बेटे की चाह के लिए की जाती है ‘गार्गी मां की पूजा’, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाई जाती है बली

जागेश्वर मिश्रा बताते हैं कि पहले पूजा अर्चना के बाद बकरे की बलि दी जाती थी, लेकिन अब समय के बदलाव के साथ बकरे का कान काट कर उसे छोड़ दिया जाता है, फिर कोई उसका वध नहीं करता है.

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