ज्येष्ठ माह में 5 बड़े मंगल का शुभ संयोग, कर लिया इनमें से एक भी उपाय तो मिलेगा बजरंगबली का आशीर्वाद

ज्येष्ठ महीने में मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है और बड़े मंगल का बेहद ही महत्व बताया गया है। इस दिन बजरंगबली की पूजा की जाती है बहुत सी जगह पर बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल के नाम से भी जानते हैं। आज अपने इस विशेष ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि आखिर ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगल को बड़ा मंगल क्यों कहते हैं? इस दिन को हनुमान भगवान की पूजा के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ क्यों माना जाता है? और आखिरी इस दिन का महत्व क्या होता है?

जानकारी के लिए बता दें कि ज्येष्ठ मास को हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना कहा जाता है और इस वर्ष ज्येष्ठ मास 17 मई से 14 जून तक रहने वाला है। ऐसे में इस दौरान पांच मंगलवार पड़ेंगे यानी कि वर्ष 2022 में 5 बड़े मंगल का शुभ संयोग बन रहा है।

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बड़ा मंगल 2022: क्या है इस दिन का महत्व?

बजरंगबली को समर्पित बड़े मंगल के दिन भगवान हनुमान जी विशेष पूजा अर्चना करने का विधान बताया गया है। कहते हैं ऐसा करने से जातक के हर एक कष्ट और बाधा दूर होती है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि दशरथ नंदन प्रभु श्री राम जी ज्येष्ठ के महीने में मंगलवार के दिन ही पहली बार हनुमान जी से मिले थे इसीलिए इसे बड़ा मंगलवार कहा जाता है। 

इसके अलावा एक और शुभ संयोग यह है कि इस वर्ष ज्येष्ठ मास 17 मई यानी मंगलवार से शुरू हो रहा है और इसका समापन 14 जून को होगा और 14 जून भी मंगलवार है। ज्येष्ठ मास के 5 बड़े मंगल की तारीख की बात करें तो 17 मई, 24 मई, 31 मई, 7 जून, और 14 जून रहने वाली है।

17 मई: शिव योग 

24 मई: विश्कुम्भ योग

31 मई: धृति योग

7 जून: वज्र योग

14 जून: साघ्य योग

बड़ा मंगल तो ठीक है लेकिन बुढ़वा मंगल क्यों कहते हैं?

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि बहुत सी जगहों पर बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल भी कहते हैं। ऐसा क्यों यह जानने के लिए आपको बताते हैं पौराणिक कथा का एक किस्सा। दरअसल कहा जाता है कि एक बार वन में घूमते हुए प्रभु श्री राम जी से हनुमान जी का मिलन पुरोहित के रूप में इसी दिन हुआ था। 

इसके अलावा एक और कथा के अनुसार कहा जाता है कि महाभारत के समय में भीम को अपने बल का घमंड हो चला था। इस दौरान हनुमान जी ने बूढ़े वानर का रूप लेकर के भीम के इस घमंड को तोड़ा था। यही वजह है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बुढ़वा मंगल या फिर बड़ा मंगल कहा जाता है।

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बड़ा मंगल: धार्मिक कर्मकांड और अनुष्ठान

बड़ा मंगल का विशेष महत्व बताया जाता है। बजरंगबली की कृपा पाने के लिए यह दिन बेहद ही उत्तम होता है। ऐसे में बहुत से लोग इस दिन बजरंग बाण, हनुमान चालीसा, और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इसके अलावा बहुत से लोग इस दिन मंदिरों में भंडारे भी करवाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिवत तरीके से बजरंगबली की पूजा करने से जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हो साथ ही सुख, समृद्धि जीवन में बढ़ती है। इस शुभ दिन धन प्राप्ति के लिए बहुत से लोग बड़े मंगल के दिन बड़ के पेड़ का एक पत्ता लेकर उसे पानी से साफ कर हनुमान जी के समक्ष रखते हैं। इसके बाद इस पत्ते पर केसर से श्री राम लिखा जाता है। पूजा करने के बाद इस पत्ते को अपनी पैसे रखने वाली जगह है या बटुए में रखने का विधान बताया गया है। कहते हैं ऐसा करने से जीवन में धन की कभी भी कमी नहीं होती है।

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लखनऊ से जुड़ी बड़ा मंगल की कहानी 

जब बात बड़ा मंगल की आती है तो इससे जुड़ी लखनऊ की कहानी का जिक्र अवश्य होता है। क्या है वह कहानी आइए जानते हैं।

दरअसल बहुत समय पहले लखनऊ में एक व्यापारी हुआ करते थे जिन्होंने हनुमान भगवान से मन्नत मांगी थी कि यदि उनके केसर और इत्र का व्यापार चल जाएगा तो वह बजरंगबली का भव्य मंदिर बनाएंगे। इस व्यापारी से कुछ ही दिनों बाद नवाब वाजिद अली शाह मिले और उनका सारा इत्र और केसर खरीद लिया। इस तरह से व्यापारी की मन्नत पूरी हो गई और उन्होंने मन्नत के अनुसार भव्य हनुमान मंदिर बनवाया। कहा जाता है तब से ही लखनऊ में हर साल ज्येष्ठ के महीने में बड़े मंगल को बेहद ही धूमधाम के साथ मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

इसके अलावा दूसरी कहानी के अनुसार बताया जाता है कि लखनऊ में अलीगंज में स्थित पुराने हनुमान मंदिर का निर्माण मुगल परिवार की बेटी बेगम आलिया ने करवाया था। कहा जाता है उनके सपने में स्वयं हनुमान भगवान आए थे। इस हनुमान मंदिर के ऊपरी हिस्से पर चांद का निशान है और इस मंदिर को सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं मंदिर बनवाने के 2 साल बाद ही महामारी फैल गई थी। तब बेगम ने हनुमान भगवान की भव्य पूजा कराई थी। उस दिन भी ज्येष्ठ माह का मंगलवार ही था। देखते ही देखते हनुमान जी की कृपा से महामारी दूर हो गई और तभी से हर साल ज्येष्ठ के महीने में मंगलवार के दिन बड़ा मंगल भव्य पैमाने पर मनाया जाता है।

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….और हनुमान जी ने खुद को सिंदूर से रंग लिया

बड़ा मंगल के दौरान एक निश्चित परंपरा का हर साल पालन किया जाता है और वह है बजरंग बली को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा। कहते हैं ऐसा करने से बजरंगबली अपने भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करते हैं। लेकिन सोचने वाली बात है कि आखिर भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई? दरअसल इससे भी जुड़ी एक कहानी है। आइए जानते हैं क्या है वह कहानी।

रामायण के अनुसार कहा जाता है भगवान हनुमान ने एक बार मां सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देख लिया। उन्होंने माता सीता से पूछा है कि वह सिंदूर क्यों लगा रही हैं? तब मां सीता ने उन्हें बताया कि सिंदूर भरने से प्रभु श्रीराम उनसे खुश रहते हैं और इससे प्रभु श्री राम को लंबी उम्र प्राप्त होगी। तब हनुमानजी यह सोचने लगे कि यदि मां सीता के एक चुटकी सिंदूर से भगवान राम प्रसन्न होते हैं और इससे उनकी आयु लंबी होती है तो क्यों ना मैं भी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूँ जिससे प्रभु श्रीराम मुझसे भी प्रसन्न होंगे और वह अमर हो जाएंगे। 

बस ऐसा करते ही उन्होंने अपने शरीर को सिंदूर से रंग लिया। प्रभु राम ने हनुमान जी को सिंदूर में रंगा हुआ देखा तो ऐसा करने की वजह पूछी। तब हनुमानजी ने उन्हें वजह बताई। जिसे सुनकर प्रभु श्री राम ने अपने भक्त हनुमान जी को गले से लगा लिया। कहा जाता है तभी से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई। 

ऐसे में यदि आपकी भी कोई भी अभीष्ट मनोकामना है, जीवन में बहुत ज्यादा कष्ट या परेशानी है, या आप कोई भी काम में सफ़लता पाना चाहते हैं, तो बड़ा मंगल के दिन हनुमान मंदिर जाकर उन्हें सिंदूर अवश्य चढ़ाएं।

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बड़ा मंगल पर अवश्य करें इनमें से कोई भी एक उपाय 

तुलसी की माला से इस मंत्र “राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।।” का जाप करें। आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होंगी, साथ ही हर काम में सफलता भी मिलेगी। इसके अलावा बड़ा मंगल के दिन हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण पढ़ने से भी बीमारियों से मुक्ति मिलती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती है, और हर काम में व्यक्ति को सफलता मिलती है।बड़ा मंगल के दौरान आप पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र अपने घर के मंदिर में स्थापित कर सकते हैं। आप चाहे तो इसे किसी मंदिर में भी लेकर दान कर सकते हैं। ऐसा करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होगी।कुंडली में मंगल दोष है तो आप को बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी का आशीर्वाद पाने और इस दोष का प्रभाव कम करने के लिए सिंदूर, चमेली का तेल, लाल रंग के वस्त्र, लाल रंग के फूल, मोतीचूर के लड्डू, इत्यादि दान करने की सलाह दी जाती है।भगवान हनुमान को तुलसी के पत्तों की माला पहनाएँ। ऐसा करने से बजरंगबली शीघ्र प्रसन्न होते हैं।घर परिवार में सुख शांति और सफलता के लिए भगवान हनुमान के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके अलावा आप चाहें तो चमेली के तेल का दीपक भी जला सकते हैं।बड़ा मंगल के दिन हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली को गुड़, चने, और केले का भोग लगाएं। साथ ही गुड़, चने, केले और लड्डू बंदरों को भी खिलाएं। ऐसा करने से आपकी जीवन की सभी रुकावटें धीरे-धीरे कम होने लगेंगे। बजरंगबली को रोट (मीठी रोठ) बेहट ही प्रिय है। ऐसे में बड़ा मंगल के दिन रोट का भोग तैयार करें। किसी हनुमान मंदिर में जाकर इस का भोग लगाएं। हनुमान जी की विधिवत पूजा करें। इसके बाद रोट का कुछ ऐसा गायों को खिला दें, कुछ हिस्सा बंदरों को खिला दें और कुछ हिस्सा दान करने के बाद स्वयं भी इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें। ऐसा करने से आपके जीवन में आजीवन ही बजरंगबली का आशीर्वाद बना रहेगा।

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