माघ पूर्णिमा के दिन श्री हरि विष्णु करते हैं गंगाजल में निवास; जानें तिथि और महत्व!

सनातन धर्म में माघ मास का विशेष महत्व है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। इस माह में पूजा-पाठ और दान का बहुत अधिक महत्व होता है। इसके अलावा इसकी पूर्णिमा तिथि भी बेहद खास मानी जाती है। माघ माह की अंतिम तिथि को माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। वैसे तो हर महीने की पूर्णिमा तिथि पूजा-पाठ के दृष्टिकोण से खास मानी जाती है, लेकिन माघ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री हरि विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं और भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं इसलिए इस दिन स्नान करने से सभी पापों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके साथ ही इस पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने से व्यक्ति को महायज्ञ के समान लाभ मिलता है। 

बता दें कि माघ के महीने को पहले ‘माध’ का महीना कहते थे। ‘माध’ का तात्पर्य भगवान श्री कृष्ण के एक स्वरूप “माधव” से है। एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको माघ पूर्णिमा की तारीख, महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके अलावा इस दिन किए जाने वाले विशेष प्रकार के उपायों के बारे में भी चर्चा करेंगे।

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माघ पूर्णिमा 2023 तिथि और मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन स्नान और व्रत का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार माघ पूर्णिमा 05 फरवरी 2023, दिन रविवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस दिन रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है।

माघ पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 04 फरवरी, 2023 शनिवार की रात 09 बजकर 33 मिनट से

माघ पूर्णिमा तिथि समाप्त: 05 फरवरी, 2023 रविवार की रात 12 बजकर 01 मिनट तक

माघ पूर्णिमा 2023 सूर्योदय: 05 फरवरी को प्रातः 07 बजकर 07 बजे 

माघ पूर्णिमा 2023 सूर्यास्त: शाम 06 बजकर 03 बजे 

माघ पूर्णिमा का महत्व

27 नक्षत्रों में से एक मघा नक्षत्र के नाम से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके पवित्र नदियों में स्नान, दान और जप करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रीहरि की विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों में लिखे कथनों के अनुसार यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

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माघ पूर्णिमा 2023 पूजा विधि 

माघ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करना चाहिए। यदि गंगा स्नान न कर पाएं तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान भी कर सकते हैं। गंगाजल में स्नान के बाद ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद सूर्य की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और जल में तिल डालकर उसका तर्पण करें। फिर अपनी पूजा प्रारंभ करें।  श्री हरि भगवान विष्णु को भोग में चरणामृत, पान, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि चीजें अर्पित करें। अंत में आरती करें और भगवान के सामने जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगे।  पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के साथ- साथ धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करना भी बेहद फलदायी माना जाता है।

गंगा स्नान का महत्व

मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में देवता पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं। इस दिन खुद भगवान विष्णु गंगाजल में स्नान करते हैं इसलिए इस दिन गंगा स्नान का महत्व ज़्यादा है। यह भी मान्यता है कि इस दिन गंगाजल के स्पर्श मात्र से शरीर रोग मुक्त हो जाता है। व्यक्ति सारे पापों से छुटकारा पा लेता है और बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त करता है।

इन चीज़ों का करना चाहिए दान

माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद ध्यान और जप-तप करने से श्री हरि भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान करने का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस दिन गोदान, तिल, गुड़ और कंबल दान करना अच्छा माना गया है। इसके अलावा वस्त्र, गुड़, घी, कपास, लड्डू, फल, अन्न आदि चीज़ों का दान भी किया जा सकता है। दान के अलावा इस दिन परिवार के सदस्यों के संग भगवान सत्यनारायण की कथा जरूर सुननी चाहिए।

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माघ पूर्णिमा के दिन नहीं करने चाहिए ये काम

माघ पूर्णिमा के दिन किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन लहसुन, प्याज का सेवन भी निषेध माना गया है।पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का प्रभाव काफी तेज रहता है। जिस कारण इंसान काफी ज्यादा उत्तेजित और भावुक होता है। ऐसे में इस दिन क्रोध करने से बचें।अगर आपने व्रत किया है तो इस दिन किसी की भी निंदा, बुराई नहीं करनी चाहिए। साथ ही किसी भी व्यक्ति को अपशब्द भी नहीं कहने चाहिए क्योंकि ऐसा करने से व्यक्ति को दोष लगता है और मां लक्ष्मी भी रूठ जाती हैं।पूर्णिमा के दिन घर में किसी प्रकार का झगड़ा और कलह करने से भी बचना चाहिए। ऐसा करने से घर में दुःख और दरिद्रता का वास होता है।माघ पूर्णिमा धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन घर में किसी भी तरह की गंदगी नहीं रखनी चाहिए इसलिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।

माघ पूर्णिमा व्रत कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, कांतिका नगर में एक ब्राह्मण रहता था, जिसका नाम धनेश्वर था। वह भिक्षा मांगकर अपना जीवन निर्वाह करता था। ब्राह्मण की कोई संतान नहीं थी। एक दिन भिक्षा मांगने के दौरान लोगों ने ब्राह्मण की पत्नी को बांझ कहकर ताने मारे और उसे  भिक्षा देने से भी मना कर दिया।  इस घटना से ब्राह्मण की पत्नी को बहुत दुःख पहुंचा। जिसके बाद उसे किसी ने 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा। ब्राह्मण दंपत्ति ने 16 दिनों तक नियमों का पालन करते हुए पूजन किया। दंपत्ति की पूजा से प्रसन्न होकर 16वें दिन मां काली साक्षात प्रकट हुईं और उसे गर्भवती होने का वरदान दिया। इसके साथ ही मां काली ने उस ब्राह्मणी से हर पूर्णिमा के दिन एक दीपक जलाने को कहा और धीरे-धीरे हर पूर्णिमा पर एक-एक दीपक बढ़ा देने की बात कही। साथ ही दोनों पति-पत्नी को मिलकर पूर्णिमा का व्रत रखने को भी कहा।

मां काली के कहे अनुसार ब्राह्मण दंपति ने पूर्णिमा को दीपक जलाने शुरू कर दिए और व्रत रखा। ऐसा करने से ब्राह्मणी गर्भवती हो गई। कुछ समय बाद ब्राह्मणी ने एक पुत्र को जन्म दिया। दोनों ने अपने पुत्र का नाम देवदास रखा। लेकिन देवदास अल्पायु था। देवदास के बड़े होने पर उसे मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा दिया गया। काशी में दुर्घटनावश धोखे से उसका विवाह हो गया। कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया, लेकिन उस दिन पूर्णिमा थी और ब्राह्मण दंपति ने अपने पुत्र के लिए व्रत रखा था। जिसके चलते काल ब्राह्मण के पुत्र का कुछ नहीं बिगाड़ पाया और उसके पुत्र को जीवनदान मिल गया। इस ​तरह पूर्णिमा के दिन व्रत करने से श्रद्धालुओं को सभी कष्टों और संकटों से मुक्ति मिलती है।

माघ पूर्णिमा 2023 पर करें ये उपाय

माघ पूर्णिमा के दिन घर में तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी की पूजा एवं घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूरी करती हैं।माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा जरूर करें। पूजा से पहले एक सुपारी में रक्षा सूत्र बांध दें। उस पर चंदन या रोली लगाएं और अक्षत डालें। पूजा के बाद इस सुपारी को तिजोरी में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से कभी भी धन का अभाव नहीं होता है।माघ पूर्णिमा को माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ करें। इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।माघ पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी को गंगाजल में मिश्री डालकर चढ़ाएं और चंद्रमा को खीर का भोग लगाएं। माता लक्ष्मी को भी खीर अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।

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