मोक्षदा एकादशी 2025 पर इन नियमों का जरूर करें पालन, मोक्ष की होगी प्राप्ति!

मोक्षदा एकादशी 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ज्‍यादा महत्‍व है। साल में कुल 24 एकादशियां पड़ती हैं और इस तरह हर महीने में दो एकादशी आती हैं। सभी एकादशियों में मोक्षदा एकादशी का विशेष महत्‍व है क्‍योंकि इस दिन भगवान विष्‍णु की पूजा-अर्चना एवं व्रत करने से मोक्ष की प्राप्‍ति होती है।

हर साल मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली एकादशी को मोक्षदा एकादशी के रूप में जाना जाता है। मान्‍यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। ऐसे में, मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत करने और विधि-विधान से पूजा करने का अपना विशेष महत्व है।

तो आइए बिना देर किए अब आगे बढ़ते हैं और जानते हैं मोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व, प्रचलित पौराणिक कथा और आसान ज्योतिषीय उपाय के बारे में।

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मोक्षदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार मोक्षदा एकादशी 01 दिसंबर, 2025 को सोमवार के दिन पड़ रही है। एकादशी तिथि की शुरुआत 30 नवंबर, 2025 को रात्रि 09 बजकर 30 मिनट पर होगी और इसका समापन 01 दिसंबर, 2025 को शाम को 07 बजकर 02 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 01 दिसंबर, 2025 को किया जाएगा।

मोक्षदा एकादशी पारणा मुहूर्त: 02 दिसंबर, 2025 को सुबह 06 बजकर 56 मिनट से 09 बजकर 02 मिनट तक।

कुल अवधि: 2 घंटे 5 मिनट।

मोक्षदा एकादशी 2025 की पूजा विधि

मोक्षदा एकादशी 2025 पर आप निम्‍न विधि से भगवान विष्‍णु का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्‍त कर सकते हैं।

यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और फिर स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।

इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और वहां पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

अब भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें और व्रत व पूजा के नियमों का पालन करने की प्रतिज्ञा करें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि आपका व्रत सफल हो।

फिर विष्णु जी की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं और उन्‍हें पीले वस्त्र अर्पित करें। आप स्‍वयं भी इस दिन पीले रंग के वस्‍त्र धारण कर सकते हैं। पीला रंग विष्‍णु जी को अत्‍यंत प्रिय है।

भगवान विष्णु को चंदन, फूल, धूप, दीप, फल, और मिठाई अर्पित करने के बाद विष्णु भगवान की आरती करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी माता की पूजा करें। तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को अर्पित करें।

एकादशी पर तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और तुलसी माता की आरती करें।

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मोक्षदा एकादशी 2025 के नियम

अगर आप पूर्ण उपवास या निर्जल व्रत नहीं रख सकते, तो फलाहार कर सकते हैं।

मोक्षदा एकादशी पर रात्रि के समय जागरण करने का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु की कथा सुनें या श्रीमद् भगवद गीता का पाठ करें।

अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करने से पहले जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। तभी व्रत पूर्ण माना जाता है।

अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें। इससे व्रत का पुण्य फल और अधिक बढ़ता है।

इस व्रत का पारण अगले दिन द्वादश तिथि पर होता है। उस दिन मुहूर्त देखकर व्रत पारण करें।

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सूर्योदय के बाद करें पारण

एकादशी के व्रत के समापन को पारण कहा जाता है। एकादशी के अगले दिन यानी द्वादश तिथि पर सूर्योदय के पश्‍चात् व्रत का पारण करने का विधान है।

द्वादश तिथि के खत्‍म होने से पहले ही व्रत का पारण कर लेना चाहिए लेकिन अगर द्वादश तिथि सूर्योदय से पहले खत्‍म हो गई है, तो इस स्थिति में व्रत का पारण सूर्योदय के बाद होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए। यह द्वादश तिथि की पहली एक चौथाई वाली अवधि होती है। व्रत के पारण के लिए प्रात: काल का समय सबसे अधिक उपयुक्‍त रहता है। यदि कोई व्‍यक्‍ति इस समय व्रत का पारण नहीं कर सकता है, तो फिर मध्‍याह्न के बाद ही पारण करना चाहिए।

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मोक्षदा एकादशी की कथा

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में गोकुल नाम का एक नगर था, जहां वैखानस नामक एक धर्मनिष्ठ राजा रहते थे। राजा वैखानस अपनी प्रजा का अत्यंत ध्यान रखते थे और न्यायप्रिय, धर्मपरायण एवं परोपकारी थे। उन्‍हें अपनी प्रजा से अत्‍यंत प्रेम था और उनके राज्य में लोग सुखी और संतुष्ट थे। राजा स्वयं भी धार्मिक कार्यों में लिप्‍त रहते थे और वेदों में गहरी आस्था रखते थे।

एक दिन राजा वैखानस ने एक बुरा सपना देखा। सपने में उन्होंने अपने पिता को नरक में अत्यधिक कष्ट सहते हुए देखा। यह दृश्य देखकर राजा बहुत दुखी और व्याकुल हो उठे। राजा ने अपने दरबार के सभी विद्वान पंडितों और ज्योतिषियों को बुलाया और स्वप्न के बारे में बताया एवं इस विषय पर उनसे राय मांगी।

राजा ने सभी से पूछा कि उनके पिता नरक में क्यों कष्ट भोग रहे हैं और इस समस्या का समाधान क्‍या है। लेकिन उस समय किसी भी विद्वान के पास इस प्रश्न का सटीक उत्तर नहीं था। तब मंत्रियों ने राजा को सुझाव देते हुए बताया कि वे पर्वत मुनि के आश्रम जाकर उनसे सहायता मांगे। वहां पर उन्‍हें अपने प्रश्‍नों का उत्तर जरूर मिल जाएगा।

मंत्रियों की सलाह पर राजा पर्वत मुनि के आश्रम पहुंचे और उनसे अपने सपने के बारे में कहा। पर्वत मुनि ने राजा को बताया कि ‘राजन! आपके पिता पूर्व जन्म के पापों के कारण नरक में कष्ट भोग रहे हैं। लेकिन उनके उद्धार और मोक्ष के लिए आप एक उपाय कर सकते हैं।

पर्वत मुनि ने कहा, “तुम मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता है, उस दिन विधिपूर्वक व्रत एवं पूजन करो। इस व्रत से तुम्हारे पिता को नरक से मुक्ति मिल जाएगी और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।” राजा वैखानस ने पर्वत मुनि के निर्देशानुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से उनके पिता को नरक से मुक्ति मिली और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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मोक्षदा एकादशी 2025 पर क्‍या किया जाता है

मोक्षदा एकादशी भगवान विष्‍णु को समर्पित है इसलिए इस दिन विष्‍णु जी और पवित्र ग्रंथ ‘भगवद् गीता’ की पूजा होती है। हिंदू धर्म में माना जाता है कि इस व्रत को रखने से भगवान विष्‍णु अपने भक्‍तों को जीवन और मृत्‍यु के चक्र से मुक्‍त कर देते हैं।

मोक्षदा एकादशी 2025 एकता और अपने पूर्वजों के से क्षमा मांगने का प्रतीक है ताकि परलोक में उन्‍हें शांति मिल सके। इस दिन लोग उपवार रखते हैं और पवित्र ग्रंथ पढ़ते हैं।

मोक्षदा एकादशी 2025 के दिन करें ये खास उपाय

एकादशी तिथि पर भगवान विष्‍णु के मंत्रों का तुलसी की माला से जाप करें। केसर युक्‍त दूध से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से जीवन में आने वाली सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। 

एकादशी के दिन केले के पेड़ की पूजा करें। इस दिन केले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है इसलिए इस दिन केले के पेड़ का पूजन महत्वपूर्ण माना गया है। यदि किसी भी जातक की कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर है, तो उसे एकादशी के दिन केले के पेड़ का पूजन करना चाहिए। इससे गुरु देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन पीली वस्तुओं का दान जरूर करें। ब्राह्मण को पीले रंग के वस्त्र और पीले रंग के फल व मिठाई दान करें। ऐसा करने से जातक की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी के दिन गाय को हरा चारा खिलाने से व्यक्ति को अपने व्यापार और नौकरी में मुनाफा होता है।

नदी या तालाब में आटे की गोलियां बनाकर मछलियों और पानी में रहने वाले जीवों को खिलाएं। इससे भी करियर में तरक्‍की मिलती है।

मोक्षदा एकादशी 2025 पर पान का एक साफ पत्ता लें और उसमें केसर से ‘श्रीं’ लिखें और इस पान के पत्तों को श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु के चरणों में चढ़ा दें। अगले दिन इसे धन वाले स्थान यानी तिजोरी या अलमारी में रख दें। ऐसा करने से पैसों की तंगी दूर होती है और यदि आप किसी कर्ज व लोन से परेशान हैं तो आपको उससे भी छुटकारा मिलेगा।

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अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

1. मोक्षदा एकादशी 2025 कब है?

उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 01 दिसंबर, 2025 को किया जाएगा।

2. मोक्षदा एकादशी पर किसका पूजन किया जाता है?

भगवान विष्‍णु का पूजन करने का विधान है।

3. मोक्षदा एकादशी पर व्रत रखने से क्‍या होता है?

मोक्ष की प्राप्‍ति होती है।

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