पढ़ें छाया ग्रह केतु के शुभ-अशुभ प्रभाव और अचूक ज्योतिषीय उपाय।

एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग आपको छाया ग्रह केतु के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों से रूबरू कराएगा। साथ ही इसमें केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कुछ अचूक ज्योतिषीय उपाय भी बताए गए हैं। यह विशेष ब्लॉग एस्ट्रोसेज के विद्वान और अनुभवी ज्योतिषी द्वारा तैयार किया गया है। तो चलिए जान लेते हैं केतु ग्रह के बारे में।

केतु एक ऐसा ग्रह, जिससे हर व्यक्ति को डर लगता है है क्योंकि आम लोगों का मानना है कि इसका प्रभाव हमेशा बुरा ही होता है। हालांकि ऐसा नहीं है, आपकी कुंडली में कई बार केतु की अनुकूल स्थिति आपको लाभ भी पहुंचाती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो कुंडली में इसकी स्थिति ही शुभ-अशुभ प्रभावों का निर्धारण करती है।

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ज्योतिष में केतु ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, केतु स्थिरता, शोहरत, नाम और सकारात्मकता का प्रतीक है। नक्षत्रों की बात करें तो केतु मूल, माघ और अश्विनी नक्षत्र का स्वामी होता है। केतु दूसरे ग्रहों से अलग है क्योंकि दूसरे ग्रह किसी न किसी राशि के स्वामी होते हैं, लेकिन केतु के साथ ऐसा नहीं है। केतु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। हालांकि ऐसा कहा जाता है कि केतु मिथुन और वृषभ राशि में नीच का और  धनु और वृश्चिक राशि में उच्च का होता है।

यदि किसी ग्रह के साथ केतु का संयोजन होता है या संबंध पाया जाता है तो इसके परिणामों में वृद्धि हो जाती है और परिणाम सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रकार के हो सकते हैं। वैदिक ज्योतिष में केतु का स्पेस का प्रतीक माना जाता है। इसके प्रभाव से आपको अपने सभी कार्य पूरा करने में मदद मिलती है और साथ ही यह पुनर्जन्म के बंधन से आपको मुक्त करता है और कई बार तो यह आपको अलगाव की स्थिति तक भी पहुंचा सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि केतु ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जो हमारे भोजन से प्राप्त विटामिन और मिनरल को सही जगह तक पहुंचाता है। अब बात करते हैं केतु के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों की।

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केतु के सकारात्मक प्रभाव

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, यदि कुंडली में केतु की स्थिति अनुकूल हो तो यह जातक के मस्तिष्क को तेज और सकारात्मक बनाएगा। जातकों को अपने पुत्र, दामाद और जीजा से पूरी तरह से सहयोग मिलेगा। मान्यता है कि केतु मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य लेकर आता है। जिन जातकों पर केतु का प्रभाव होता है, उनकी बुद्धि काफ़ी तीव्र होती है और उनमें सोचने की अपर क्षमता पाई जाती है। ऐसे जातक समाज में एक बड़ा बदलाव भी ला सकते हैं।

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केतु के नकारात्मक  प्रभाव

यदि आपकी कुंडली में केतु प्रतिकूल या कमज़ोर अवस्था में विराजमान हो, तो आप नकारात्मकता से भर सकते हैं। ऐसे में आप अपने जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम नहीं होंगे। साथ ही दूसरों के बहकावे में जल्दी आ जाएंगे। 

जिन जातकों पर केतु का हानिकारक प्रभाव हो, उन्हें अपनी दुर्बलता अथवा कमजोरी किसी को नहीं बतानी चाहिए अन्यथा बाद में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य की बात करें तो केतु के दुष्प्रभाव से पैरों, रीढ़ की हड्डी, कानों और जातक के गुप्तांग में बीमारियां भी हो सकती हैं। इस तरह के लोग अपने जीवन में सही लक्ष्य और सही रास्ता खोजने में भी असमर्थ होते हैं।

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इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए बृहस्पति का सहारा लिया जा सकता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा और केतु की युति होती है, उनके ऊपर अपनी माता जी का काफी दबाव रहता है या यूं कहें कि उन जातकों के हर एक निर्णय में उनकी माता जी की चलती है।  ऐसे जातकों की भावनाएं बार-बार बदलती रहती हैं और ये कभी भी अपने घर में कोई भी पालतू पशु नहीं रख सकते हैं।

केतु पीड़ित जातकों को अपने घर में कभी नंगे पांव नहीं रहना चाहिए। जिस जातक की कुंडली में बृहस्पति और केतु की युति होती है, वे अपने ज्ञान से कभी संतुष्ट नहीं हो सकते हैं। इसी प्रकार कुडंली में जब शुक्र और केतु की युति होती है तो भले ही व्यक्ति के पास विलासिता की तमाम चीज़ें हों, मगर वह उनका सुख नहीं भोग पाएगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो केतु पीड़ित जातक हमेशा असंतुष्ट रहते हैं। इसका कारण यह है कि केतु असंतोष का भी प्रतिनिधित्व करता है।

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अपनी राशि में केतु की दशा मजबूत करने के उपाय

प्रतिदिन कुत्तों को भोजन कराएं, इससे केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होंगे।हमेशा अपने दामाद और जीजा से अच्छे रिश्ते बना कर रखें।कुत्तों के साथ अच्छी तरह से व्यवहार करें।

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इसी आशा के साथ कि आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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