पौष मास शुरू: हो जाएं सतर्क! शुभ और मांगलिक कामों पर लग जाएगा ब्रेक

हिंदू धर्म में हर महीने से जुड़ीं भिन्न-भिन्न मान्यताएं और नियम बताए गए हैं। ऐसे ही, पौष मास जिसे पूस का महीना भी कहा जाता है और यह हिंदू वर्ष का दसवां महीना है। इस विशेष ब्लॉग में हम पौष मास के बारे में जानेंगे जैसे इसके नियम-कायदे, कौन से काम इस महीने में वर्जित होते हैं। साथ ही कब होगा पौष के महीने का आरंभ? तो आइए एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग की शुरुआत करते हैं।

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पौष मास में कौन से काम है वर्जित?

पौष मास में कई कामों को करना वर्जित बताया गया है। खासतौर पर शुभ और मांगलिक कार्य इस माह में नहीं किए जाते हैं। शादी समारोह से लेकर अन्य सभी मांगलिक काम पौष मास में करने की सख्त मनाही होती है। विवाह के अलावा पौष महीने में गृह प्रवेश, देवता पूजन, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्य करना भी वर्जित होता है।

कब होगी पौष महीने की शुरुआत?

पौष मास 09 दिसंबर 2022 से शुरू हो रहा है और ये 7 जनवरी 2023 को समाप्त हो जाएगा। इस माह में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। एस्ट्रोसेज के इस ब्लॉग में हम पौष महीने के त्यौहार और व्रत के बारे में जानेंगे। साथ ही, पौष पूर्णिमा व्रत के बारे में भी विस्तार से बात करेंगे।

पौष पूर्णिमा व्रत का महत्व

पौष माह को सूर्य देव का महीना माना जाता है और इस महीने के दौरान पड़ने वाली पौष पूर्णिमा के व्रत से लोगों को सूर्य देव की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करते हैं। पौष पूर्णिमा व्रत का फल प्राप्त करने के लिए व्रत पूजा को विधि-विधान से करना चाहिए। यहाँ हम आपको पौष पूर्णिमा व्रत की विधि प्रदान कर रहे हैं जो इस प्रकार हैं:

सुबह उठकर स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहने और व्रत का संकल्प लें।इसके बाद, सूर्य देव को अर्घ्य दें।सूर्य देव की पूजा करने के बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करें और उन्हें नैवेद्य अर्पित करें।ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।जरूरतमंद लोगों को तिल, गुड़, कंबल, ऊनी चीजों का दान करें।पूरे दिन के व्रत के बाद, शाम के समय सूर्य देव की पूजा करने के पश्चात बिना नमक का भोजन ग्रहण करें।

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पौष मास में सूर्य देव की आराधना का महत्व

हिंदू धर्म में सप्ताह का हर एक दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित होता है। ऐसे ही, रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। वहीं पौष मास में सूर्य देव की आराधना का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। मान्यता के अनुसार इस महीने सूर्य देव की उपासना करने से और रविवार को व्रत करने से लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है जिसके प्रभाव से लोगों को शुभ फल प्राप्त होते हैं जैसे कि शिक्षा, व्यापार, सेहत और परिवार में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। 

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा और पिता का कारक माना जाता है। जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, ऐसे लोगों को बिजनेस में अच्छे परिणामों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, मनुष्य को हमेशा अपने पिता का समर्थन प्राप्त होता है।

पौष मास में करें ये उपाय, मिलेगी सुख-समृद्धि

जरूरतमंदों को अरहर दाल और चावल की खिचड़ी में घी डाल कर दान करें।पौष मास में लाल रंग का काफी महत्व है, इसलिए कोशिश करें की आप ये रंग ज्यादा पहन सकें।हर सोमवार भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करें, और उन्हें बेलपत्र चढ़ाएं।इसके अलावा आप भगवान शिव को गुड़ और अनार का भी भोग लगा सकते हैं।पौष मास में दान का अलग महत्व माना जाता है, इसलिए इस महीने में तांबे के बर्तन दान करें।बेलपत्र भगवान शिव के अति प्रिय माने जाते हैं, पौष मास में आप इसकी जड़ को लाल धागे या कपड़े में लपेटकर गले में पहन सकते हैं।

पौष मास में पड़ने वाले व्रत-त्योहार

तिथि एवं दिनव्रत/ त्योहार11 दिसंबर 2022, रविवारसंकष्टी चतुर्थी16 दिसंबर 2022, शुक्रवारधनु संक्रांति19 दिसंबर 2022, सोमवारसफला एकादशी21 दिसंबर 2022, बुधवारप्रदोष व्रत(कृष्ण), मासिक शिवरात्रि23 दिसंबर 2022, शुक्रवारपौष अमावस्या 02 जनवरी 2023, सोमवारपौष पुत्रदा एकादशी04 जनवरी 2023, बुधवारप्रदोष व्रत(शुक्ल)

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