इस मासिक शिवरात्रि पर बन रहा है शोभन योग, जानें इस योग के लाभ।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी कि चौदहवें दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। वहीं महाशिवरात्रि साल में सिर्फ़ एक बार ही मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महा शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है और सच्ची निष्ठा से भगवान शिव की उपासना करता है, उसके बिगड़े काम भी बनने लगते हैं तथा उसकी हर मुश्किल आसान हो जाती है।

मई के महीने में कब पड़ रही है मासिक शिवरात्रि?

हिंदू पंचांग के अनुसार, मई की मासिक शिवरात्रि 28 मई, 2022 दिन शनिवार को मनाई जाएगी। आगे आने वाले महीनों की मासिक शिवरात्रि की तिथि जानने के लिए एस्ट्रोसेज के मासिक शिवरात्रि व्रत 2022 पर क्लिक करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक त्योहार है। इस दिन सच्चे दिल से भगवान शिव की उपासना करने वाले व्यक्ति का क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार और लालच नियंत्रण में रहता है। साथ ही वह अपनी इंद्रियों पर भी विजय प्राप्त करता है।

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मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व

मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने तथा सच्चे हृदय से भगवान शिव की उपासना करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, मुश्किल से मुश्किल काम आसान हो जाते हैं, व्यक्ति के अंदर साहस में वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप वह किसी भी परिस्थिति में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम होता है। वहीं जो कन्याएं मनपसंद जीवनसाथी पाना चाहती हैं, उन्हें इस व्रत का विधिवत पालन करने से मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है तथा उनके विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर हो जाती हैं।

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मासिक शिवरात्रि व्रत तथा पूजन विधि

मासिक शिवरात्रि का व्रत महिला व पुरूष दोनों जातकों द्वारा किया जा सकता है। जो लोग मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने की इच्छा रखते हैं, उन्हें महाशिवरात्रि के दिन से इसका आरंभ करना चाहिए। इसके लिए व्यक्ति को महा शिवरात्रि की रात में जागरण करना चाहिए तथा भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

मासिक शिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं।इसके बाद पवित्र स्नान कर साफ-स्वच्छ कपड़े पहनें।फिर किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय तथा नंदी की पूजा करें।पूजा करने के लिए सबसे पहले भगवान शिव का गंगाजल, घी, दूध, चीनी, शहद, दही आदि से रुद्राभिषेक करें। चूंकि ऐसी मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ अति प्रसन्न होते हैं।इसके बाद शिवलिंग पर साफ-स्वच्छ बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं।फिर धूप, दीप, फल, फूल, अगरबत्ती से भगवान शिव की पूजा करें।पूजा करते समय शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ अवश्य करें।यदि आप व्रत हैं तो शाम के समय फलाहार करें। किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण करना वर्जित होता है।फिर अगले दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने के बाद अपने व्रत का पारण करें।

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व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रहे कि मासिक शिवरात्रि का व्रत और उसका उद्यापन विधिवत तरीके से करें। मासिक शिवरात्रि के पूजन का समय मध्य रात्रि से आरंभ होता है, इसलिए भगवान शिव की पूजा रात 12 बजे के बाद ही करें।पूजा के समय ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करें क्योंकि मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।इस दिन सफ़ेद वस्तुएं दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है, इसलिए सफेद वस्तुओं का दान करें।कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन माता पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति को कर्ज़ों से मुक्ति मिलती है, इसलिए माता पार्वती की विधिवत पूजा करें।

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मासिक शिवरात्रि व्रत कथा

पौराणिक कथाओं और धर्म ग्रंथो के अनुसार, भगवान शिव महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि में शिवलिंग के रूप में अवतरित हुए थे, जिसका पूजन सबसे पहले ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने किया था। तभी से इस दिन को भगवान शिव के जन्म दिवस के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती और रति जैसी तमाम देवियों ने भी अपने जीवन के उद्धार के लिए शिवरात्रि का व्रत किया था।

वहीं एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव के क्रोध के कारण पूरी पृथ्वी जलने लगी थी और भस्म होने की कगार पर थी, तब माता पार्वती ने उन्हें शांत करने के लिए घोर तपस्या की। तब जाकर उनका क्रोध शांत हुआ था इसलिए माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से मनुष्य के अंदर का क्रोध ख़त्म हो जाता है।

एक दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच विवाद हो गया था कि दोनों में से कौन श्रेष्ठ है। तभी भगवान शिव वहां अग्नि के स्तंभ के रूप में प्रकट हुए और और सिर्फ़ इतना कहा कि ‘मुझे इस प्रकार के स्तंभ में कोई भी सिरा नज़र नहीं आ रहा है’। भगवान शिव की यह बात सुनकर दोनों को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और फिर उन्होंने भगवान से क्षमा याचना की। इसलिए मान्यता है कि शिवरात्रि का व्रत करने से मनुष्य के अंदर से अहंकार का नाश होता है।

इसके अलावा कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि का व्रत संतान सुख की प्राप्ति और तमाम रोगों से मुक्ति पाने के लिए भी किया जाता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है।

इस मासिक शिवरात्रि बन रहा है शोभन योग

वैदिक ज्योतिष में शोभन योग का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य फलदायी सिद्ध होते हैं। साथ ही इस योग में यदि आप कोई ज़रूरी यात्रा करते हैं तो वह यात्रा काफी सुखद और आरामदायक रहेगी और आपको उत्तम फलों की प्राप्ति होगी।

शोभन योग आरंभ: 27 मई, 2022 की रात 10 बजकर 07 मिनट से 

शोभन योग समाप्त:  28 मई, 2022 की रात 10 बजकर 21 मिनट तक

मासिक शिवरात्रि के दिन करें ये ज्योतिषीय उपाय

वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह वाली तस्वीर को पूजा करने के स्थान पर लगाएं और नियमित रूप से इसकी पूजा करें। पूजा के दौरान रुद्राक्ष माला से 108 बार “हे गौरी शंकर अर्धागिंनी यथा त्वं शंकर प्रिया तथा माम कुरू कल्याणी कान्त कान्ता सुदुर्लभम्” मंत्र का जाप करें। योग्य जीवनसाथी पाने के लिए मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के लिए व्रत करें तथा विधिवत पूजा करें। फिर एक रुद्राक्ष लेकर 108 बार “ॐ गौरी शंकर नमः” मंत्र का जाप करें। उसके बाद रुद्राक्ष को गंगाजल से शुध्द करके लाल धागे में पिरो कर अपने गले में धारण करें। ध्यान रहे कि रुद्राक्ष तब तक धारण करके रखना है, जब तक आपकी मनोकामना पूर्ण न हो जाए।विवाह में आ रही अड़चनों से निजात पाने के लिए मासिक शिवरात्रि के दिन शिव मंदिर में पांच नारियल ले जाएं और फिर भगवान के सामने आसान ग्रहण कर उनका जलाभिषेक करें। फिर चंदन, फूल, धतूरा, बेलपत्र आदि चढ़ाएं। इसके बाद “ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः” मंत्र का पांच माला जाप करें। उसके बाद पांचों नारियल भगवान शिव को चढ़ा दें।कोई विशेष मनोकामना पूरी करने के लिए मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को लस्सी और सफेद कपड़े चढ़ाएं। फिर भगवान से मनोकामना पूरी करने के लिए सच्चे दिल से प्रार्थना करें।

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