दुर्गा अष्टमी और नवमी पर बना शुभ योग, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और कन्या पूजन का महत्व
चैत्र नवरात्रि के शुभ दिन जारी हैं और हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-उपासना और मंत्रोचार किया जा रहा है. इस बार चैत्र नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है और मां नौका पर सवार होकर पृथ्वी पर आई है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत ही खास होता है जिसमें न दिनों तक माता के 9 स्वरूपों की पूजा और व्रत रखते हुए जीवन में सुख-समृद्धि और हर तरह के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए मां की उपासना की जाती है.
इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू होकर 30 मार्च को समाप्त होगी. वैसे तो नवरात्रि का हर एक दिन बहुत ही खास होता है लेकिन नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है. महाष्टमी पर मां दुर्गा की विशेष पूजा उपासना और कन्या पूजन करते हुए मां का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. इस बार अष्टमी और नवमी तिथि पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है, जिसमें माता की पूजा आराधना विशेष फलदायी रहने वाली है.
अष्टमी तिथि का शुभ मुहूर्त
इस बार चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 29 मार्च, बुधवार के दिन पड़ रही है. पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि का आरंभ 28 मार्च को शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू हो जाएगी जो 29 मार्च को रात के 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगी. इसके अलावा अष्टमी तिथि पर रवि और शोभन योग बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में ये दोनों योग बहुत ही शुभ माने जाते हैं. इस योग में पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य करना बहुत ही शुभ फलदायी होता है.
शुभ मुहूर्त और योग
चैत्र नवमी तिथि 30 मार्च 2023 को है. पंचांग गणना के अनुसार 29 मार्च को रात 09 बजकर 09 मिनट से चैत्र माह की नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. जिसका समापन 30 मार्च 2023 को रात के 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. इस बार नवमी तिथि पर गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा. इन योगों में पूजा-पाठ करने से हर तरह मनोकामना और सफलता अवश्य ही प्राप्ति होती है.
कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि के पर्व पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. बिना कन्या पूजन के नवरात्रि का व्रत का पूरा नहीं माना जाता है. नवरात्रि पर कन्या पूजन के लिए 02 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को घर में बुलाकर उनका आदर और सत्कार करते हुए उनकी पूजा, भोजन और दक्षिणा देना चाहिए. ऐसी मान्यता है कन्या पूजन से मां दुर्गा बहुत प्रसन्न होती हैं और हर तरह की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. कन्या पूजन करते समय सभी कन्याओं को आदर से घर में बुलाकर उनके पांव को अपने हाथों धोएं फि कुमकुम, हल्दी और अक्षत से माथे पर टीका लगाकर उनकी पूजा करते हुए भोजन खिलाएं.
