नवरात्रि चौथा दिन: जानें इस दिन माँ के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी और क्या है इसका महत्व!

नवरात्रि का चौथा दिन देवी के कुष्मांडा स्वरूप को समर्पित होता है। देवी कूष्मांडा के नाम का अर्थ निकालें तो कूष्म का अर्थ होता है छोटा अर्थात सूक्ष्म ऊष्मा का अर्थ होता है ऊर्जा और अंडा का मतलब होता है अंडा। माना जाता है की देवी कूष्मांडा की विधिवत रूप से पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में धन, वैभव और सुख शांति का असीम आशीर्वाद मिलता है।

चलिए आज अपने इस खास ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं मां कुष्मांडा के स्वरूप से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। साथ ही जानते हैं नवरात्रि के चौथे दिन किस विधि से पूजा करके आप मां का आशीर्वाद अपने जीवन में प्राप्त कर सकते हैं, उन्हें किसी वस्तु का भोग लगाया जा सकता है, साथ ही जानेंगे इस दिन किए जाने वाले उपायों की भी संपूर्ण जानकारी।

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मां कुष्मांडा का स्वरूप

सबसे पहले बात करें मां के स्वरूप की तो मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं होती हैं जिनमें उन्होंने चक्र, गदा, धनुष, तीर, अमृत, कलश, कमंडल और कमल लिया हुआ है। मां कुष्मांडा शेरनी की सवारी करती है।

मां कुष्मांडा की पूजा का ज्योतिषीय संदर्भ

मां कुष्मांडा की पूजा का ज्योतिषीय महत्व क्या होता है अगर आपके मन में भी इस तरह का सवाल हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कहा जाता है की मां कुष्मांडा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं। ऐसे में माता की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सूर्य के दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

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मां कुष्मांडा की पूजा महत्व 

देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का अलग-अलग और विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में बात करें मां कुष्मांडा की पूजा के महत्व की तो कहा जाता है कि, जो कोई भी भक्त माँ कुष्मांडा की पूजा करता है उनके सभी रोग, शोक और दुख मिट जाते हैं। ऐसे भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। 

मां कुष्मांडा के बारे में कहा जाता है कि माँ का ये स्वरूप बेहद थोड़ी सी सेवा और भक्ति से प्रसन्न हो जाने वाली देवी होती है। ऐसे में अगर आप सच्चे मन से मां के भक्त बन जाएँ तो इससे माँ आपके जीवन में अत्यंत सुगमता और सुख समृद्धि प्रदान करती है।

इसके साथ ही देवी कुष्मांडा पढ़ने वाले छात्रों की बुद्धि विवेक में वृद्धि करती हैं।

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मां कुष्मांडा को अवश्य लगाएँ ये भोग 

मां कुष्मांडा के प्रिय भोग की बात करें तो माँ कुष्मांडा को कुमराह अर्थात पेठा बहुत प्रिय होता है। ऐसे में मां की पूजा में पेठे का भोग लगाना विशेष रूप से फलदाई माना जाता है। अगर आप नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा में सफेद समूचे पेठे की बलि चढ़ा सकते हैं तो इसे बेहद ही ज्यादा शुभ माना गया है। इसके साथ ही आप चाहें तो देवी को मालपुए और दही के हलवे का भी भोग लगा सकते हैं।

देवी कुष्मांडा का पूजा मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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नवरात्रि के चौथे दिन अवश्य करें यह अचूक उपाय

नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की विधिवत रूप से पूजा करें। इसके बाद माँ को नारियल, लाल रंग के फल और मालपुआ का भोग लगाएँ। मां की दीपक जलाकर आरती करें। कहा जाता है इस बेहद सरल उपाय को करने से व्यक्ति को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। नवरात्रि के चौथे दिन की रात में पीपल के पेड़ के नीचे की थोड़ी सी मिट्टी घर ले आयें और इसे अपने घर में कहीं रख दें। इस मिट्टी पर दूध, दही, घी, अक्षत, रोली, अर्पित करें और इसके आगे दिया जलाएं। अगले दिन इस मिट्टी को वापस पेड़ के नीचे डालें। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में किसी भी काम को लेकर आ रही समस्याएं दूर होने लगती है।नवरात्रि के चौथे दिन ही आप मिट्टी की पूजा करने के बाद बाधा निवारण मंत्र की एक माला का भी जप करें इससे भी आपके कार्य में सफलता मिलेगी और रुकावटें दूर होगी। अगर किसी व्यक्ति के संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है तो आप लौंग और कपूर में अनार के दाने मिला लें और इससे मां दुर्गा को आहुती दें। इससे संतान सुख का वरदान अवश्य प्राप्त होता है। अगर आप कारोबार में तरक्की या नौकरी में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो लॉन्ग और कपूर में कोई भी पीले रंग का फूल मिला लें और इससे मां दुर्गा को आहुति दें। परिवार में अगर किसी का स्वास्थ्य बार-बार खराब हो रहा है या आप खुद खराब स्वास्थ्य से पीड़ित है तो 152 लॉन्ग और 42 कपूर के टुकड़े ले लें। नारियल की गिरी, शहद और मिश्री मिलाकर इससे हवन करें। इससे आपको जल्द ही सेहत के संदर्भ में सुधार देखने को मिलेगा। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में विवाह से संबंधित रुकावटें बनी हुई है तो नवरात्रि के चौथे दिन 36 लॉन्ग और 6 कपूर के टुकड़े लेकर इसमें हल्दी और चावल मिलाकर इससे मां दुर्गा को आहुति दे दें। आहुति से पहले लौंग और कपूर पर बाधा निवारण मंत्र की 11 माला का जाप करें। इससे जल्दी विवाह के योग बनने लगते हैं। 

क्या यह जानते हैं आप? 

देवी कुष्मांडा के बारे में ऐसी मान्यता है कि जब सृष्टि नहीं थी और चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था तब देवी के कुष्मांडा स्वरूप ने अपनी हंसी से ही ब्रह्मांड की रचना की थी इसीलिए इन्हें सृष्टि की आदि स्वरूप या आदि शक्ति का नाम भी दिया जाता है। इसके अलावा मां के बारे में कहा जाता है कि  मां कुष्मांडा सूरज के घेरे में रहती हैं और सिर्फ देवी के अंदर ही इतनी शक्ति है कि वह सूरज की तपिश को सह सकती हैं।

यहां यह भी जानना बेहद आवश्यक है कि नवरात्रि के चौथे दिन का पीले रंग के साथ विशेष महत्व जोड़कर देखा जाता है। अगर आप कर पाएँ तो इस दिन की पूजा हमेशा पीले रंग के वस्त्र पहनकर ही करें, माँ को पीले रंग के फल, फूल, वस्त्र, आदि अर्पित करें तो आपको माँ की प्रसन्नता निश्चित रूप से हासिल होगी।

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इन लोगों को विशेष रूप से करनी चाहिए मां की पूजा 

मां कुष्मांडा की पूजा विशेष रूप से छात्रों को करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है मां की पूजा करने से पढ़ाई वाले छात्रों का बुद्धि और विवेक तेज होता है और पढ़ाई में ज्यादा मन लगता है।

इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य निरंतर रूप से खराब रहता है यह आपके परिवार में कोई बीमार रहता है तो उन्हें भी मां कुष्मांडा के स्वरूप की पूजा करने की सलाह दी जाती है।

मां कुष्मांडा से संबंधित पौराणिक कथा 

देवी कुष्मांडा से समर्पित पौराणिक कथा की बात करें तो कहा जाता है कि, सृष्टि की उत्पत्ति से पहले जब हर तरफ अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी के चलते इन्हें कुष्मांडा कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति करने की वजह से इन्हें आदिशक्ति नाम से भी जाना जाता है। 

मां के इस स्वरूप का वर्णन करते हुए शास्त्रों में लिखा गया है की देवी की 8 भुजाएं हैं और यह सिंह पर सवारी करती हैं। मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना करने के लिए आप निम्नलिखित मंत्र का जाप कर सकते हैं। जिसका अर्थ होता है कि अमित से परिपूर्ण कलश को धारण करने वाली और कमल के फूल से युक्त तेजोमय मां कुष्मांडा हमें हर कार्य में शुभ फल प्रदान करें।

सुरासंपूर्णकलशं,रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां,कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।

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