बसंत पंचमी पर सबसे उत्तम योग; इस दिन बिना मुहूर्त के भी हो जाती है शादी!

बसंत पंचमी 2023 माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती और कामदेव की पूजा का विधान है। बसंत पंचमी को बागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मांगलिक कार्य जैसे- मुंडन संस्कार, नई विद्या आरंभ करना, नया कार्य शुरू करना, अन्नप्राशन संस्कार, गृह प्रवेश आदि शुभ काम करना फलदायी होता है। इसके अलावा, विवाह के लिए भी इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है।

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हर साल की तरह इस साल भी बसंत पंचमी पर कई जोड़े विवाह बंधन में बंध जाएंगे। कहा जाता है कि अबूझ विवाह के लिए बसंत पंचमी के दिन सबसे बेहतर मुहूर्त होता है। यानी जिन जोड़ों के विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकल रहा हो तो वे बेझिझक बसंत पंचमी के दिन विवाह कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि बसंत पंचमी का दिन विवाह के लिए इतना उपयुक्त क्यों माना जाता है? इन दिन कौन सा योग बन रहा है और इससे जुड़ी कई और महत्वपूर्ण जानकारियां।

बसंत पंचमी 2023 तिथि और मुहूर्त 

बसंत पंचमी तिथि: 26 जनवरी 2023 (गुरुवार)

पंचमी तिथि आरंभ: 26 जनवरी 2023, गुरुवार, सुबह 07 बजकर 12 मिनट से

पंचमी तिथि समाप्त: 26 जनवरी 2023, गुरुवार, 12 बजकर 33 मिनट तक।

अवधि: 5 घंटे 21 मिनट

शुभ योग में मनाई जाएगी बसंत पंचमी 2023

इस बार बसंत पंचमी पर शिव योग बन रहा है जिसे बेहद शुभ योग माना गया है। शिव योग को तंत्र या वामयोग भी कहते हैं। इस अवधि के दौरान भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-आराधना करना बेहद फलदायी माना जाता है। शुभ और मांगलिक कामों के लिए यह योग काफी अच्छा साबित होता है। 

शिव योग आरंभ: 25 जनवरी 2023, शाम 06 बजकर 14 मिनट से 

शिव योग समाप्त: 26 जनवरी 2023, 03 बजकर 28 मिनट तक।

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बसंत पंचमी 2023 पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान आदि करके पीले या सफेद रंग के कपड़े पहने। उसके बाद सरस्वती पूजा का संकल्प लें।फिर, पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। लेकिन उससे पहले भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें क्योंकि गणेश जी प्रथम पूज्य हैं और इसके बाद उनको फूल, अक्षत, धूप, दीप आदि अर्पित करें।अब मां सरस्वती को गंगाजल व दूध से स्नान कराएं और फिर उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद देवी को पीले फूल, अक्षत, सफेद चंदन या पीले रंग की रोली, पीला गुलाल, धूप, दीप आदि अर्पित करें और मां शारदा को गेंदे के फूल की माला पहनाएं।इस दिन मां सरस्वती को बेसन के लड्डू या कोई भी पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।अब सरस्वती वंदना व मंत्र से मां सरस्वती की पूजा करें। साथ ही, सरस्वती मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।पूजा के अंत में हवन और आरती करें। 

बसंत पंचमी पर इन बातों का रखें ध्यान

इस दिन संभव हो तो पीले वस्त्र पहने क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है।विद्यार्थियों को सरस्वती पूजा के दिन पुस्तकें, कलम, पेंसिल आदि की भी पूजा करनी चाहिए।बसंत पंचमी के दिन सुबह उठते ही अपनी हथेलियों को जरूर देखें। माना जाता है कि मां सरस्वती हमारी हथेलियों में वास करती हैं।बसंत पंचमी के दिन शिक्षा से संबंधित चीजों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।इस दिन पेड़-पौधों की कटाई-छटाई भूलकर भी न करें।इसके अलावा इस दिन काले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है।

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बसंत पंचमी क्यों है शादी के लिए अबूझ मुहूर्त?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बसंत पंचमी के पूरे दिन दोषरहित श्रेष्ठ योग रहता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव व माता पार्वती जी के विवाह से पूर्व जब उनके तिलक समारोह का आयोजन देवताओं द्वारा किया गया था उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की बसंत पंचमी तिथि यानी बसंत पंचमी का पर्व था। तभी से इस पर्व को एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। इस दृष्टि से शादी के लिए बसंत पंचमी का दिन शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा आराधना करने से अविवाहितों को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती हैं।

बसंत पंचमी के दिन कौन कर सकता है शादी

बसंत पंचमी के दिन ऐसे लोग शादी कर सकते हैं जिन्हें लगातार विवाह में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो। यदि शादी के लिए वर और वधु पक्ष राजी हों लेकिन गुण मिलान नहीं हो पा रहा हो तो ऐसे में बसंत पंचमी के दिन बिना गुण मिलाए शादी की जा सकती है।शादी के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा हों तो ऐसे में बसंत पंचमी के दिन विवाह कर लेना शुभ माना जाता है।  जो लोग तुरंत शादी करना चाहते हैं उनके लिए बसंत पंचमी का दिन सबसे बेहतर माना जाता है।

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