कार्तिक अमावस्या और सूर्य ग्रहण आसपास- इन राशियों पर पड़ेगा गहरा प्रभाव!

कार्तिक अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और दान-पुण्य के कार्यों का बहुत महत्व है। इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा करना शुभ माना जाता है। ऐसे में हम आपको एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञ ज्योतिषियों द्वारा सुझाए गए कुछ उपायों के बारे में जानकारी देंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में कार्तिक अमावस्या के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही कार्तिक अमावस्या 2022 के दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान व इस पवित्र दिन का महत्व, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में भी बताएंगे।

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कार्तिक अमावस्या 2022 का महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को “कार्तिक अमावस्या” के नाम से मनाया जाता है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अक्टूबर-नवंबर महीनों में पड़ती है। सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या 2022 का विशेष महत्व है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, दानवीर राजा बलि का प्रताप सभी लोकों में फैल गया। उन्होंने अपने कारागार में लक्ष्मी जी तथा अन्य देवी-देवताओं को कैद कर लिया था। जिसके बाद कार्तिक अमावस्या पर, भगवान विष्णु ने उन्हें मुक्त कराया, लेकिन देवताओं ने अपने स्थान पर जाने की बजाय भगवान विष्णु के साथ क्षीर सागर में जाकर शरण ले ली। तब से भक्त कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी के साथ-साथ अन्य देवताओं की भी पूजा करते हैं और रात भर जाग कर उनकी अराधना करते हैं। जिसके चलते माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु सहित सभी देवी-देवता भक्तों की अपार श्रद्धा से प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देते हैं।

कार्तिक अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण और पिंड दान तथा दान देने का खास मह‍त्व बताया गया है। इसके साथ ही धर्मार्थ दान और स्नान के लिए भी यह दिन अच्छा माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस दिन का महत्व बताते हुए कहा था कि ‘यह मेरा सबसे प्रिय दिन है और जो कोई भी इस दिन मेरी वंदना करेगा, उसके समस्त ग्रह दोष दूर हो जाएंगे।’

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कार्तिक अमावस्या 2022: तिथि, समय और शुभ मुहूर्त

कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर, 2022 को शाम 05 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन 25 अक्टूबर, 2022 को शाम 04 बजकर 20 मिनट पर होगा। कार्तिक माह की शुरुआत के दिन यानी कि 24 अक्टूबर को दिवाली उत्सव शुरू हो जाएगा। इसके अलगे दिन 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण भी लगेगा, लेकिन दिवाली पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 25 अक्टूबर को आंशिक सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार 04 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगा और 06 बजकर 06 मिनट तक चलेगा। हालांकि, भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखेगा।

लक्ष्मी पूजा के लिए मुहूर्त: शाम 06 बजकर 53 मिनट से 08 बजकर16 मिनट तक

पूजा अवधि: 1 घंटा 23 मिनट

वृषभ काल: 06 बजकर 53 से 08 बजकर 48 मिनट तक

प्रदोष काल: 05 बजकर 43 से 08 बजकर 16 मिनट तक

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इस राशियों पर पड़ सकता है सूर्य ग्रहण का प्रभाव!

वृषभ: सूर्य ग्रहण के दौरान वृषभ राशि वाले जातकों को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस अवधि के दौरान आप धन संबंधित समस्या या किसी भी प्रकार की समस्या के चलते मानसिक तनाव ले सकते हैं।

मिथुन: इस अवधि के दौरान मिथुन राशि के जातकों को आर्थिक मामले में सोच समझकर फैसला लेना चाहिए। इस दौरान आपके खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में पैसों को खर्च करते समय सचेत रहें। आपकी आमदनी का स्तर कम हो सकता है। साथ ही दाम्पत्य जीवन में भी तनाव पैदा हो सकता है। पति पत्नी बीच विवाद होने की भी आशंका है।

कन्या: कन्या राशि के जातकों को इस दौरान आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी चीजों में निवेश करने से पहले मार्गदर्शन जरूर लें।

तुला: इस अवधि के दौरान तुला राशि वालों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वास्थ्य पर भी आपको ध्यान देना होगा। अगर आप कोई भी वाहन चलाते हैं तो सावधानी जरूर बरतें अन्यथा परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है।

वृश्चिक: वृश्चिक राशि वालों के लिए भी यह सूर्य ग्रहण अनुकूल नहीं है। आपकी आय में कमी आ सकती है। धन हानि हो सकती है। कहीं भी निवेश करने से पहले विचार करें। कोशिश करें कि इस दौरान निवेश करने से बचें।

मकर: इस दौरान इस राशि के जातकों का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। ऐसे में आपको संयम रखने की जरूरत है। इस दौरान कुछ बातें आपके मन को परेशान कर सकती हैं।

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कार्तिक अमावस्या 2022: व्रत करने के नियम

कार्तिक अमावस्या के महत्व को समझने के लिए आइए जानते हैं कैसे करें इस दिन व्रत का पालन व इससे जुड़ी प्रथाओं के बारे में।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।सूर्य देव को जल में तिल मिलाकर अर्घ्य दें।श्री नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे आप ग्रहों की स्थिति को अनुकूल कर सकते हैं। नवग्रह के दोषों को दूर करने के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।शहद से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।मंदिर में दीपक जलाएं व किसी जरूरतमंद की मदद करें। इससे शनि दोष से राहत मिलेगी।माँ लक्ष्मी को फूल, मिठाई, फल और खीर का भोग लगाएं।इस दौरान केवल सात्विक भोजन, फल ​​और दूध का ही सेवन करें।इस दौरान तामसिक भोजन जैसे- मांस, अंडा, शराब व नशीले पदार्थों का सेवन न करें।प्याज और लहसुन खाने से भी परहेज करें।इस दौरान मेवे, फल, दूध, मक्खन व आटे में राजगिरा का आटा, कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा का इस्तेमाल करें।शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी, दूध, छाछ और ताजे जूस का सेवन करते रहें।खाना में सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, जीरा, दालचीनी, हरी इलायची, लौंग, काली मिर्च पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च जैसे मसालों का इस्तेमाल करें।

कार्तिक अमावस्या पर तुलसी पूजा का महत्व

कार्तिक अमावस्या के दिन तुलसी की पूजा करने का खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और दिव्य आशीर्वाद देते हैं। इस दिन स्नान के बाद तुलसी और सूर्य को जल अर्पित किया जाता है। पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही तुलसी के पौधे का दान भी किया जाता है। तुलसी पूजन से न केवल घर के रोग, दुख दूर होते हैं बल्कि अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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