इस दिन से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष – पितरों की आत्मा की शांति के लिए अवश्य करें ये छोटा सा उपाय दूर होगा पितृ दोष!

सनातन धर्म में पितरों को समर्पित साल में एक विशेष अवधी दी गई है जिसे पितृपक्ष कहते हैं। माना जाता है कि पितृपक्ष में जब कोई व्यक्ति स्नान, दान करता है अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म, इत्यादि करता है तो ऐसे व्यक्तियों को अपने पितरों का असीम आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है। 

इस समय अवधि के बारे में ऐसी मान्यता है कि इस दौरान स्वयं हमारे पितृगण धरती पर अपने परिवार के सदस्यों से मिलने आते हैं। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष जैसा मारक हानिकारक दोष भी मौजूद होता है तो उन्हें पितृपक्ष की इस अवधि में कुछ विशेष उपाय आदि करने की सलाह दी जाती है। 

आज अपने इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से जानेंगे वर्ष 2023 में पितृपक्ष कब से प्रारंभ हो रहा है, पितृ दोष क्या होता है, अगर यह कुंडली में मौजूद होता है तो यह व्यक्ति को किस तरह के संकेत देता है, साथ ही जानेंगे पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले कुछ ऐसे बेहद ही सरल उपाय जिन्हें अपना कर आप भी अपने पितरों का आशीर्वाद तो प्राप्त कर ही सकते हैं साथ ही पितृ दोष से भी छुटकारा भी पा सकते हैं।

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2023 में पितृपक्ष कब से कब तक 

हिंदू पंचांग के अनुसार बात करें तो इस वर्ष पितृपक्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि अर्थात 29 सितंबर 2023 से प्रारंभ हो रहे हैं और इसका समापन आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन हो जाएगा अर्थात 14 अक्टूबर 2023 को हो जाएगा। 

अधिक जानकारी: विक्रम संवत 2080 में पितृपक्ष की शुरुआत 15 दोनों देरी से हो रही है क्योंकि इस वर्ष अधिक मास था।

पंचांग के अनुसार, 29 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा दोपहर 03 बजकर 26 मिनट तक है और उसके बाद से आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी, जो 30 ​सितंबर को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। 

पितृ पक्ष 2023 कैलेंडर

पहला श्राद्ध कब है? 29 सितंबर 2023 शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध/प्रतिपदा श्राद्ध

दूसरा श्राद्ध कब है? 30 सितंबर 2023 शनिवार द्वितीया श्राद्ध

तीसरा श्राद्ध कब है? 01 अक्टूबर 2023 रविवार तृतीया श्राद्ध

चौथा श्राद्ध कब है? 02 अक्टूबर 2023 सोमवार चतुर्थी श्राद्ध

पंचवा श्राद्ध कब है? 03 अक्टूबर 2023 मंगलवार पंचमी श्राद्ध

छठा श्राद्ध कब है? 04 अक्टूबर 2023 बुधवार षष्ठी श्राद्ध

सातवाँ श्राद्ध कब है? 05 अक्टूबर 2023 गुरुवार सप्तमी श्राद्ध

आठवाँ श्राद्ध कब है? 06 अक्टूबर 2023 शुक्रवार अष्टमी श्राद्ध

नौवाँ श्राद्ध कब है? 07 अक्टूबर 2023 शनिवार नवमी श्राद्ध

दसवां श्राद्ध कब है? 08 अक्टूबर 2023 रविवार दशमी श्राद्ध

ग्यारहवाँ श्राद्ध कब है? 09 अक्टूबर 2023 सोमवार एकादशी श्राद्ध

बारहवाँ श्राद्ध कब है? 11 अक्टूबर 2023 बुधवार द्वादशी श्राद्ध

तेरहवाँ श्राद्ध कब है? 12 अक्टूबर 2023 गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध

चौदहवां श्राद्ध कब है? 13 अक्टूबर 2023 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध

आखिरी श्राद्ध कब है? 14 अक्टूबर 2023 शनिवार सर्व पितृ अमावस्या

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क्या होता है पितृ दोष? 

कुंडली में मौजूद ढेरों दोषों में से एक होता है पितृ दोष जिसे बेहद ही हानिकारक माना गया है और इसका व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर भी पड़ता है। माना जाता है कि जब पूर्वजों के कारण वंशजों को कष्ट मिलता है तो इसे पितृदोष कहते हैं। बात करें इसके लगने के कारण के पीछे अर्थात पितृ दोष किसी व्यक्ति के जीवन में क्यों लगता है, इस बारे में तो 

दरअसल जब कोई व्यक्ति अपने गुरु, माता-पिता और बड़े लोगों को परेशान करता है, उनकी आज्ञा का पालन नहीं करता है, तो व्यक्ति के जीवन में पितृ दोष होने की आशंका बढ़ जाती है। जब व्यक्ति के पूर्वज उनसे नाराज होते हैं या उनका अंतिम संस्कार या श्राद्ध ठीक ढंग से नहीं हुआ होता है तो भी पितृदोष होने की आशंका बनने लगती है। किसी पवित्र वृक्ष को काट देने पर हमारे जीवन में पितरों का पाप लगता है और यह भी पितृदोष की वजह बनता है। धार्मिक कार्यों में बाधा डालने या धार्मिक कार्यों का अपमान करने से भी पितृ दोष लगता है। इसके अलावा किसी भिखारी, किसी जानवर, किसी बेजुबान, किसी मजबूर व्यक्ति का अपमान करने पर भी पितृ दोष लगने लगता है।

हालांकि जब व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है तो यह व्यक्ति को तमाम तरह के संकेत प्रदान करता है जिन्हें सही ढंग से जानकर आप भी इस बात का पता लगा सकते हैं कि क्या आपकी कुंडली में भी पितृ दोष है या नहीं। इसके अलावा आप चाहें तो विद्वान ज्योतिषियों से परामर्श लेकर भी इस सवाल का जवाब जा सकते हैं। 

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बात करें पितृदोष के प्रभाव और लक्षण की तो, 

अगर आपको जीवन में तमाम कड़ी मेहनत के बावजूद परेशानियां झेलनी पड़ रही है और परिवार में अशांति बनी रहती है तो मुमकिन है कि आपके जीवन में पितृ दोष का प्रभाव है। बनते-बनते काम बिगड़ने लगे या व्यापार में बरकत ना मिले तो यह भी पितृ दोष का प्रभाव माना जाता है। घर में किसी का विवाह हो और मामूली सी बात पर भी विवाह टूट जाए तो मुमकिन है कि यह पितृ दोष की वजह से होता है। जब अपने ही लोग आपको धोखा देने लगे या धोखेबाजी करने लगे तो यह भी पितृ दोष का एक मजबूत लक्षण माना गया है।

पितृपक्ष उपाय 

पितृपक्ष की समय अवधि अपने पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करने और उनका आशीर्वाद अपने जीवन पर सदैव बनाए रखने के लिहाज से बेहद उत्तम मानी गई है। इसके अलावा कहा जाता है कि यदि पितृपक्ष में कुछ उपाय कर लिए जाएँ तो इससे व्यक्ति का जीवन और भी ज्यादा सफल हो जाता है। 

क्या कुछ हैं ये उपाय आइये जान लेते हैं:  

पितृपक्ष में स्नान दान और तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में यदि आप इस दौरान किसी ज्ञानी से श्राद्ध कर्म या पिंडदान करवाते हैं तो आपको अपने पितरों का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होगा। इसके अलावा अगर आपको अपने पितरों के मृत्यु की तिथि का पता हो तो उसके अनुसार ही श्राद्ध कर्म या पिंडदान किया जाए तो इसे बेहद ही उत्तम फलदाई माना जाता है। हालांकि अगर आपको अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि नहीं पता है या नहीं याद है तो आप आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन यह कम कर सकते हैं। इससे भी आपको पूर्ण फल की प्राप्ति अवश्य होगी। इसके अलावा पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए मुमकिन हो तो सोमवार का व्रत प्रारंभ कर दें और भूखे और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर के बजरंगबली को चोला चढ़ाएं। अपने बड़ों का सम्मान करें और गलती से भी उनका अनादर न करें। नियमित रूप से 11 दिन तक गौ माता को आटे की लोइयाँ बनाकर खिलाएं और उनकी पूजा और सेवा करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले अपने पूर्वजों को याद करना ना भूलें। गंगा स्नान पूर्णिमा वाले दिन करें और अपने पूर्वजों के नाम से हवन कराएं। मुमकिन हो तो पिंडदान भी करें। पशु पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करें। घर आए मेहमानों और भिखारियों का अनादर न करें और उन्हें भोजन अवश्य कराएं। घर में नियमित रूप से शुभ कार्य करते रहें। मंगलवार के दिन वृद्ध आश्रम जाकर वृद्धों की सेवा करें।

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