मित्र चंद्रमा की राशि में सूर्य का गोचर, भर देगा इन राशि वालों की झोली ख़ुशियों से!

सूर्य का कर्क राशि में गोचर: धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य देव को महत्वपूर्ण माना गया है। एक तरफ, यह संसार को अपनी रोशनी से प्रकाशित करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ इन्हें नवग्रहों के राजा कहा जाता है। ऐसे में, संसार और मनुष्य जीवन के लिए सूर्य महाराज बेहद अहम हो जाते हैं। सूर्य ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है जो अपनी रोशनी से जीव-जंतुओं से लेकर मनुष्य तक को जीवन देते हैं। साथ ही, सभी देवी-देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन भक्त साक्षात कर सकता है। ऐसे में, जब कभी सूर्य ग्रह अपनी राशि में बदलाव करते हैं, तो इसे बहुत ख़ास माना जाता है। अब सूर्य देव जल्द ही अपनी राशि में परिवर्तन करते हुए कर्क राशि में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

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इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई अपने पाठकों के लिए “सूर्य का कर्क राशि में गोचर” का यह विशेष ब्लॉग लेकर आया है जिसके अंतर्गत आपको सूर्य गोचर से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी। सूर्य महाराज का गोचर कर्क राशि में होने से यह जातकों के जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। इस दौरान शुभ योगों का भी निर्माण होगा जिसका सकारात्मक असर देश-दुनिया पर दिखाई दे सकता है। अगर आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह कमज़ोर या अशुभ हैं, तो आप किन उपायों की मदद से सूर्य देव को मज़बूत कर सकते हैं? इस बारे में भी आज के इस ब्लॉग में हम विस्तार से बात करेंगे। तो आइए बिना देर किए शुरुआत करते हैं इस लेख की और सबसे पहले जान लेते हैं सूर्य गोचर का समय और तारीख़। 

सूर्य का कर्क राशि में गोचर: तिथि और समय 

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों के जनक कहा जाता है और अगर इनके विशेष गुणों की बात करें तो, यह अन्य ग्रहों की तरह कभी अस्त, वक्री और मार्गी नहीं होते हैं। हालांकि, सूर्य महाराज का एक राशि से दूसरी राशि में गोचर हर महीने होता है। अब यह 16 जुलाई की शाम 05 बजकर 17 मिनट पर कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में, इस राशि में शुभ योगों का भी निर्माण होगा। बता दें कि सूर्य ग्रह का यह गोचर अपने मित्र की राशि चंद्रमा में होगा। इस प्रकार, मित्र की राशि में सूर्य की उपस्थिति को शुभ कहा जा सकता है। तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और नज़र डालते हैं शुभ योगों पर।

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कर्क राशि में होगी सूर्य और बुध की युति 

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि ज्योतिष की दुनिया में ग्रहों के गोचर से कई तरह के शुभ और अशुभ योगों का निर्माण होता है। इसी क्रम में, जब सूर्य देव चंद्रमा की राशि में प्रवेश करेंगे, उस समय वहां पहले से ही बुद्धि और ज्ञान के कारक ग्रह बुध महाराज उपस्थित होंगे। ऐसे में, कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति करने से बेहद शुभ माने जाने वाले बुधादित्य योग का निर्माण होगा जिसका लाभ राशि चक्र की कुछ राशियों को मिलेगा। आइए अब हम बात करेंगे सूर्य ग्रह के ज्योतिषीय महत्व की। 

ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य

बात करें सूर्य ग्रह के महत्व की तो, वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह को पिता, आत्मविश्वास, पद, आत्मा, सरकारी नौकरी और आत्म सम्मान के कारक ग्रह कहा गया है। 

वहीं दूसरी तरफ, मनुष्य जीवन में सूर्य महाराज करियर, समर्पण, अहंकार, गरिमा, जीवनशक्ति, नेतृत्व क्षमता, सहनशक्ति और करियर आदि को नियंत्रित करते हैं। 

साथ ही, शरीर के अंगों में सूर्य देव हड्डियों और दिल के कारक ग्रह हैं।        

बात करें राशियों की तो, सूर्य ग्रह को राशि चक्र में सिर्फ़ एक राशि सिंह पर आधिपत्य प्राप्त हैं जो कि इनकी मूलत्रिकोण राशि भी है। 

अगर सूर्य महाराज अपने स्वामित्व वाली सिंह राशि में बैठे होते हैं, तो वह जातकों को सकारात्मक परिणाम देने का काम करते हैं।

यह मंगल ग्रह की राशि मेष में उच्च अवस्था में होते हैं और तुला राशि में इनकी स्थिति नीच होती है। कुंडली में सूर्य पांचवे भाव के स्वामी हैं।   

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह मज़बूत स्थिति में होते हैं, तो आपको करियर में उच्च पद की प्राप्ति होती है। 

इसके अलावा, व्यक्ति को सूर्य के बलवान होने पर तेज़ बुद्धि, संतुष्टि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। 

दूसरी तरफ, यदि आपकी कुंडली में सूर्य पीड़ित, दुर्बल या अशुभ अवस्था में होते हैं, तो आपको हृदय और नेत्रों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

ऐसे व्यक्ति स्वभाव से गुस्सैल, आत्म केंद्रित, ईर्ष्यालु और अहंकारी हो सकते हैं।

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मनुष्य जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं सूर्य?

सूर्य ग्रह की शुभ-अशुभ स्थिति मनुष्य जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती है, कैसे? आइए जानते हैं। 

करियर पर सूर्य का प्रभाव: कुंडली में सूर्य के बलवान और शुभ स्थिति में होने पर जातक को करियर के क्षेत्र में अपार सफलता की प्राप्ति होती है। साथ ही, दूसरे लोगों से सराहना मिलती है। अगर सूर्य देव की दृष्टि कुंडली के दसवें भाव पर होती है, तो ऐसा इंसान टीम का नेतृत्व, राजनीति और प्रशासन आदि क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करता है। 

आर्थिक जीवन पर सूर्य का प्रभाव: सूर्य ग्रह की शुभ स्थिति जातक को धन-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है। जब बात आती है धन की, तो सूर्य धन से जुड़े मामलों में आपके निर्णय और जोख़िम लेने को दर्शाते हैं। यह आपको धन प्रबंधन की अच्छी योजना बनाने के साथ-साथ कड़ी मेहनत करके धन कमाने के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रेम जीवन पर सूर्य का प्रभाव: सूर्य के कुंडली में मज़बूत होने पर जातक समझदार और भावुक होता है। साथ ही, यह निजी जीवन से लेकर पेशेवर जीवन में भी मान-सम्मान हासिल करते हैं। वहीं, सिंगल लोगों को सूर्य के शुभ होने से अच्छे पार्टनर का साथ मिलता है। 

कुंडली में कमज़ोर सूर्य होने पर परेशान करते हैं ये रोग 

जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अशुभ, पीड़ित या कमज़ोर होते हैं, उन्हें कई तरह के रोगों से जूझना पड़ सकता है जो कि इस प्रकार हैं:

आँखों से जुड़े रोग: सूर्य देव आँखों के भी कारक ग्रह हैं इसलिए कुंडली में इनकी कमज़ोर अवस्था आँखों से संबंधित रोगों को भी जन्म देती हैं। इसके परिणामस्वरूप, जातकों को आंखों में दर्द, मोतियाबिंद, आँखों में संक्रमण और धुंधली नज़र आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हृदय संबंधित समस्याएं: सूर्य को हृदय का कारक ग्रह माना जाता है। इनकी अशुभ अवस्था जातक को दिल से जुड़ी बीमारियां देने का काम कर सकती हैं जैसे कि उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा या दिल की धड़कन अनियमित होना आदि। ऐसे जातकों को दिल के रोगों का भय बना रहता है।

जीवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमज़ोर होना: जब कुंडली में सूर्य अशुभ या दुर्बल होता है, तब इसका प्रभाव जातक की रोग प्रतिरोधक क्षमता और जीवन शक्ति को कमज़ोर कर सकता है। ऐसा इंसान हमेशा थका हुआ महसूस करता है और इनकी ऊर्जा कम रहती है जिसकी वजह से वह ज्यादातर बीमार रहने लगता हैं। साथ ही, इम्युनिटी कमज़ोर होने से व्यक्ति इन्फेक्शन का आसानी से शिकार हो जाता है। 

रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोग: वैदिक ज्योतिष में सूर्य को हड्डियों और रीढ़ की हड्डी का कारक माना जाता है। ऐसे में, इनकी दुर्बल अवस्था आपको रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याएं डिस्क, पीठ दर्द या गलत तरीके से बैठने की समस्या दे सकती है क्योंकि यह हड्डियों को कमज़ोर कर सकता है। 

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सूर्य का कर्क राशि में गोचर: सरल और प्रभावी उपाय 

कुंडली में सूर्य महाराज को मज़बूत बनाने के लिए हर रोज़ सुबह उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसे में, तांबे के लोटे में जल लेकर सूर्य की तरफ मुख करके सूर्य मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य दें। ऐसा करने से आत्मविश्वास मज़बूत होता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

सूर्य का रत्न माणिक्य माना जाता है इसलिए सूर्य को बलवान करने के लिए सोने की अंगूठी में माणिक्य रत्न जड़वाकर ऊँगली में धारण करें। इस उपाय को करने से नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान मज़बूत होता है। हालांकि, माणिक्य रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी और विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अशुभ होता है, उनके लिए सूर्य मंत्रों का जाप करना फलदायी रहता है। सुबह सूर्य मंत्र का जाप करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है इसलिए आप “ॐ ह्रीं सूर्याय नमः” का 108 बार जाप करें।

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सूर्य का कर्क राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए सूर्य ग्रह आपकी कुंडली में पांचवें भाव के स्वामी हैं और वर्तमान…(विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य देव आपकी कुंडली में चौथे भाव के स्वामी हैं जो अब… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में तीसरे भाव के स्वामी हैं और अब यह…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य देव आपके धन भाव के स्वामी के रूप में आपके पहले भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य आपके लग्न या राशि के स्वामी हैं और वर्तमान में यह आपके…(विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में बारहवें भाव के स्वामी हैं जो अब आपके…(विस्तार से पढ़ें)

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तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए सूर्य आपके लाभेश होकर दसवें भाव में गोचर करने वाले हैं। सामान्य…(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए दसवें भाव के स्वामी होकर सूर्य आपके भाग्य भाव में जा रहे हैं। भाग्य… (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि वालों के लिए भाग्य भाव के स्वामी होकर सूर्य आपके आठवें भाव में गोचर करने…(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए सूर्य आपके अष्टमेश हैं जो अब आपके सातवें भाव में गोचर कर…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए सप्तमेश सूर्य आपके छठे भाव में गोचर करने वाले हैं। हालांकि, सातवें…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए सूर्य देव आपके छठे भाव के स्वामी होकर आपके पांचवें भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य का कर्क राशि में गोचर कब होगा?

सूर्य देव कर्क राशि में 16 जुलाई 2025 को प्रवेश करेंगे। 

2025 में सूर्य अस्त कब होंगे?

सूर्य नवग्रहों में से ऐसे एकमात्र ग्रह है जो कभी अस्त, उदय, मार्गी और वक्री नहीं होते हैं। 

कर्क राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की चौथी राशि कर्क के अधिपति देव हैं। 

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