जाएंगे.

बुद्धि उस अग्नि के समान होती है जो अकेले ही पूरे ही दुनिया में प्रकाश फैलाने का काम कर सकती है.
ज्ञान हमेशा वृद्धों की सेवा से आता है. यह बुद्धिमानों लोगों के सिर का मुकुट और मूर्ख लोगों की विरासत होता है.
एक बुद्धिमान व्यक्ति अपनी वाणी के मुकाबले जीवन में अपने कानों का अधिक इस्तेमाल करता है. वह अपनी वाणी का सिर्फ समय पड़ने पर उपयोग करता है.
बुद्धिमान इस बात को हमेशा अच्छी तरह से जानता है कि वह चाहे जितना ही ज्ञान क्यों न बटोर ले पर वह अभी भी दुनिया की तमाम चीजों से अनजान है.
जीवन में बुद्धि तीन तरीको से प्राप्त की जा सकती है. चिंतन, अनुकरण और अनुभव के द्वारा, लेकिन इसमें पहले दो के मुकाबले तीसरा तरीका यानि अनुभव से ज्ञान हासिल करना सबसे कष्टकारी होता है.

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