ज्ञानवापी मस्जिद की तरह विश्व के इन धार्मिक स्थलों को लेकर भी चल रहा है विवाद

भारत में ज्ञानवापी मस्जिद ( Gyanvapi Masjid ) को लेकर दो धार्मिक समुदायों के बीच कथित रूप से विवाद छिड़ा हुआ है. मस्जिद में शिवलिंग के होने का दावा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मस्जिद में शिवलिंग को लेकर उठा विवाद यहां हुए सर्वे के बाद और बढ़ गया है. इससे पहले सर्वे करने वाली टीम ने यहां गुरुवार को अपना काम किया और कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश कर दी. ये मामला वैसे तो लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन इसे लेकर साल 1991 में कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इसमें कहा गया था कि यहां पूजा करने की इजाजत दी जाए. कहते हैं कि मुगल शासक औरंगजेब ने जबरन काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से तोड़कर मस्जिद बनवाई थी.

वैसे ज्ञानवापी मस्जिद का मामला भारत में फिलहाल गरमाया हो, लेकिन दुनिया भर में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जिन्हें लेकर धर्मों के बीच कथित रूप से विवाद छिड़ा हुआ है. हम आपको ऐसे ही कुछ धार्मिक स्थलों के बारे में बताने जा रहे हैं.

जेरुसलेम

इजरायल में स्थित छोटे से शहर जेरुसलेम में धर्म की कथित लड़ाई लंबे समय से चल रही है. धार्मिक उथल-पुथल के चलते इस जगह को लेकर मिडल ईस्ट में हमेशा चर्चा रहती है. कहते हैं इस जगह को तीन धर्म अपना पूजनीय स्थान मानते हैं. बीते कुछ समय से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच इसे लेकर लड़ाई काफी बढ़ गई थी. यहूदियों में इस जगह को यरुशलम कहा जाता है, वहीं अरबी में इसे अल-कुदुस पुकारा जाता है. ईसाईयों का कहना है कि यहां यीशु का जन्म हुआ और वे तभी से यहूदी थे, वहीं अरबी उन्हें इस्लाम का पैगंबर मानते हैं.

प्रह्लादपुरी मंदिर ( पाकिस्तान )

इस मंदिर को लेकर पाकिस्तान में लंबे समय तक धार्मिक विवाद चला. हिंदु पक्ष की मान्यता है कि यहां पर भगवान नरसिंह के सम्मान में विष्णु भक्त हिरण्यकश्यप के बेटे प्रह्लाद ने मंदिर बनवाया था. ऐसा माना जाता है कि साल 1992 में जब भारत में बाबरी विध्वंस हुआ तब पाकिस्तान में भी धार्मिक विवाद के नाम पर इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया. कहते हैं कि पाकिस्तान में लोग बाबरी मुद्दे को लेकर इतने नाराज थे कि उन्होंने इस मंदिर को क्षति पहुंचा दी.

ताजमहल

वैसे तो भारत में कई धार्मिक स्थलों को लेकर दो धर्मों के बीच लड़ाई चल रही है, लेकिन ताजमहल भी उन ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है, जिसे लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. इस धरोहर को लेकर हिंदू और मुसलमानों के बीच कथित रूप से मतभेद बना हुआ है. एक और जहां हिंदुओं की ओर से दावा किया जा रहा है कि ये शिव मंदिर था, वहीं मुस्लिम कहते हैं कि इसे मुगल शासक शाहजहां ने प्यार की निशानी के रूप में बनवाया था. इस मुद्दे को लेकर साल 2015 में आगरा कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी.

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