दुर्गा विसर्जन से नवरात्रि का समापन: जानें किस वाहन और मुहूर्त में होगी माँ की विदाई और क्या है इसका महत्व!

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां दुर्गा का विसर्जन कर दिया जाता है और इसी के साथ शारदीय नवरात्रि का समापन हो जाता है। नवरात्रि की इन 9 दिनों की अवधि के दौरान मां को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त व्रत रखते हैं, हवन करते हैं, कन्या पूजन करते हैं, और आखिरी दिन मां का विसर्जन कर देते हैं।

शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा की प्रतिमाएं बड़े-बड़े भव्य पंडालों में स्थापित की जाती है। इसके बाद दशहरे के बाद इन मूर्तियों को स-सम्मान विसर्जित कर दिया जाता है। बंगाल में इस त्यौहार का अलग ही रंग देखने को मिलता है। इस दौरान दुर्गा विसर्जन के बाद महिलाएं सिंदूर खेला करती है जिसमें वो एक दूसरे पर सिंदूर डालकर इस दिन का जश्न मनाती हैं।

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तो आइए अब आगे बढ़ते हैं और अपने इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं दुर्गा विसर्जन का महत्व क्या होता है, इस दिन की सही विधि क्या होती है, दुर्गा विसर्जन का शुभ मुहूर्त इस वर्ष क्या रहने वाला है, और अन्य छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारियां।

दुर्गा विसर्जन का महत्व

दुर्गा विसर्जन इस बात का प्रतीक होता है कि नौ दिनों तक हमारे घर में रहने के बाद विसर्जन के दिन मां दुर्गा अपने निवास कैलाश पर्वत पर लौट जाती हैं। यही वजह है कि मां दुर्गा के भक्तों के लिए इस दिन का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। बहुत से लोग इस दिन अपने व्रत का पारण भी करते हैं। 

बात करें जल में मां दुर्गा के विसर्जन के महत्व की तो सनातन धर्म में जल को ब्रह्मा माना गया है। इसके अलावा कहा यह भी जाता है कि सृष्टि की शुरुआत के पहले और इसके अंत के बाद भी संपूर्ण सृष्टि में केवल जल ही जल होगा। यानी कि जल ही इस सृष्टि का आरंभ है, मध्य है और अंत भी है। यह एक चिर तत्व माना गया है। 

यही वजह है कि जल में त्रिदेवों का वास भी माना जाता है इसीलिए हिंदू धर्म की सभी पूजा में जल से ही पवित्रीकरण किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के चलते ऐसा कहा जाता है कि जल में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है तो यह देवी-देवताओं की मूर्तियां जल में विलीन क्यों ना हो जाएँ लेकिन उनके प्राण मूर्ति से निकलकर सीधे परमब्रह्मा में लीन हो जाते हैं।

हाथी पर ही प्रस्थान कर जाएंगी मां दुर्गा

बात करें माँ के प्रस्थान वाहन की तो, इस वर्ष माता हाथी पर ही वापस भी जाएंगी। दरअसल विजयदशमी बुधवार को है और जब भी विजयदशमी या यूं कहिए माता की विदाई बुधवार या शुक्रवार के दिन होती है तो माता हाथी के वाहन पर ही वापिस जाती हैं। जब भी मां दुर्गा गज अर्थात हाथी पर प्रस्थान करती हैं तो उसे बेहद ही शुभ माना जाता है और यह उत्तम वर्षा का संकेत भी देता है।

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दुर्गा विसर्जन 2022 की तारीख व मुहूर्त

5 अक्टूबर, 2022 (बुधवार)

दुर्गा विसर्जन समय : 06:15:52 से 08:37:18 तक

अवधि : 2 घंटे 21 मिनट

अधिक जानकारी: ऊपर दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए मान्य है। अपने शहर के अनुसार इस दिन का शुभ मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें 

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दुर्गा विसर्जन के दिन किए जाने वाले आयोजन 

दुर्गा विसर्जन के बाद विजयदशमी का त्यौहार मनाया जाता है। कहते हैं यह वही दिन है जिस दिन भगवान राम ने रावण को मारा था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करना बेहद खास माना जाता है। इसके अलावा बंगाली समुदाय के लोग इस दिन सिंदूर खेला का अवसर मनाते हैं। इस दौरान विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और एक दूसरे को इस दिन की शुभकामनाएं देती हैं। दुर्गा विसर्जन के बारे में कहा जाता है कि नवरात्रि के 9 दिनों की अवधि वह समय होता है जब मां दुर्गा अपने मायके यानी धरती पर आती हैं और नौवें दिन पर दुर्गा विसर्जन के साथ ही वह वापस अपने घर यानी भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं। यही वजह है कि जैसे आमतौर पर विदाई के दौरान बेटियों को खाने-पीने का सामान और अन्य सुख सुविधाओं की वस्तुएं दी जाती है तो ठीक उसी प्रकार विसर्जन के दौरान एक पोटली में मां दुर्गा के लिए श्रृंगार का सामान और खाने की चीजें रखी जाती है |

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दुर्गा विसर्जन मंत्र

गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।

पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।

दुर्गा विसर्जन की सही विधि 

इस दिन कन्या पूजन के बाद कुछ फूल और चावल हाथ में लेकर संकल्प ले लें| इसके बाद कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कर और अपने पूरे परिवार को इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने को कहें| घट में रखे सिक्कों को आप अपनी तिजोरी में रख सकते हैं| इसके अलावा इस सुपारी को भी परिवार में प्रसाद के रूप में बांट दें| माता की चौकी को अपने घर के मंदिर में उचित स्थान पर रख दें| शृंगार की सामग्री और साड़ी आदि घर की महिलाएं प्रयोग कर सकती हैं| गणेश भगवान की प्रतिमा को मंदिर में रख दें| प्रसाद के तौर पर मिठाई आदि परिवार के लोगों में बांट दें|चौकी और घट के ढक्कन पर रखे चावल पक्षियों को डाल दें| इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को घट में बोए गए जौ को और पूजा सामग्री को किसी समुद्र, नदी, सरोवर के जल में विसर्जित कर दें| आपने ईको फ्रेंडली मूर्ति इस्तेमाल की हो तो उसे घर में भी साफ जल में विसर्जित कर सकते हैं| इसके बाद एक नारियल, दक्षिणा, और चौकी के कपड़े को किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दें|

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इसी दिन किया जाता है कलश विसर्जन भी…जानें उसकी विधि 

नवरात्रि के समापन के साथ ही कलश भी  विसर्जित कर दिया जाता है। इसके लिए आप कलश के जल को अपने घर में हर पवित्र जगह पर छिड़क दें। कलश के सिक्कों को अपनी तिजोरी में रख दें, इससे धन धान्य में बरकत होती है और इन्हें कभी भी खर्च ना करें। कलश और अखंड ज्योत पर बंधे कलावे को आप अपनी बाजू में बांध सकते हैं। यह सूत्र आप घर के किसी भी सदस्य को पहना सकते हैं।

अष्टमी और नवमी के दिन व्रत के पारण करने वाली तिथि पर कलश विसर्जन करें तो आपको लाभ मिलेगा। हालांकि अखंड ज्योति विजयदशमी के दिन तक जलाए रखने की सलाह दी जाती है। जानकारी के लिए बता दें कि विजयदशमी के दिन ही भगवान राम ने अपराजिता देवी की पूजा की थी।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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