उज्जैन में विराजी हैं ‘भूखी माता’, सम्राट विक्रमादित्य ने बदली थी परंपरा; जानिए यहां क्यों चढ़ती है पशु बलि
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मंदिर में अब इंसान की बलि नहीं दी जाती है, बल्कि पशुओं की बलि दी जाती है. ऐसे में ग्रामीण इलाकों के लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां आकर बलि प्रथा का निर्वाहन करते हैं.
