क्या आपकी कुंडली में है नीच भंग राजयोग? जानें

क्या आपके मन में कभी ऐसे सवाल आते हैं कि मशहूर हस्तियों या सेलिब्रिटीज की कुंडली में या फिर उनके ग्रहों की स्थिति में ऐसा क्या है जो उन्हें सबसे अलग बनाता है और उस मुकाम पर पहुंचाता है जहां आज वह हैं। जबकि अन्य लोग सामान्य जीवन जीते हैं। इन सेलिब्रिटीज की प्रसिद्धि और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीने का राज़ कुंडली में विभिन्न ग्रहों की स्थितियों से बन रहे राजयोगों में छिपा हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में राजयोग को अत्यंत शुभ माना जाता है और यह व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है। राजयोग जातक को शक्ति और पद देने के साथ-साथ राजा के समान जीवन जीने में सहायता करता है।

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जिन लोगों की कुंडली में राजयोग होता है, उन्हें यह सुख-समृद्धि से पूर्ण और वैभवशाली जीवन देता है। वैदिक ज्योतिष में कुल 32 तरह के राजयोग होते हैं जो मनुष्य को मान-सम्मान और सामान्य जीवन से हटकर एक विशिष्ट जीवन प्रदान करते हैं। ग्रहों की स्थिति का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ने के साथ-साथ समस्याओं से मुक्ति पाने का समाधान ढूंढ सकता है। लेकिन, आपको यह महत्वपूर्ण बात याद रखनी चाहिए कि किसी व्यक्ति की कुंडली में सारे राजयोग मौजूद नहीं हो सकते हैं।

आपको ऐसे कई व्यापारी, राजनेता और सेलिब्रिटी जैसे अभिनेता, गायक आदि मिल जाएंगे जिनकी कुंडली में नीच भंग राजयोग (32 राजयोगों में से एक) मौजूद है। हम इस राजयोग के बारे में ब्लॉग में आगे भी बात करेंगे। लेकिन उससे पहले बता दें कि एस्ट्रोसेज चाहता है कि हमारे पाठक ज्योतिष के विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करें इसलिए हम अपने हर ब्लॉग को बेहद रोचक बनाने की कोशिश करते हैं। अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि आख़िर राजयोग क्या होता है और यह कुंडली में कब व कैसे बनता है। 

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क्या होता है नीच भंग राजयोग? 

अगर हम बात करें नीच भंग राजयोग के बारे में, तो यह उस समय बनता है जब कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में स्थित होता है और वह उस राशि में मौजूद उच्च ग्रह के साथ बैठ जाता है या इस राशि में मौजूद उच्च ग्रह की दृष्टि नीच अवस्था में उपस्थित ग्रह पर पड़ती है। इस प्रकार, कुंडली में नीच भंग राजयोग का निर्माण होता है। जो ग्रह अपनी नीच राशि में या नीच अवस्था में होता है, वह अपनी महादशा के दौरान व्यक्ति को अपार सफलता, समृद्धि और प्रसिद्धि का आशीर्वाद देता है।   

इसके अलावा, कुंडली में नीच भंग राजयोग उस समय बनता है जब एक ग्रह अपनी नीच राशि में और दूसरा ग्रह अपनी उच्च राशि के पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में (केंद्र भाव) स्थित होता है या एक साथ एक रेखा में स्थित होते हैं। लेकिन, अगर यह दोनों ग्रह छठे या आठवें भाव में बैठे जाते हैं, तो कभी-कभी विपरीत राजयोग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह भी नीच भंग राजयोग के समान ही माना जाता है।  

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उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मिथुन लग्न की है और शुक्र देव कन्या राशि में स्थित है जहाँ शुक्र नीच अवस्था में होते हैं। वहीं,  बुध महाराज भी कन्या राशि में विराजमान हैं जो कि इनकी उच्च राशि है या इनकी दृष्टि कन्या राशि पर पड़ रही है, तो शुक्र की नीच अवस्था भंग हो जाती है। कुंडली में बुध और शुक्र की इस तरह की स्थिति नीच भंग राजयोग बनाती है। 

अब हम आगे देखेंगे कि कुंडली में नीच भंग राजयोग के निर्माण के लिए ग्रहों को किन शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है। 

नीच भंग राजयोग के निर्माण के लिए आवश्यक है ये शर्तें  

जिन जातकों की कुंडली में नीच भंग राजयोग बनता है, वह अपने जीवन में आने वाली हर समस्या से बाहर आने में सक्षम होते हैं। साथ ही, यह बिना किसी मदद के अपनी सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कुंडली में बनने वाला यह योग जातक को नाम, प्रसिद्धि, सम्मान, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है। हालांकि, यह बात आपको ध्यान रखनी होगी कि जब दोनों में से किसी एक ग्रह की दशा चल रही होगी, तो उस समय आपको नीच भंग राजयोग के परिणाम प्राप्त होंगे।  

हम सभी इस बात को जानते हैं कि नीच भंग राजयोग का निर्माण होने के लिए नीच अवस्था में मौजूद ग्रह का नीच भंग होना बेहद आवश्यक होता है। लेकिन, कुंडली में उच्च ग्रह और नीच ग्रह की युति से बनने वाले इस योग के लिए सिर्फ इसी शर्त का पूरा होना जरूरी नहीं है, बल्कि इस योग के निर्माण के लिए कई अन्य दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है। आइये जानते हैं कि कौन सी हैं वह शर्तें।

सबसे पहली शर्त है कि नीच भंग राजयोग के लिए कुंडली में एक ग्रह नीच अवस्था में और उस राशि का स्वामी चंद्रमा से केंद्र भाव में स्थित होना चाहिए।दूसरे नियम के अनुसार, कुंडली में नीच भंग राजयोग जिस भी भाव में बन रहा है वह भाव चन्द्रमा से केंद्र में होना जरूरी है।कुंडली में नीच भंग राजयोग उस समय बनता है जब एक ग्रह नीच राशि में स्थित होता है और राशि स्वामी केंद्र भाव या लग्न भाव से पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में उपस्थित होता है।नीच भंग राजयोग बनने की एक अन्य शर्त यह भी है कि जब एक ग्रह अपनी नीच राशि में और उस नीच राशि के स्वामी की दृष्टि अपनी उच्च राशि पर पड़ रही हो। अगर किसी की कुंडली में स्थित नीच ग्रह नवमांश कुंडली में उच्च का हो जाता है, तब भी नीच भंग राजयोग का निर्माण होता है। नीच भंग राजयोग बनने की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि राशि में स्थित नीच ग्रह और राशि में मौजूद उच्च ग्रह दोनों ही लग्न भाव के लिए लाभकारी अवस्था में होने चाहिए।

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कुंडली में नीच भंग राजयोग होने पर मिलते हैं कुछ ऐसे परिणाम 

ज्योतिष शास्त्र में नीच भंग राजयोग को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है और इसकी गणना ज्योतिष के सबसे शुभ योगों में होती है। कई मशहूर हस्तियों और राजनेताओं की कुंडली में नीच भंग राजयोग मौजूद हैं जो उन्हें कई तरह से लाभ प्रदान करता है और इस योग की वजह से ही उन्होंने देश-दुनिया में लोकप्रियता हासिल की है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह भी है कि कुंडली में नीच भंग राजयोग का बनाना दर्शाता है कि इस व्यक्ति का जीवन कोई सुहाना सफ़र नहीं होगा और न ही यह चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं।

किसी जातक की कुंडली में नीच भंग राजयोग की मौजूदगी बताती है कि इस व्यक्ति को अपने जीवन में उतार-चढ़ावों और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जिन पर विजय पाते हुए यह सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। यह इंसान जीवन में आने वाली हर परेशानी को पार करने और अपने मनपसंद करियर में अपनी छाप छोड़ने में सक्षम होंगे, चाहे वह राजनीति, एक्टिंग, खेल या बिज़नेस हो।

जो भी शर्तें हमने आपको ऊपर बताई हैं उन सभी शर्तों को पूरा करने पर कुंडली में नीच भंग राजयोग बनता है। यह योग जातक को  धैर्य, आकर्षक व्यक्तित्व, ज्ञान प्रदान करता है और व्यक्ति को कलाओं में कौशलता की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग अपने करियर के क्षेत्र में सर्वोच्च पद हासिल करते हुए अपनी छाप छोड़ते हैं। ये व्यक्ति धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगते हैं और एक राजा के समान जीवन जीते हैं।

अब हम यहाँ आपको उन हस्तियों के नाम बताएंगे जिनकी कुंडली में नीच भंग राजयोग मौजूद है। इन लोगों ने कठिनाइयों और समस्याओं से भरा जीवन जीते हुए अपने क्षेत्र में नाम कमाया है। इन्हीं शख्सियतों में से एक हैं श्री नरेंद्र मोदी (भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री), बराक ओबामा (अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति), डेविड कैमरन (यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री), पाब्लो पिकासो (स्पेन के प्रसिद्ध चित्रकार और मूर्तिकार) आदि। यह सभी नाम इस बात के उदाहरण हैं कि जीवन में तमाम मुश्किलों और परेशानियों के बावजूद भी यह लोग अपनी मेहनत और धैर्य के बल पर राजा के समान जीवन जीने में सक्षम हुए हैं।

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