‘ब्रह्म हत्या’ से भी मुक्ति दिलाता है जया एकादशी का व्रत; जानें शुभ मुहूर्त व तिथि!

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ दर्जा दिया गया है। एक साल में 24 या 26 एकादशी पड़ती है और हर एकादशी का अपना एक अलग महत्व होता है। इसी क्रम में माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को जया एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस दिन व्रत रखते हुए श्री हरि भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा को पूरे विधि-विधान और वैदिक रिवाजों से करने पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, माता लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है और भक्तों को दुखों से मुक्ति मिलती है। 

जया एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु का स्मरण करने से पिशाच योनि का भय खत्म हो जाता है। यही नहीं इस व्रत को करने से ‘ब्रह्महत्या’ के पाप से भी मुक्ति मिलती है। जया एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को दक्षिण भारत के कुछ हिंदू समुदायों, खासकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों में ‘भूमि एकादशी’ और ‘भीष्म एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है।

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जया एकादशी व्रत 2023: मुहूर्त व तिथि

जया एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि को पड़ता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 फरवरी 2023 को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

जया एकादशी 2023 व्रत: 01 फरवरी 2023, बुधवार

माघ शुक्ल एकादशी तिथि प्रारंभ: 31 जनवरी 2023 को सुबह 11 बजकर 56 मिनट से

माघ शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त: 01 फरवरी 2023 को दोपहर 02 बजकर 04 मिनट तक

जया एकादशी 2023 पारण का समय: 02 फरवरी 2023 सुबह 07 बजकर 09 मिनट से 09 बजकर 19 मिनट तक

अवधि : 2 घंटे 10 मिनट

इस व्रत को तोड़ने के लिए सबसे सही समय सुबह का होता है और व्रत करने वाले व्यक्ति को दोपहर के समय व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। यदि जातक किसी कारणवश सुबह के समय व्रत तोड़ने में सक्षम नहीं होता है, तो उन्हें दोपहर के बाद पारण करना चाहिए।

जया एकादशी 2023 का महत्व

जया एकादशी के महत्व और कथा का वर्णन ‘पद्म पुराण’ में विस्तार से किया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को जया एकादशी के महत्व के बारे में बताया था कि यह व्रत ‘ब्रह्म हत्या’ जैसे पाप से भी मुक्ति दिला सकता है। जया एकादशी को बहुत ही फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। 

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जया एकादशी 2023 पूजा विधि 

जया एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर साफ-सफाई करके स्नान करना चाहिए। इसके बाद पूजा करने वाली जगह को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए और गंगाजल का पूरे घर पर छिड़काव करना चाहिए। फिर श्री हरि भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें।इसके बाद पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान श्रीकृष्ण के भजन और भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें। भगवान को नारियल, फल, अगरबत्ती, फूल और सबसे जरूरी तुलसी का पत्ता अर्पित करें, क्योंकि तुलसी का पत्ता श्रीहरि को सबसे प्रिय है। इसके अलावा पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः‘।एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी पर पूजा के बाद ही सुबह व्रत का पारण करें।

जया एकादशी के दिन करें ये खास उपाय

जया एकादशी के दिन नीचे दिए गए उपायों को करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में:

इस दिन जरूर लगाएं तुलसी व गेंदे का पौधा

धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी का पौधा घर पर लगाना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। इसे लगाने से पहले इसकी सही दिशा के बारे में जानकारी होनी चाहिए। बता दें तुलसी के पौधे को उत्तर, उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। इसके अलावा इस दिन गेंदे का फूल का पौधा भी जरूर लगाएं।

पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं जल

अगर आप कर्ज़ से परेशान हैं और इससे मुक्ति पाना चाहते हैं तो जया एकादशी के दिन एक तांबे के लोटे में जल व चीनी मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु जी का वास होता है।

तुलसी के पौधे के सामने जलाएं घी का दीपक

घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस एकादशी के दिन तुलसी के पौधे पर घी का दीपक जलाएं और तुलसी की 11 बार परिक्रमा करें, और उसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें।

नौ बत्तियों वाला दीपक जलाएं

अगर आप घर में पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो मान्यताओं के अनुसार, आर्थिक तंगी दूर करने के ल‍िए इस दिन नौ बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि दीपक बुझ न पाए और पूरी रात जलता रहे।

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इस दिन जरूर करें दान

शास्त्रों के अनुसार, जया एकादशी के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को पीले रंग के वस्त्र, अन्न और पीले रंग की आवश्यक वस्तुओं का दान करें। इस दिन दान करने का विशेष महत्व है।

मखाने की खीर से विष्णु जी को लगाएं भोग

जया एकादशी के दिन घर में या घर की छत पर पीले रंग का ध्वज अवश्य लगाएं। साथ ही इस दिन मखाने की खीर बनाकर उसमें तुलसी दल डालकर श्री हरि विष्णु जी को भोग लगाएं। 

जया एकादशी की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में नंदन वन में उत्सव हो रहा था और इस उत्सव में सभी देवी-देवता व ऋषि-मुनि पधारे थे। उत्सव में संगीत व नृत्य का भी आयोजन किया गया था। इस दौरान माल्यवान नाम का एक गंधर्व गायक और पुष्यवती नाम की एक नृत्यांगना नृत्य कर रही थी। नृत्य के दौरान दोनों एक-दूसरे पर मोहित हो गए और अपनी मर्यादा भूल गए जिस वजह से उत्सव फीका पड़ने लगा। ऐसे में उनके इस व्यवहार से इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने दोनों को स्वर्ग लोक से निष्कासित करके मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर निवास करने का श्राप दे दिया जिसके कारण दोनों पिशाचों का जीवन व्यतीत करने लगे। 

इस दौरान उन दोनों को अपने किए पर पछतावा होने लगा और ऐसे में, वे अपने इस पिशाची जीवन से मुक्ति पाना चाहते थे। संयोगवश एक बार माघ शुक्ल की जया एकादशी को दोनों ने भोजन नहीं किया और एक पीपल के पेड़ के नीचे पूरी रात गुजारी। साथ ही, अपनी गलती का पश्चाताप करते हुए आगे गलती न दोहराने का प्रण लिया। इसके बाद सुबह होते ही उन्हें पिशाची जीवन से मुक्ति मिल गई। उन्हें ये बात मालूम नहीं थी कि उस दिन जया एकादशी थी और अनजाने में उन्होंने जया एकादशी का व्रत कर लिया। इस वजह से भगवान विष्णु की कृपा से वे दोनों पिशाच योनि से मुक्त पा सके। जया एकादशी व्रत के प्रभाव से दोनों पहले से भी अधिक रूपवान हो गए और फिर से मृत्युलोक से स्वर्ग लोक में पहुंच गए।

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