भाद्रपद मास में मेष सहित इन 5 राशियों का चमकेगा सोया हुआ भाग्य!

सनातन धर्म में भाद्रपद महीने को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस महीने की शुरुआत रक्षा बंधन उत्सव के अगले दिन यानी श्रावण माह की शुक्ल पूर्णिमा के दिन होती है। वैदिक ज्योतिष में इस माह का बहुत अधिक महत्व बताया गया है और यह ‘चातुर्मास’ के पवित्र महीनों में से एक है। यह महीना कई व्रत व त्योहारों से भरा हुआ है। तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं इस माह पड़ने वाले त्योहारों के बारे में लेकिन सबसे पहले जान लेते हैं इस माह का क्या महत्व है।

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भाद्रपद माह का महत्व

भाद्रपद मास पूजा-पाठ और व्रत के लिए खास माना जाता है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना, जरूरतमंदों को दान करना और व्रत रखने से बहुत लाभ होता है।भाद्रपद माह भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है।इस माह में आद्य काली जयंती कजरी तीज, हरतालिका तीज, राधा अष्टमी और कई अन्य महत्वपूर्ण त्योहार और व्रत आते हैं।पिछले जन्म में किए गए पापों के परिणामों से छुटकारा पाने के लिए और दुष्कर्मों का प्रायश्चित करने के लिए यह एक आदर्श महीना है।

आइए अब आगे जानते हैं इस माह में पड़ने वाले प्रमुख त्योहारों व व्रत के महत्व के बारे में।

वराह जयंती

वराह जयंती के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वराह रूप में अवतार लिया था और तब से इस दिन को वराह जयंती के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने इस दिन वराह अवतार लेकर दुष्ट राक्षस हिरण्याक्ष नामक दैत्य का वध किया था। इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। वराह जयंती भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 17 सितंबर 2023 को पड़ेगी। ऐसे में, वराह जयंती 17 सितंबर 2023 को मनाया जाएगा।

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विश्वकर्मा पूजा

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यानी 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा पूजा भी की जाएगी। इस दिन कन्या संक्रांति यानी सूर्य का कन्या राशि में गोचर भी होगा। मान्यता है कि इस दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें पुत्र के रूप में भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। यह त्योहार भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर बंगाल और उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से मनाया जाता है।

हरतालिका तीज

यह त्योहार भी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भी मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज का त्योहार 17 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन इस दिन महिलाएं घर में ही मिट्टी से  भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्ति बनाती हैं और उनकी विधि-विधान से पूजा करती हैं।

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी को बुद्धि, समृद्धि, शुभता और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी आध्यात्मिकता, एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव है। भारत में एक महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है। दस दिवसीय गणेश चतुर्थी पर्व की शुरुआत इस साल 19 सितंबर 2023 से होगी। गुजरात, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम हिस्‍सों में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, गणपति का जन्म मध्याह्न यानी दोपहर के समय हुआ था, इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन इसी समय गणपति की पूजा करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इसके लिए मुहूर्त सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।

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ऋषि पंचमी

ऋषि पंचमी गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 20 सितंबर 2023, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। कहते हैं कि इस दिन रजस्वला स्त्री के लिए व्रत करना जरूरी होता है।

संतान सप्तमी

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी या अनंत सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार, यह विशेष दिन भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है। माना जाता है कि इन देवी-देवताओं की पूजा करने से जातकों को संतान प्राप्ति, समृद्धि और खुशहाली का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और सुबह से दोपहर तक भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान सूर्य की पूजा करती हैं। यह व्रत संतान के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का भी आशीर्वाद देता है।

राधा अष्टमी

राधा अष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण की प्रिय राधा रानी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। यानी कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व आता है। इस साल यह 23 सितंबर 2023 को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं। राधा अष्टमी का पर्व उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मथुरा और वृंदावन के अधिकांश हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करना अत्यंत शुभ होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के नाम और मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। कहते हैं इस दिन भगवान विष्णु शयन अवस्था में करवट लेते है इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

वामन जयंती

वामन जयंती भगवान विष्णु के वामन अवतार की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। भागवत पुराण के अनुसार, वामन भगवान विष्णु के दशावतार में से पांचवें अवतार थे और त्रेता युग में पहले अवतार थे। उनका जन्म राजा बलि के शासन को समाप्त करने और भगवान इंद्र के सिंहासन को फिर से स्थापित करने के लिए देवी अदिति और ऋषि कश्यप से हुआ था।  इस साल वामन जयंती 26 सितंबर 2023 को मनाई जाएगी।

अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पूरे भारत में विभिन्न रूपों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। इस पर्व को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। विशेष बात यह है कि इसी दिन शुभ समय में गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। यह पर्व हिन्दुओं के साथ- साथ जैन समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस व्रत के प्रभाव से उन्नति और सौभाग्‍य प्राप्‍त होता है। साथ ही, व्रत रखने वाले भक्त के दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी व्रत के दिन यदि श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जाए तो इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही, यह व्रत संतान की कामना के लिए भी किया जाता है। इस साल यह पर्व 28 सितंबर 2023 को मनाया जाएगा।

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मेष राशि

भाद्रपद का महीना मेष राशि के जातकों के लिए बहुत ही अधिक फलदायी साबित होगा। इस अवधि आपको करियर में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे और साथ ही, आप अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। इस दौरान आपको नए अवसर मिलेंगे जो आपके करियर में प्रगति लेकर आएगा। इसके अलावा, आपको अपने वित्त में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

कर्क राशि

भाद्रपद माह कर्क राशि के जातकों के लिए अत्यंत फलदायी और शुभ रहेगा। इस दौरान आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी और आपकी भौतिक इच्छाओं की पूर्ति होगी।

कन्या राशि

इस महीने कन्या राशि के जातकों को भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। जिन जातकों का खुद का व्यापार है उन्हें उच्च लाभ प्राप्त होगा और वह अपने नए उद्यमों में सफलता अर्जित करने में सक्षम होंगे। यही नहीं इसके अलावा, आपको कार्यक्षेत्र में अपने वरिष्ठों से पूरा सहयोग मिलेगा और नौकरी में पदोन्नति के योग बनेंगे।

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वृश्चिक राशि

यह महीने आपको अपनी व्यावसायिक सफलता और उपलब्धियों का जश्न मनाने के अवसर प्रदान करेंगी। आपको इस दौरान कोई अच्छी और सकारात्मक खबर मिल सकती है, जिससे आपके संतुष्टि महसूस होगी। इसके अलावा, आप अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएंगे। यदि आप किसी रिलेशनशिप में हैं तो संभव है कि आपका रिश्ता नया मोड़ ले ले यानी आप शादी का विचार बना सकते हैं। आपके आर्थिक जीवन की बात करें तो आप इस अवधि सुरक्षित महसूस करेंगे और कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम प्राप्त करेंगे।

कुंभ राशि

करियर के मामले में कुंभ राशि वाले जातकों की इस महीने सभी बाधाएं दूर होंगी। वहीं जो जातक नौकरी की तलाश कर रहे हैं उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे। जिन जातकों का अपना व्यापार हैं उन्हें इस दौरान सफलता और बिज़नेस में स्थिरता प्राप्त होगी।

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