कालसर्प और शनि दोष से मुक्ति दिलाएँगे नाग पंचमी के ये उपाय-लेकिन इस दिन भूल से भी मत कर देना ये काम वरना….

नाग पंचमी त्योहार के बारे में तो आपने यकीनन ही सुना होगा लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि यदि कुंडली में कालसर्प दोष मौजूद हो तो उसके निवारण के लिए या उस दोष के प्रभाव को अपने जीवन में कम करने के लिए नाग पंचमी का दिन बेहद ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है? अगर नहीं तो इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि ऐसा क्यों। साथ ही जानेंगे इस वर्ष नाग पंचमी किस दिन मनाई जा रही है और किन उपायों को करके आप नाग पंचमी के दिन का पूर्ण फल अपने जीवन में प्राप्त कर सकते हैं।

नाग पंचमी का यह त्यौहार हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। ऐसे में इस वर्ष यह पर्व 2 अगस्त, 2022 मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। सनातन धर्म में नाग की इस पूजा के पर्व को बेहद ही पावन और शुभ माना जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि नाग देवता को भगवान शिव अपने गले में आभूषण की तरह धारण करते हैं। ऐसे में मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि नागों की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक शक्ति, अपार धन, और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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2022 में नाग पंचमी कब है?

2 अगस्त, 2022- मंगलवार

नाग पंचमी मुहूर्त 

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त : 05:42:40 से 08:24:28 तक 

अवधि : 2 घंटे 41 मिनट

जानकारी: ऊपर दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए मान्य है। यदि आप अपने शहर के अनुसार इस दिन का शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं तो यहां क्लिक कर सकते हैं।

इस वर्ष सालों बाद नाग पंचमी के दिन शिव अथवा सिद्धि योग का अद्भुत संयोग भी बन रहा है जो की इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देगा। बात करें समय की तो, शिव योग 2 अगस्त को शाम 06 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और इसके बाद सिद्धि योग प्रारंभ हो जाएगा। 

नाग पंचमी पूजा का महत्व

नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा का विधान बताया गया है। कहते हैं नाग पंचमी का यह त्यौहार सावन की ही तरह भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से व्यक्ति की मनोवांछित इच्छा पूरी होती है। इसके अलावा चूंकि सावन का महीना अपने आप में ही भगवान शिव को समर्पित होता है ऐसे में उनके गले में विराजित नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

इसके अलावा नाग पंचमी का यह त्यौहार नाग के साथ-साथ अन्य सभी जीव जंतुओं और उनकी रक्षा के लिए और उनके संवर्धन और संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरणा भी देता है नाग पंचमी के दिन यदि सांपों को स्नान कराया जाए और उनकी पूजा की जाए तो इससे व्यक्ति को अक्षय पुण्य यानी कभी ना खत्म होने वाले पुण्य की प्राप्ति होती है इसके अलावा इस दिन नागों की पूजा करने वाले जातकों के जीवन से सर्पदंश का खतरा भी कम होने लगता है ऐसे में इस दिन बहुत से लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे पर सांप का चित्र बनाते हैं और घर पर नाग देवता की पूजा करते हैं तो ऐसा करने से घर के सदस्यों के दुख दूर होते हैं

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नाग पंचमी की सही पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएँ। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। नाग देवता की तस्वीर की पूजा करें। हालांकि इस दिन भूल से भी नाग देवता को दूध ना पिलाएं। ऐसा क्यों? यह जानने के लिए हमारा यह विशेष लेख अंत तक अवश्य पढ़ें। भगवान शिव, माँ पार्वती और भगवान गणेश को भोग लगाएं। नाग देवता की कथा सुनाएँ और सुनें।अंत में नाग देवता की आरती करें और उनकी और महादेव की कृपा हमारे जीवन में बनी रहे इसकी कामना करें।

नाग पंचमी का ज्योतिषीय महत्व

आमतौर पर साँपों को अक्सर बुरी नजर से ही देखा जाता है। अर्थात लोग नागों से भयभीत हो उठते हैं लेकिन, सनातन धर्म में सर्पों को हमेशा ही पूजनीय माना गया है। भगवान श्री विष्णु खुद शेषनाग पर विराजमान होते हैं। इसके अलावा विष्णु पुराण में सर्प का जिक्र मिलता है। यहां पर शेषनाग की कई जगह चर्चा की गई है। इसके अलावा शिव पुराण में भी वासुकी नामक सांप की चर्चा की गई है जिसे भगवान शिव गले में धारण करते हैं। भागवतगीता में भी नागों के 9 प्रकार का जिक्र करते हुए उनकी पूजा के विधान के बारे में बताते हुए लिखा गया है कि,

श्लोक :

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् ।

शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं, कालियं तथा ।।   

अर्थात : अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक एवं कालिया, इन नौ जातियों के नागों की आराधना करते हैं। इससे सर्प भय नहीं रहता और विषबाधा नहीं होती।

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इसके अलावा ज्योतिष के अनुसार कहा जाता है कि, जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या नाग दोष या शनि राहु दोष होता है उन्हें इन दोषों की शांति के लिए नाग पंचमी का दिन बेहद ही उपुक्त बताया जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव की पूजा करने, उनका रुद्राभिषेक करने से, उपरोक्त दोषों की शांति होती है। इसके साथ ही यदि किसी की कुंडली में राहु केतु की दशा चल रही हो तो भी नाग पंचमी की पूजा से उन्हें लाभ मिलता है। जिनका जन्म अश्लेषा नक्षत्र में होता है उनके लिए नाग पंचमी की पूजा विशेष शुभ होती है। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आप का जन्म किस नक्षत्र में हुआ है तो यहां क्लिक कर सकते हैं इसके अलावा यदि कुंडली का पंचम भाव पीड़ित हो या फिर संतान संबंधित समस्याएं जीवन में निरंतर बनी हुई हो तो भी नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ परिणाम मिलते हैं।

नाग पंचमी से जुड़ी भगवान श्री कृष्ण की कहानी

कहा जाता है कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी गेंद यमुना नदी में जा गिरी। यह वही नदी थी जिसमें कालिया नाग रहता था। ऐसे में सभी बच्चे भयभीत हो उठे लेकिन श्री कृष्ण गेंद को लाने के लिए नदी में कूद पड़े। नदी में मौजूद कालिया नाग ने भगवान कृष्ण पर हमला कर दिया लेकिन कृष्ण तो ठहरे भगवान, उन्होंने कालिया नाग को जो सबक सिखाया उसके बाद कालिया नाग ने ना केवल भगवान कृष्ण से माफी मांगी बल्कि उसने इस बात का वचन भी दिया कि अब वह गांव में मौजूद किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा। कालिया नाग पर प्रभु श्री कृष्ण की इसी जीत को नाग पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है।

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नाग पंचमी के दिन भूल से भी ना करें यह काम

नाग पंचमी के दिन जमीन की खुदाई ना करें। इसके अलावा बहुत से लोग नाग पंचमी के दिन नाग ढूंढने निकल जाते हैं और कोशिश करते हैं कि नागों की पूजा की जाए और उनको भी दूध पिलाया जाए हालांकि यह बिल्कुल गलत है। आप नाग पंचमी के दिन हमेशा नाग देवता की तस्वीर या फिर मिट्टी या धातु से बनी उनकी प्रतिमा की पूजा करें। उसके अलावा मुमकिन हो तो इस दिन सपेरों से नाग खरीद लें और उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाकर मुक्त कर दें।

हम बार-बार कह रहे हैं कि, नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा ना करें बल्कि उनकी तस्वीर की पूजा करें और उन्हें दूध भी ना पिलाएँ। तो आइए ऐसा क्यों कह रहे हैं हम इसकी वजह भी जान लेते हैं:  

दरअसल नाग पंचमी के दिन हम सपेरों द्वारा पकड़े गए नागों की पूजा करते हैं लेकिन यह सरासर गलत माना गया है। यह गलत इसलिए होता है क्योंकि जब सपेरे नाग को पकड़ते हैं तो वह उनके दांत तोड़ देते हैं क्योंकि जब सांप के दांत नहीं होंगे तो वह शिकार नहीं कर पाएगा।

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ऐसे में नाग बिना दांत के भूखे रहने को मजबूर हो जाते हैं। इसके बाद नाग क्योंकि कई दिन के भूखे हो जाते हैं ऐसे में वह दूध को भी पानी समझकर पीने लगते हैं लेकिन दाँत तोड़े जाने की वजह से सांप के मुंह में बने घाव इससे और खराब होने लगते हैं और अंत में सांपों की मौत हो जाती है। 

यहां यह बात भी सभी को समझने वाली है कि सांप ज्यादातर शाकाहारी नहीं होते हैं। ऐसे में यह दूध नहीं पीते हैं। यही वजह है कि हम बार-बार कह रहे हैं कि नाग पंचमी पर नाग की तस्वीर की पूजा करें और उन्हें दूध ना पिलाएँ और मुमकिन हो तो सपेरों से नाग को पकड़कर उन्हें मुक्त कर दें।

उम्मीद करते हैं आप ऐसा ही करेंगे। यदि आपकी इस बारे में कुछ और राय है तो हमें कमेंट करके अवश्य बताएं।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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