कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन करें ये उपाय

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ‘वैशाख’ साल का दूसरा महीना होता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी वैशाख महीने से त्रेता युग का आरंभ हुआ था। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में इस अमावस्या का बहुत महत्व है। आपको बता दें कि दक्षिण भारत में वैशाख अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। वैशाख अमावस्या को सुतवाई अमावस्या तथा भौमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में दिव्य स्नान करते हैं। दान-पुण्य करते हैं तथा पितरों का तर्पण आदि करते हैं। साथ ही काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय भी करते हैं। 

इस वर्ष वैशाख अमावस्या 30 अप्रैल, 2022 को पड़ रही है। आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि वैशाख अमावस्या का शुभ मुहूर्त क्या है? इसकी पौराणिक कथा क्या है? इस दिन क्या-क्या धार्मिक कर्म किए जाते हैं तथा विभिन्न समस्याओं के निवारण के निवारण के लिए क्या-क्या उपाय किए जाने चाहिए?

भविष्य से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान मिलेगा विद्वान ज्योतिषियों से बात करके

वैशाख अमावस्या मुहूर्त

दिनांक: 30 अप्रैल, 2022

दिन: शनिवार

हिंदी महीना: वैशाख

अमावस्या आरंभ: 30 अप्रैल, 2022 को 00:59:27 बजे से

अमावस्या समाप्त: 1 मई, 2022 को 01:59:10 बजे तक

वैशाख अमावस्या व्रत तथा धार्मिक कर्म

मान्यता है कि पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रत्येक अमावस्या पर व्रत रखना चाहिए। अब बात करते हैं कि वैशाख अमावस्या के दिन क्या-क्या धार्मिक कर्म किए जाने चाहिए।

इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर के पास नदी न हो तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर पवित्र स्नान करें।उसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर बहते हुए पानी में तिल प्रवाहित कर दें।पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए व्रत करें तथा तर्पण करें।निर्धन या ग़रीब लोगों को दान-दक्षिणा आदि दें।वैशाख अमावस्या के दिन सुबह-सुबह पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए तथा शाम के समय एक दीपक जलाना चाहिए।ग़रीब या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और वस्त्र तथा अन्न आदि दान करें।

बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा

वैशाख अमावस्या के दिन वर्जित कार्य

वैशाख अमावस्या के दिन बहुत देर तक नहीं सोना चाहिए।मांस, शराब, प्याज़, लहसुन, अन्न आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।क्रोध, बहस, वाद-विवाद आदि करने से बचना चाहिए।किसी का अनादर नहीं करना चाहिए।किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए और न ही किसी के लिए मन में ईर्ष्या रखनी चाहिए।

ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से मुफ्त जन्म कुंडली प्राप्त करें

पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथ के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण थे। उनका नाम धर्मवर्ण था। बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के ब्राह्मण धर्मवर्ण, ऋषि-मुनियों का बहुत आदर-सम्मान करते थे। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुंह से सुना कि कलयुग में भगवान विष्णु का स्मरण करने से ज़्यादा पुण्य किसी चीज़ में नहीं है। यह बात धर्मवर्ण के मन में बस गई। जिसके बाद उसने सभी सांसारिक सुखों को त्याग कर सन्यास ले लिया और भ्रमण करने लगा। एक बार वह भ्रमण करते-करते पितृलोक पहुँच गया, जहां उसने देखा कि उसके पितर बहुत ही कष्ट में हैं। उनकी यह हालत देखकर धर्मवर्ण ने अपने पितरों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि तुम्हारे सन्यास लेने के कारण ही ये सब हुआ है क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई नहीं है।

ये सब सुनकर धर्मवर्ण को बहुत दुःख हुआ और फिर उसने उनसे इसका उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि यदि तुम पुनः अपना गृहस्थ जीवन शुरू करो और संतान पैदा करो, साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधिविधान से पिंडदान करो तो हमें इन कष्टों से राहत मिल सकती है। तब धर्मवर्ण ने अपने पितरों को वचन दिया कि वह उनकी इच्छा ज़रूर पूरी करेगा। इसके बाद धर्मवर्ण ने सन्यासी जीवन त्याग दिया और फिर से सांसारिक जीवन अपना लिया। फिर वैशाख अमावस्या के दिन विधिविधान के साथ पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई। तभी से हिन्दू धर्म में वैशाख अमावस्या का महत्व और ज़्यादा हो गया।

नये साल में करियर की कोई भी दुविधा कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट से करें दूर

जीवन में मौजूद विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन करें ये उपाय

जीवन में मौजूद अनेक परेशानियों को दूर करने के लिए, वैशाख अमावस्या के दिन सुबह नहाने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम जपें। इसके बाद घर के पास किसी नदी या तालाब में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।मान्यता है कि वैशाख अमावस्या के दिन काली चीटियों को शक्कर (चीनी) मिला हुआ आटा खिलाने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा नए पुण्यों का उदय होता है।कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन सुबह दिव्य स्नान करने के बाद चांदी से बने नाग-नागिन की पूजा करें। फिर सफेद फूलों के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।कालसर्प दोष को दूर करने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से घर में शिवपूजन और हवन आदि भी कराना चाहिए।वैशाख अमावस्या की रात को लाल रंग के 5 फूल और 5 जलते हुए दीपक बहती नदी में प्रवाहित करने से धन लाभ प्राप्ति के योग बनते हैं।वैशाख अमावस्या की रात में यदि आप काले कुत्ते को तेल की चुपड़ी खिलाएं और उसी समय कुत्ता रोटी खा ले तो ऐसा माना जाता है कि इससे सभी शत्रु शांत हो जाते हैं।वैशाख अमावस्या के दिन निर्धन व ज़रूरतमंद लोगों को भोजन कराने से पुण्य मिलता है।

सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

The post कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए वैशाख अमावस्या के दिन करें ये उपाय appeared first on AstroSage Blog.

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *