दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय करेंगे आपके हर कार्य सिद्ध, जानें इनके बारे में

नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल 2024 से हो चुकी है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। इन दिनों लोग व्रत करते हैं और मां का आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि के दौरान मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ आपको शुभ फल दे सकता है। एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम ज्योतिषी नितिका शर्मा से जानेंगे कि दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय में से कौन सा अध्याय किस कार्य की सिद्धि के लिए होता है तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं विस्तार से।

नवरात्रि के दिनों में विशेषता दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से कई तरह के मनोकामनाएं पूरी की जाती है। माता रानी से मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। इसके लिए दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय में से कौन सा अध्याय किस कार्य की सिद्धि के लिए होता है। आइए हम संक्षिप्त में जानते हैं । 

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दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय

प्रथम अध्याय: हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए मानसिक विकारों की वजह से आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए,, मन को सही दिशा की ओर ले जाने के लिए और खोई हुई चेतना को एकत्रित करने के लिए प्रथम अध्याय का पाठ किया जाता है । द्वितीय अध्याय: मुकदमे झगड़ा आदि में विजय प्राप्ति के लिए इस अध्याय को किया जाता है,, गलत भावना से किया गया उपाय कभी सफल नहीं होता है यदि आपने झूठा केस लगाया है तो यह कभी सफलता नहीं दिलाएगा । तीसरा अध्याय: शत्रु से छुटकारा पाने के लिए यदि कोई शत्रु बिना वजह आपको नुकसान पहुंचा रहा है तो इस अध्याय का पाठ करें । चतुर्थ अध्याय: भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिए किया जाता है साधना से जुड़े होते वह समाज हित में साधना को चेतना देने के लिए इस पाठ को किया जाता है । पंचम अध्याय: भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिए हर तरह से परेशान हो चुके लोग जो यह सोचते हैं कि हमारा कोई भी कार्य नहीं बन रहा है वहां इस पाठ का अध्ययन नियमित करें।

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छठा अध्याय: दर्शन बाधा हटाने के लिए,, राहु का अधिक खराब होना,, केतु का पीड़ित होना,, जादू – टोना – भूत इस तरह के डर पैदा करता है तो आप इस अध्याय का पाठ करें। सप्तम अध्याय: हर मनोकामना पूर्ण करने के लिए ,सच्चे दिल से जो कामना आप करते हैं जिसमें किसी का अहित न हो तो यह अध्याय आपके लिए कारगर होता है । अष्टम अध्याय: मिलान व वशीकरण के लिए, वशीकरण गलत तरीके नहीं अपितु भलाई के लिए हो और कोई बिछड़ गया हो तो यह असरदार होता है । नवम अध्याय: गुमशुदा की तलाश हर प्रकार की कामना एवं पुत्र आदि के लिए बहुत से लोग जो घर छोड़कर चले जाते हैं खोए हुए को वापस बुलाने के लिए इस अध्याय को करना चाहिए। दशम अध्याय: यह भी गुमशुदा की तलाश एवं पुत्र कामना के लिए किया जाता है ,, एवं पुत्र को गलत रास्ते से सही रास्ते पर लाने के लिए बहुत ही फलदायी है। एकादश अध्याय: व्यापार व सुख संपत्ति की प्राप्ति के लिए,, कारोबार में हानि हो रही है,, पैसा नहीं रुकता या बेकार के कामों में नष्ट हो जाता है यह अध्याय करें। द्वादश अध्याय: मान सम्मान तथा लाभ प्राप्ति के लिए,, मान सम्मान को बढ़ाने के लिए यह अध्याय करें । त्रयोदश अध्याय: भक्ति प्राप्ति के लिए साधना के बाद पूर्ण भक्त के लिए यह पाठ करें। 

दुर्गा सप्तशती के यह अध्याय होने के बाद सिद्ध कुंजिका का अध्ययन जरूर करें नहीं तो पाठ अधूरा माना जाता है । सिद्ध कुंजिका के अध्ययन से ही पूरी दुर्गा सप्तशती का फल हमें प्राप्त होता है।

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