मंगल वृश्चिक राशि में अस्त, इन राशियों पर टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़, रहें सतर्क!

मंगल वृश्चिक राशि में अस्त: मंगल ग्रह को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष स्थान  दिया गया है जो मनुष्य जीवन के साथ-साथ संसार को गहराई से प्रभावित करने का सामर्थ्य रखते हैं।

बता दें कि ज्योतिष में मंगल देव को उग्र ग्रह माना गया है और इन्हें नवग्रहों में सेनापति का दर्जा प्राप्त है। इनकी चाल में होने वाला छोटे से छोटा बदलाव जैसे राशि परिवर्तन, मार्गी, वक्री, उदय और अस्त  आदि का प्रभाव प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से विश्व पर भी नज़र आता है। इसी क्रम में, अब युद्ध के देवता के नाम से विख्यात मंगल ग्रह वृश्चिक राशि में अस्त होने जा रहे हैं। 

एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष लेख में हम आपको “मंगल वृश्चिक राशि में अस्त” के बारे में विस्तारपूर्वक बताएंगे।  साथ ही, मंगल ग्रह की अस्त अवस्था संसार और राशियों को किस तरह प्रभावित करेगी? किन उपायों की सहायता से आप मंगल अस्त के नकारात्मक प्रभावों से बच सकेंगे? इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो चलिए बिना देर किए हम शुरुआत करते हैं इस लेख की।   

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हमारे इस विशेष लेख में आपको न सिर्फ़ “मंगल वृश्चिक राशि में अस्त” की महत्वपूर्ण  जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि मंगल महाराज की अस्त अवस्था किन राशियों के शुभ और किनके लिए अशुभ परिणाम लेकर आएगी? इस दौरान किन राशियों को रहना होगा सावधान और किन पर बरसेगी मंगल ग्रह की कृपा? इसके बारे में भी आगे चर्चा करेंगे।

जिन जातकों की कुंडली में मंगल महाराज कमज़ोर अवस्था में हैं, उन्हें इनकी पीड़ित अवस्था किस तरह के परिणाम देगी, इसका जवाब भी हम आपको प्रदान करेंगे। अब जान लेते हैं मंगल अस्त के समय और तिथि के बारे में। 

मंगल वृश्चिक राशि में अस्त: तिथि व समय 

मंगल देव को उग्र स्वभाव का ग्रह माना जाता है और यह हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इस प्रकार, मंगल ग्रह एक राशि में लगभग 45 दिन रहते हैं और अब यह 07 नवंबर 2025 की रात 01 बजकर 46 मिनट पर वृश्चिक राशि में अस्त होने जा रहे हैं। हालांकि, मंगल ग्रह अपनी राशि वृश्चिक में अस्त होंगे, लेकिन फिर भी इनका अस्त होना शुभ नहीं कहा जा सकता है। 

ऐसे में, मंगल देव की अस्त अवस्था निश्चित रूप से संसार सहित राशि चक्र की सभी राशियों के जातकों के जीवन में बड़े परिवर्तन लेकर आने का काम कर सकती है। चलिए आगे बढ़ने से पहले आपको अवगत करवाते हैं कि ग्रह की अस्त अवस्था के बारे में। 

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किसे कहते हैं ग्रह का अस्त होना?   

जैसे कि हम आपको अपंने पिछले लेखों में बताते आये हैं कि नवग्रहों में सूर्य देव को छोड़कर हर ग्रह समय-समय पर अपनी चाल में बदलाव करते हुए उदय, अस्त, वक्री और मार्गी होता है। इन्हीं में से एक होता है ग्रह का अस्त होना। सरल शब्दों में कहें तो, ज्योतिष के अनुसार जब कोई ग्रह अपने मार्ग पर परिक्रमा करते हुए सूर्य के इतने नज़दीक आ जाता है कि वह सूर्य की तपन और तेज़ से प्रभावहीन हो जाता है, यानी कि वह अपनी सारी शक्तियों को खो देता है और कमज़ोर हो जाता है, इसको ही ग्रह का अस्त होना कहा जाता है। शायद ही, आप आप जानते होंगे कि नवग्रहों में सूर्य एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जो कभी भी अस्त, उदित, वक्री और मार्गी नहीं होते हैं। आइए नज़र डालते हैं मंगल ग्रह के महत्व पर। 

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मंगल ग्रह का ज्योतिषीय महत्व 

ज्योतिष में मंगल देव को महत्वाकांक्षा का ग्रह माना जाता है और इनकी गिनती शक्तिशाली ग्रहों में होती है। 

मंगल महाराज साहस, पराक्रम और ऊर्जा के कारक हैं। यह उग्र ग्रह हैं जो सिद्धांतों और प्रशासन से संबंधित कामों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

किसी व्यक्ति के जीवन में मंगल देव राजसी शान-ओ-शौक़त को दर्शाते हैं। साथ ही, इनकी कृपा के बिना कोई भी जातक अपने करियर में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है और न ही वह एक मजबूत व्यक्ति बनने में सक्षम होता है।

कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में होने पर जातक को जीवन में सभी तरह के सुख प्रदान करता है, विशेष रूप से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य और तेज बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में मंगल महाराज शुभ स्थिति में होते हैं, उन्हें अपने करियर में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होता है। 

जिन जातकों की कुंडली में मंगल देव अशुभ ग्रहों जैसे राहु या केतु के साथ मौजूद होते हैं, तो वह जातकों के जीवन को मुश्किलों से भर देते हैं। 

साथ ही, जातको को तनाव, डिप्रेशन, मान-सम्मान में कमी और आर्थिक संकट जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है। 

अब हम आपको रूबरू करवाते हैं मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से। 

कुंडली में अशुभ मंगल के संकेत

कुंडली में मंगल के अशुभ होने पर जातक को भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो सकता है।

जिन जातकों का मंगल कमज़ोर होता है, उन्हें ब्लड प्रेशर, नेत्र रोग, पथरी और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याएं घेर सकती हैं।

मंगल महाराज की दुर्बलता आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है जिसके चलते व्यक्ति पर ज्यादातर समय थकान हावी रहती है और किसी भी कार्य में मन नहीं लगता है। 

कुंडली में मंगल देव की अशुभता विवाह में देरी का कारण बनती है और ऐसे में, रिश्ते की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है या फिर शादी-विवाह तय होने में अनेक समस्याएं आती हैं। 

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मंगल वृश्चिक राशि में अस्त के दौरान करें ये उपाय

मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाएं और संकटमोचन हनुमान को सिंदूर का चोला अर्पित करें। ऐसा करने से आपके जीवन से कष्टों का अंत होता है।

कुंडली में मंगल देव को मज़बूत करने के लिए हर मंगलवार को व्रत करें।

मंगल ग्रह को कुंडली में बलवान करने के लिए मूंगा रत्न धारण करें, लेकिन ऐसा करने से पहले आप किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह अवश्य करें। 

मंगल ग्रह से शुभ परिणामों की प्राप्ति के लिए हर मंगलवार को हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करें। साथ ही, हनुमान चालीसा का पाठ करें क्योंकि इससे आपको हनुमान जी का भी आशीर्वाद मिलता है। 

मंगलवार के दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर बजरंगबली जी की पूजा करें और इसके बाद उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।

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मंगल वृश्चिक राशि में अस्त: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

यह भविष्यफल चंद्र राशि पर आधारित है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए क्लिक करें:
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मेष राशि के जातकों के लिए मंगल पहले और आठवें भाव के स्वामी हैं और मंगल वृश्चिक राशि… (विस्तार से पढ़ें) 

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वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल सातवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं और मंगल…(विस्तार से पढ़ें)

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मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं और मंगल…(विस्तार से पढ़ें)

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वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल पहले और छठे भाव के स्वामी हैं और मंगल …(विस्तार से पढ़ें) 

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मंगल वृश्चिक राशि में अस्त कब होंगे?

मंगल महाराज 07 नवंबर 2025 को वृश्चिक राशि में अस्त हो जाएंगे।

2. वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की आठवीं राशि वृश्चिक के स्वामी मंगल महाराज हैं।

3. ग्रह का अस्त होना किसे कहते हैं?

जब कोई ग्रह सूर्य के करीब चला जाता है, तो वह अपनी शक्तियां खोकर दुर्बल हो जाता है, इसे ही ग्रह का अस्त होना कहते हैं।  

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