नवरात्रि नौवाँ दिन: त्रिदेवों को जन्म देने वाली माँ सिद्धिदात्री की सही पूजन विधि और मंत्रों की संपूर्ण जानकारी!

नवरात्रि के नौवें दिन यानी महा नवमी के दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माँ के नाम का अर्थ है सभी प्रकार की सिद्धि और मोक्ष देने वाली मां। माँ सिद्धिदात्री की पूजा स्वयं देवी, देवता, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, दानव, ऋषि, मुनि, साधक, और गृहस्थ आश्रम में जीवन व्यतीत करने वाले लोग करते हैं।

ऐसे पावन और निर्मल स्वरूप वाली माँ सिद्धिदात्री को हम प्रणाम करते हैं। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जो कोई भी व्यक्ति विधि विधान से माँ सिद्धिदात्री की पूजा करता है उसके यश, बल, और धन में वृद्धि होने लगती है। इसके अलावा माँ सिद्धिदात्री के पास अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व नामक आठ सिद्धियां मौजूद है।

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तो आइए अब आगे बढ़ते हैं और अपने इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं नवरात्रि के नौवें दिन किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, कर्मकांड, और महा उपायों की संपूर्ण जानकारी। साथ ही जानते हैं नवरात्रि के दिन माँ सिद्धिदात्री की सही पूजन विधि और महत्व क्या है।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व

सबसे पहले बात करें माता के स्वरूप की तो माँ लक्ष्मी की तरह माँ सिद्धिदात्री भी कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और माँ की चार भुजाएं हैं जिसमें उन्होंने शंख, गदा, कमल, और चक्र लिया हुआ है। पुराणों के अनुसार बताया जाता है कि भगवान शिव ने कठिन तपस्या करके माँ सिद्धिदात्री से ही आठ सिद्धियां प्राप्त की थी। 

इसके अलावा माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही महादेव का आधा शरीर देवी का हो गया था और तब को अपने इस स्वरूप में अर्धनारीश्वर कहलाए थे। नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और इसी के साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। उन्हें रोग, शोक, और भय से मुक्ति मिलती है।

माँ सिद्धिदात्री का ज्योतिषीय संबंध

माँ सिद्धिदात्री को माँ दुर्गा का प्रचंड रूप माना जाता है। ऐसे में शत्रु विनाश करने की अदमय ऊर्जा माँ के अंदर समाहित होती है। कहते हैं जिस किसी भी भक्तों की पूजा से माँ प्रसन्न हो जाए ऐसे व्यक्तियों के शत्रु उनके इर्द-गिर्द भी नहीं टिक पाते हैं। 

इसके अलावा ज्योतिष के अनुसार जातक की कुंडली का छठा और ग्यारहवां भाव भी माँ सिद्धिदात्री की पूजा से मजबूत होता है। साथ ही माँ की पूजा से व्यक्ति के तृतीय भाव में भी शानदार ऊर्जा आती है। जिन भी जातकों के जीवन में शत्रु भय अधिक बढ़ गया हो या कोर्ट केस के मामले कभी ख़त्म ना हो रहे हो या कोर्ट से संबंधित मामलों में आपको सफलता ना मिल रही हो ऐसे जातकों को माँ सिद्धिदात्री की पूजा करना शुभ फल दिला सकता है। 

इसके अलावा माँ सिद्धिदात्री की विधिवत पूजा करने से केतु ग्रह से संबंधित दोषों का भी अंत होता है।

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माँ की सही पूजन विधि

नवमी तिथि के दिन माँ के लिए प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ तरह के फूल, फल, भोग आदि पूजा में अवश्य शामिल करें। पूजा शुरू करने से पहले सबसे पहले देवी का ध्यान करें और उनसे संबंधित मंत्रों का जप करें। माँ को फल, भोग, मिष्ठान, पांचों मेवा, नारियल आदि अर्पित करें। इसके बाद माता को रोली लगाएं। माँ का ध्यान करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में माँ की आरती करें। कन्या भोजन कराएं। माँ से अपनी मनोकामना करें और पूजा में शामिल सभी लोगों में प्रसाद अवश्य वितरित करें। 

अधिक जानकारी: कहते हैं नवरात्रि के नवमी दिन साधना का अपना तंत्र होता है। इस दिन की पूजा करने, हवन करने, कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ रहता है।

नवरात्रि के नौवें दिन कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि के नौवें दिन का सबसे खास अनुष्ठान होता है कन्या पूजन। इस दिन अपने घर में छोटी कन्याओं को बुलाकर लोग उन्हें स-सम्मान भोजन कराते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं, और फिर उन्हें दक्षिणा, गिफ्ट्स आदि देकर विदा करते हैं। अगर आप भी नवरात्रि के नवमी दिन कन्या पूजन की योजना बना रहे हैं तो पहले इसकी सही विधि जान लें:  

अपने घर में कुंवारी कन्याओं को बुलाएँ।सबसे पहले उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उसके बाद मंत्र द्वारा पंचोपचार पूजन करें।इसके बाद कन्याओं को हलवा, पूरी, चने, और सब्जी का भोजन कराएं।भोजन के बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएँ और उन्हें रोली तिलक लगाकर कलावा बाँधें। अंत में उनके पैर छूकर उन्हें अपनी यथाशक्ति अनुसार कोई भी एक गिफ्ट या फिर दक्षिणा देकर उनके पैर छूएँ और उनका आशीर्वाद लें। कहा जाता है नवरात्रि में कन्या पूजन करने से माँ शीघ्र और अवश्य ही प्रसन्न होती हैं।

नवरात्रि के आखिरी दिन हवन क्यों है जरूरी?

नवरात्रि का समापन दरअसल हवन से होता है। कहा जाता है कि यदि आखिरी दिन हवन ना किया जाए तो इससे माँ की साधना अधूरी रह जाती है। यही वजह है कि नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करना बेहद आवश्यक होता है। सिर्फ इतना ही नहीं है सनातन धर्म में हवन को शुद्धिकरण और एक बेहद ही पवित्र कर्मकांड माना गया है। 

इससे ना केवल हमारे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है बल्कि हमारे आसपास सकारात्मकता का भी संचार होने लगता है। यदि आप भी नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करने की योजना बना रहे हैं तो नीचे हम आपको हवन की सामग्री की पूर्ण सूची प्रदान कर रहे हैं। 

हवन के लिए आवश्यक सामग्री: आम की लकड़ियां, हवन कुंड, सूखा नारियल, सुपारी, लॉन्ग, इलायची, कलावा, रोली, पान का पत्ता, गाय का शुद्ध घी, हवन सामग्री, कपूर, चावल, शक्कर, हवन की पुस्तिका।

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माँ सिद्धिदात्री के मंत्र –

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

जिसका अर्थ है कि, सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और स्वयं देवताओं के द्वारा पूजित और सिद्धि देने वाली माँ सिद्धिदात्री हमें भी आठ सिद्धियां प्रदान करें और अपना असीम आशीर्वाद हमारे जीवन पर बनाए रखें।

माँ सिद्धिदात्री से संबंधित कथा 

माँ सिद्धिदात्री से संबंधित पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि, जब पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था तब उस अंधकार में ऊर्जा की एक छोटा सी किरण प्रकट हुई। धीरे-धीरे यह किरण बड़ी होती गई और इसने एक पवित्र दिव्य नारी का रूप धारण कर लिया। कहा जाता है यही देवी भगवती का नौवां स्वरूप माँ सिद्धिदात्री के रूप में परिणित हुआ।

माँ सिद्धिदात्री ने प्रकट होकर त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, और महेश को जन्म दिया था। इसके अलावा कहा जाता है कि भगवान शिव शंकर को जो आठ सिद्धियां प्राप्त थीं वह भी माँ सिद्धिदात्री की ही कृपा थी। सिद्धिदात्री देवी की ही कृपा से शिवजी का आधार शरीर देवी का हुआ जिससे उनका नाम अर्धनारेश्वर पड़ा।

इसके अलावा एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि, जब सभी देवी देवता महिषासुर के अत्याचार से परेशान हो गए थे तब तीनों देवों ने अपनी तेज से माँ सिद्धिदात्री को जन्म दिया था। जिन्होंने कई वर्षों तक महिषासुर से युद्ध किया और अंत में महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके अत्याचार से बचाया था।

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नवरात्रि के दिन अवश्य करें ये उपाय 

मेष राशि के जातक माँ को लाल फूल चढ़ाएं और नैवेद्य में गुड, लाल रंग की मिठाई अवश्य शामिल करें । वृषभ राशि के जातक सफेद फूल माँ को अर्पित करें और सफेद चंदन या स्फटिक की माला से दुर्गा मंत्र का जाप करें। मिथुन राशि के जातक इस दिन तुलसी की माला से गायत्री मंत्र या दुर्गा मंत्र का जप करें और माँ को खीर का भोग लगाएं। कर्क राशि के जातक माँ को अक्षत और दही का भोग लगाएं। सिंह राशि के जातक माँ की पूजा में सुगंधित फूल शामिल करें और गुलाबी हकीक की माला सिद्ध करके धारण करें। कन्या राशि के जातक तुलसी की माला से गायत्री मंत्र, दुर्गा मंत्र का जाप करें और माँ को खीर का भोग लगाएं। तुला राशि के जातक माँ को सफेद रंग के फूल अर्पित करें और सफेद चंदन या स्फटिक की माला से दुर्गा मंत्र का जाप करें। वृश्चिक राशि के जातक लाल चंदन की माला से देवी मंत्र का जाप करें और लाल रंग की ही कोई मिठाई माँ को अर्पित करें। धनु राशि के जातक पीले फूलों से माँ की पूजा करें और हल्दी की माला से माँ दुर्गा के मंत्र का जप करें। मकर राशि के जातक आसमानी रंग के आसन पर बैठकर माँ को नीले रंग के फूल अर्पित करें और नीलमणि की माला से माँ के मंत्रों का जाप करें। कुंभ राशि के जातक माँ को नीले फूल अर्पित करें और नीले पुष्प और नीलमणि की माला से माँ के मंत्रों का जाप करें। मीन राशि के जातक देवी को पीले फूल चढ़ाएं और हल्दी की माला से से माँ के मंत्र का जप करें।

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नवरात्रि नौवें दिन का महा उपाय

भाग्य उदय के लिए नवरात्रि के आखिरी यानी नवमी के दिन मौसमी फल, हलवा, चना, पूरी, खीर और नारियल का भोग देवी को अवश्य अर्पित करें। इसके बाद उनके वाहन, उनके हथियार, योगिनियों और अन्य देवी देवताओं के नाम से हवन पूजन अवश्य करें। कहा जाता है इस छोटे से उपाय को करने से माँ दुर्गा अवश्य प्रसन्न होती है और व्यक्ति का भाग्य उदय होता है।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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