ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन करें ये उपाय, सभी परेशानियों से मिलेगी निजात।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगास्नान और दान-पुण्य करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही उसके पूर्व पापों का भी नाश होता है। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 14 जून, 2022 को रखा जाएगा।

आइए जानते हैं कि इस विशेष तिथि का क्या महत्व है? इसकी सही पूजन विधि क्या है? इसकी पैराणिक कथा क्या है और जीवन की विभिन्न समस्याओं से निजात पाने के लिए इस दिन क्या उपाय किए जाने चाहिए?

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ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व

हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व इसलिए ज़्यादा है क्योंकि आमतौर पर इस दिन से श्रद्धालु गंगाजल लेकर अमरनाथ यात्रा के लिए निकलते हैं।  आपको बता दें कि ज्येष्ठ महीना हिन्दू वर्ष का तीसरा महीना होता है। इस समय भयानक गर्मी पड़ती है। ऐसे में कई नदियां, तालाब और जलाशयों का जल स्तर कम हो जाता है, इसलिए इस महीने में जल का महत्व अन्य महीनों की तुलना में काफ़ी बढ़ जाता है।

हमारे ऋषि-मुनियों ने भी ज्येष्ठ माह में आने वाले कई त्योहारों जैसे कि गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी आदि के माध्यम से हमें संदेश दिया है कि जल हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है और इसका सदुपयोग कैसे करना चाहिए।

वहीं इस त्योहार के अन्य महत्वों की बात करें तो मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पितरों को शांति मिलती है तथा उन्हें मुक्ति मिलती है, इसलिए विशेष रूप से महिलाओं को व्रत करने की सलाह दी जाती है। इस दिन भगवान शंकर और श्री हरि भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इससे भगवान शिव और विष्णु जी की कृपा हमेशा बनी रहती है। अच्छी बात है कि इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा मंगलवार के दिन पड़ रही है। ऐसे में पूजा-पाठ और व्रत करने से जातकों को बजरंग बली का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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ज्येष्ठा पूर्णिमा तिथि, समय व व्रत पारण मुहूर्त

दिनांक: 14 जून, 2022

दिन: मंगलवार

हिंदी महीना: ज्येष्ठ

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: पूर्णिमा

पूर्णिमा तिथि आरंभ: 13 जून, 2022 की रात 09 बजकर 04 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 14 जून, 2022 की शाम 05 बजकर 22 मिनट तक

व्रत पारण मुहूर्त: शाम को चंद्रमा निकलने के बाद, चंद्र दर्शन कर आप व्रत का पारण कर सकते हैं।

चंद्रोदय: शाम 07 बजकर 29 मिनट

अभिजीत मुहूर्त: 14 जून, 2022 की दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक

अमृत काल: 10 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट तक

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ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजन विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं।जो महिलाएं व्रत कर रही हैं, उन्हें दिन में सिर्फ़ फलाहार करने की सलाह दी जाती है।व्रत का पारण शाम के समय चंद्र दर्शन के बाद करें।इसके बाद भगवान शिव और श्री हरि भगवान विष्णु की पूजा प्रारंभ करें।पूजा करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार ज़रूरतमंदों को दान ज़रूर दें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा अश्वपति के घर एक पुत्री ने जन्म लिया। जिसका नाम सावित्री रखा गया। जब सावित्री बड़ी हो गई तो राजा ने उसके लिए योग्य वर ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन वह अपनी बेटी के लिए योग्य वर खोजने में असफल हुआ। इसलिए उसने अपनी बेटी से कहा कि तुम ख़ुद ही अपने लिए किसी योग्य वर की तलाश करो।

पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए वह अपने लिए वर तलाशने निकल पड़ी। फिर एक दिन उसकी नज़र सत्यवान पर पड़ी, जिसे उसने मन ही मन में अपना वर चुन लिया। जब देवऋषि नारद को यह बात पता चली तो उन्होंने सावित्री को बताया कि उसकी उम्र काफ़ी कम है, इसलिए उसे कोई दूसरा वर ढूंढना चाहिए। इस पर सावित्री ने कहा कि वह एक हिन्दू नारी है, इसलिए एक बार ही वर चुनेगी। सावित्री की बात से सभी लोग सहमत हुए और एक दिन उन दोनों का विवाह हो गया।

एक दिन सत्यवान के सिर में बहुत तेज़ दर्द होने लगा। तब सावित्री ने अपने पति के सिर को अपनी गोद में रखकर उसे उल्टा लिटा दिया। तभी उसने देखा कि यमराज वहां आए और सत्यवान की आत्मा को लेकर दक्षिण की ओर जाने लगे। यह देखकर सावित्री भी उनके पीछे चलने लगी। इस पर यमराज ने कहा कि पत्नी अपने पति का साथ पृथ्वी तक ही दे सकती है, इसलिए उसे वापस चले जाना चाहिए। तब सावित्री ने कहा कि जहां उसके पति रहेंगे, वहीं वह भी रहेगी और यही इसका पत्नी धर्म है।

यह सुनकर यमराज प्रसन्न हुए और सावित्री से तीन वरदान मांगने को कहा। तब सावित्री ने यमराज से क्रमशः तीन वरदान मांगे। पहला- उसके सास-ससुर की आंखों की रोशनी वापस आ जाए। दूसरा- ससुर का खोया हुआ राज-पाट उन्हें मिल जाए और तीसरा मांगा कि उसे अपने पति सत्यवान के पुत्रों की माँ बनने का सौभाग्य मिले। यमराज ने उसे ये तीनों वरदान दे दिए। लेकिन दिक्कत यह थी कि सत्यवान के बिना उसका पुत्रवती होना असंभव था।

ऐसे में यमराज को सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े। उसके बाद सावित्री वापस उसी बरगद के पेड़ के पास चली गई, जहां उसके पति का शव रखा हुआ था। वरदान के प्रभाव से सत्यवान ज़िंदा हो गया, सास-ससुर की आंखों की रोशनी वापस आ गई और ससुर को उनका राज-पाट मिल गया। तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा और वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाने लगी। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत करने से महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किए जाने वाले कुछ ज्योतिषीय उपाय

जिन लोगों के विवाह में बाधाएं या रुकावटें आ रही हैं, उन्हें ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सफ़ेद कपड़े पहनकर भगवान का अभिषेक करना चाहिए और सच्ची निष्ठा से शिवजी की पूजा करनी चाहिए।रुका हुआ धन प्राप्त करने तथा बिज़नेस में अच्छा लाभ कमाने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन एक लोटे में जल लेकर उसमें कच्चा दूध और बताशा डालकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं। कहा जाता है कि इस विशेष दिन पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी वास करती हैं।वैवाहिक जीवन में आ रही छोटी-बड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्र देव को दूध से अर्घ्य दें।सौभाग्य की प्राप्ति के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा की रात को किसी कुएं में एक चम्मच से थोड़ा दूध डालें। मान्यता है कि ऐसा करने से ज़रूरी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं तथा भाग्य चमकता है।कुंडली में मौजूद ग्रह दोष को दूर करने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पीपल और नीम की त्रिवेणी के नीचे विष्णु सहस्रनाम या शिवाष्टक का पाठ करें।ख़ुद की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की तस्वीर पर 11 कौड़ियां चढ़ाकर, उस पर हल्दी का तिलक लगाएं। फिर अगले दिन सुबह-सुबह कौड़ियों को किसी लाल कपड़े में बांधकर अपने घर की तिजोरी में रख दें।संतान सुख की प्राप्ति के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महिलाओं को चाहिए कि एक लोटे में जल भरकर उसमें दूध, चीनी (शक्कर) अक्षत और फूल डालकर चंद्र दर्शन के समय जल चढ़ाएं।पति की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हो रहा है साघ्य योग का निर्माण

यदि किसी व्यक्ति को कोई विद्या सीखनी हो या कोई विधि सीखनी हो तो ज्योतिष में साघ्य योग को बहुत ही उत्तम माना गया है। कहा जाता है कि इस योग में सीखी गई विद्याएं या विधियां मनुष्य को सफलता प्रदान करती हैं।

साघ्य योग आरंभ: 13 जून, 2022 की दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से

साघ्य योग समाप्त: 14 जून, 2022 की सुबह 09 बजकर 39 मिनट तक

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