मुफलिसी में छूटी पढ़ाई, दादा को बनाया गुरु, निर्मोही अखाड़े से कनेक्शन… कहानी धीरेंद्र शास्त्री की
धीरेंद्र की बचपन से ही इच्छा थी कि वो वृंदावन जाकर कर्मकांड की शिक्षा लें, अध्यात्म की पढ़ाई करें. लेकिन पिता के पास उतने पैसे थे नहीं कि बेटे की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें.
