घर के मंदिर में इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, आपके घर में हों, तो आज ही हटा दें

हर किसी के घर में भगवान का एक मंदिर होता है, जहां तमाम देवी देवताओं की तस्वीरें रखी होती हैं और घर के सदस्य उनकी पूजा करते हैं. लेकिन हिंदू धर्म में पूजा पाठ से जुड़े तमाम नियमों के बारे में बताया गया है. इन नियमों का पालन हम सभी को करना चाहिए. पूजा के दौरान छह चीजों को मंदिर में न रखने के लिए कहा गया है. मान्यता है कि इन्हें रखने या इनका पूजा में इस्तेमाल करने से भगवान रुष्ट हो जाते हैं. अगर आपके घर में भी मंदिर है, तो एक बार देख लें कि कहीं आप भी तो अनजाने में गलतियां नहीं कर रहे हैं. अगर आपके मंदिर में भी ऐसा कुछ रखा हुआ है, तो इसे फौरन हटा दें. जानें पूजा पाठ से जुड़े नियम (Rules for Worship).

पूजा के दौरान न करें ये गलतियां

घर के मंदिर में किसी भी भगवान की एक से ज्यादा मूर्ति न रखें. अगर रखी भी हैं, तो इस बात का खयाल रखें कि इनकी संख्या 3, 5, 7 नहीं होनी चाहिए.

घर के मंदिर में लोग अक्सर शिवलिंग रखते हैं, लेकिन शिवलिंग के ​भी कुछ नियम होते हैं. शिवपुराण में कहा गया है कि घर में एक से ज्यादा शिवलिंग नहीं रखने चाहिए. चूंकि शिवलिंग से हर वक्त ऊर्जा का संचार होता है, इसलिए शिवलिंग को हमेशा खुले स्थान पर रखना चाहिए. इसका आकार कभी भी अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए.

घर के मंदिर में भगवान के रौद्ररूप वाली किसी भी तस्वीर को रखने से परहेज करें. हमेशा वो तस्वीर रखें, जिसमें ईश्वर मुस्कुराते हुए दिख रहे हों. क्रोध करने वाली तस्वीर को रखना अशुभ माना गया है, जबकि मुस्कुराती तस्वीर को शुभ माना जाता है. ये घर में सकारात्मकता लाती है.

यदि आपके मंदिर ने भगवान की कोई मूर्ति या तस्वीर टूट गई हो, तो उसे न रखें. ऐसी मूर्ति को खंडित माना गया है. खंडित मूर्ति को घर में रखना अशुभ माना जाता है. इससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है. अगर ऐसी कोई तस्वीर मंदिर में है, तो आज ही इसे हटा दें.

पूजा पाठ के दौरान चावल को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. चावल को शुद्ध अनाज माना जाता है. ये पूजा में पुष्प की कमी को भी पूरा कर देता है. लेकिन भगवान पर कभी भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए. इसे भी अशुभ माना गया है. अगर आपके घर के मंदिर में टूटे चावल हैं, तो आज ही इन्हें हटाकर साबुत चावल रखें.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारितहैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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