निर्जला एकादशी: इस दिन बिना जल पिए व्रत रखने से बरसती है माँ लक्ष्मी की कृपा, नोट कर लें डेट

सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है। साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं। इन एकादशी में एक है निर्जला एकादशी। पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं क्योंकि इस व्रत को सबसे पहले द्वापर युग में भीम ने किया था। 

‘निर्जला’ शब्द का अर्थ है ‘बिना पानी के’ और इसलिए इस एकादशी का व्रत बिना पानी और भोजन ग्रहण किए रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को रखने से सभी तीर्थों पर स्नान करने के बराबर पुण्य मिलता है। साथ ही, यह एकादशी सभी 24 एकादशी उपवास के बराबर फल प्रदान करता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु का आशीर्वाद दिलाने वाली सभी एकादशी में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन होता है। आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और पौराणिक कथा के बारे में।

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निर्जला एकादशी: तिथि व मुहूर्त

इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 31 मई 2023 को पड़ेगी। निर्जला एकादशी तिथि का आरंभ 30 मई 2023 मंगलवार की दोपहर 1 बजकर 9 मिनट से होगा जबकि समापन 31 मई 2023 बुधवार की दोपहर 1 बजकर 47 पर होगा। 

निर्जला एकादशी: व्रत पारण मुहूर्त

निर्जला एकादशी पारण मुहूर्त: 1 जून 2023 की सुबह 05 बजकर 23 से 08 बजकर 09 तक।

अवधि: 2 घंटे 46 मिनट

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निर्जला एकादशी का महत्व

मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने, पूजा और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा लेता है। यह व्रत मन को संयम रखना सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है। पौराणिक मान्यता है कि पांच पांडवों में एक भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और बैकुंठ को गए थे।

निर्जला एकादशी पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ-सफाई कर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद संभव हो तो पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें और स्मरण करें। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें- ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप जरूर करें। उसके बाद रात को दीपदान करें साथ ही पीले फूल और फलों को अर्पण करें। श्री हरि विष्णु से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगे। शाम को भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और रात में भजन कीर्तन करते हुए जमीन पर ही विश्राम करें। फिर अगले दिन सुबह उठकर स्नान आदि करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें अपने इच्छानुसार भेट दें। इसके बाद सभी को एकादशी का प्रसाद वितरित करें और फिर मुहूर्त पर व्रत पारण करें। 

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निर्जला एकादशी: व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीम ने वेद व्यास जी से कहा कि उनकी माता और सभी भाई एकादशी व्रत रखने का सुझाव देते हैं लेकिन उनके लिए यह संभव नहीं है। वह पूजा पाठ, दान आदि कर सकते हैं, लेकिन व्रत में भूखा नहीं रह सकते। उनकी बात सुनकर वेदव्यास जी ने कहा कि हे भीम, यदि आप स्वर्गलोक की प्राप्ति करना चाहते हैं तो प्रत्येक माह में आने वाली दोनों एकादशी के दिन बिना अन्न ग्रहण करें व्रत रखें। तब भीम ने कहा कि यदि पूरे वर्ष में कोई एक व्रत हो तो वह रह भी सकते हैं लेकिन हर माह व्रत करना उनके लिए असंभव है क्योंकि उन्हें भूख जल्दी लगती है।

भीम ने वेद व्यास जी से निवेदन करते हुए कहा कि कृपा ऐसे व्रत के बारे में बताएं जो पूरे साल में सिर्फ एक बार ही रखा जाता हो और उसे करने से बैकुंठ धाम की प्राप्ति हो। तब व्यास जी ने उन्हें 

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी यानी निर्जला एकादशी व्रत के बारे में बताया और कहा कि यह व्रत आपको जरूर करना चाहिए। वेदव्यास जी ने इस व्रत के बारे में बताते हुए कहा कि इस व्रत में पानी पीना भी वर्जित होता है। इसमें केवल स्नान करना और आचमन करने की ही अनुमति है। इस दिन भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है। उन्होंने बताया कि यदि निर्जला एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करें, तो पूरे 24 एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि द्वादशी को सूर्योदय बाद स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन कराएं व दान दें। इसके अलावा भूखों को भी भोजन कराएं और उनकी सेवा करें इसके बाद फिर स्वयं भोजन करके व्रत पारण करें। व्यास जी की बातों को सुनने के बाद भीम ने पूरे विधि विधान से निर्जला एकादशी व्रत रखा। यही कारण है कि इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं।

निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए करें ये ख़ास उपाय

परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए

निर्जला एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान से श्री हरि भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। साथ ही, खीर में तुलसी डालकर भोग लगाएं। ऐसा करने से सभी परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

गुरु दोष से मुक्ति पाने के लिए

इस दिन भगवान विष्णु के मंदिर जाकर पीले रंग का ध्वज अर्पित करें। ऐसा करने से गुरु के दोष से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही विवाह में आने वाली अड़चन भी दूर होती है।

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए

माना जाता है कि इस दिन घर में या मंदिर के अगल-बगल केले का पौधा लगाना बेहद शुभ होता है। इसके साथ ही इसकी देखभाल करें और रोजाना पानी दें। वहीं पौधे में हर गुरुवार के दिन हल्दी मिला हुआ जल अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

संकटों से निजात पाने के लिए

निर्जला एकादशी के दिन अगर आप किसी तरह का उपाय करने में असमर्थ हैं तो, इस दिन केवल पीपल के पेड़ को जल चढ़ाने से ही सारे संकट मिट जाते हैं।

पितृ दोष और चंद्र दोष से मुक्ति पाने के लिए

निर्जला एकादशी के दिन जल दान करें। मान्यता है कि इस दिन प्याऊ लगवाने या फिर किसी मंदिर के पास जल, शरबत वितरण करने से पितृ दोष और चंद्र दोष से छुटकारा पाया जा सकता है।

मनोकामनाएं पूरी करने के लिए

निर्जला एकादशी के दिन सुबह उठकर सबसे पहले हथेलियों को देखकर इस मंत्र का जाप करें- ‘कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविंद, प्रभातेकरदर्शनम्।।’ फिर अपने दिन की शुरुआत करें। ऐसे करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है व जीवन में सुख शांति बनी रहती है।

बुरी शक्ति दूर करने के लिए

निर्जला एकादशी के दिन पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए और फिर सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल देना चाहिए। जल देने के दौरान इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। मंत्र- ‘ऊँ सूर्याय नमः ऊँ वासुदेवाय नमः ऊँ आदित्याय नमः।’ ऐसा करने से व्यक्ति सभी नकारात्मक व बुरी शक्तियों से दूर रहता है।

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