क्यों गणपति से संबन्धित माना जाता है स्वास्तिक, क्यों इसके आसपास लिखा जाता है शुभ-लाभ !

गणपति को प्रथम पूज्य माना गया है. बुधवार का दिन गणपति की पूजा (Worship of Ganpati)) के लिए बेहद खास माना जाता है. किसी भी पूजा पाठ या धार्मिक अनुष्ठान करते समय सबसे पहले गणपति की आराधना की जाती है. मान्यता है कि सबसे पहले गणपति की आराधना करने से उस कार्य के बीच आने वाले सारे विघ्न दूर होते हैं और आपकी पूजा सफल हो जाती है. लेकिन आपने गौर किया होगा कि गणपति की पूजा के दौरान स्वास्तिक जरूर बनाया जाता है और स्वास्तिक के दोनों किनारों पर शुभ-लाभ लिखा जाता है. तमाम लोग घर के मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक बनाते हैं. स्वास्तिक का संबन्ध भी गणेश भगवान से माना गया है. यहां जानिए स्वास्तिक क्यों गणपति से संबन्धित माना जाता है और इसके इर्द-गिर्द शुभ-लाभ क्यों लिखा जाता है?

इस तरह गणपति से संबन्धित है स्वास्तिक

पौराणिक मान्यता के अनुसार गणपति का विवाह विश्वकर्मा पुत्री ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ था. वहीं स्वास्तिक को बुद्धि का प्रतीक माना जाता है. बुद्धि के देवता भगवान गणेश हैं, इस तरह स्वास्तिक गणपति का रूप है. स्वास्तिक की दोनों अलग-अलग रेखाएं गणपति की दोनों पत्नी ऋद्धि और सिद्धि को दर्शाती हैं और शुभ-लाभ इनके पुत्र माने गए हैं. स्वास्तिक के बीचों बीच चार टीके लगाए जाते हैं ये गौरी, पृथ्वी, कूर्म व देवताओं के निवास स्थान माने गए हैं. इस तरह जब हम कहीं पर स्वास्तिक बनाते हैं तो वहां गणपति के परिवार की मौजूदगी मानी जाती है. इसलिए स्वास्तिक को बेहद शुभ माना गया है.

स्वास्तिक बनाने से होते ये लाभ

तमाम लोग अपनी दुकानों में, तिजोरी पर, घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाते हैं. इसकी वजह है कि जिस जगह स्वास्तिक बना होता है, वहां गणपति के परिवार का वास होता है. इससे उस स्थान की नकारात्मकता दूर होती है, विघ्न टल जाते हैं और सुख समृद्धि और संपन्नता आती है. जिन लोगों को सोते समय बुरे सपने आते हैं, या किसी तरह का डर सताता है, वे अगर सोने से पहले तर्जनी उंगली से उस स्थान पर स्वास्तिक बनाकर सोएं, तो ये समस्या दूर हो जाती है. घर के अंदर बना स्वास्तिक वास्तु दोषों को दूर करने का काम करता है.

ये भी हैं गणपति के परिवार में शामिल

शिव और गौरी के पुत्र गणेश जी की पत्नी और पुत्रों के बारे में तो आपने जान लिया, लेकिन उनकी बहुओं, पुत्री और पोतों के बारे में आप शायद न जानते हों. शास्त्रों में तुष्टि और पुष्टि को गणपति जी की बहुएं बताया गया है और आमोद और प्रमोद को उनके पोते बताया गया है. माता संतोषी को गणपति की पुत्री माना जाता है. माता संतोषी के लिए शुक्रवार का दिन समर्पित होता है. उनके पूजन व व्रत के बहुत कड़े नियम बताए जाते हैं.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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