योगिनी एकादशी 2022: इस दिन बन रहा है सुकर्मा योग, जानें लाभ।

हिन्दू धर्म में योगिनी एकादशी का बहुत महत्व है क्योंकि यह दिन श्री नारायण अर्थात भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन का व्रत करने से पीपल के वृक्ष काटने जैसे महापाप से मुक्ति मिल जाती है तथा जीवन में मौजूद सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी श्राप से पीड़ित है तो वह इस ख़ास दिन पर व्रत करके उस श्राप से मुक्ति पा सकता है क्योंकि यह एकादशी देह की समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रूप, गुण और यश प्रदान करती है।

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योगिनी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इसका व्रत करने वाले मनुष्य का जीवन आनंदमय होता है और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही 88 हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। 

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योगिनी एकदशी 2022: तिथि, समय व व्रत पारण मुहूर्त

दिनांक: 24 जून, 2022

दिन: शुक्रवार

हिंदी महीना: आषाढ़

पक्ष: कृष्ण

तिथि: एकादशी

एकादशी तिथि आरंभ: 23 जून, 2022 की रात 09 बजकर 43 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त: 24 जून, 2022 की रात 11 बजकर 14 मिनट तक

योगिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 25 जून, 2022 की सुबह 05 बजकर 43 मिनट से 08 बजकर 12 मिनट तक

अवधि: 02 घंटे 48 मिनट

हरि वासर समाप्त होने का समय: 25 जून, 2022 की सुबह 05 बजकर 43 मिनट पर

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योगिनी एकादशी व्रत कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अलकापुरी नगर में राजा कुबेर के घर में एक माली रहता था, जिसका नाम हेम था। उसका काम प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के लिए मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन अपनी पत्नी के साथ स्वछंद विहार करने के कारण फूल लाने में उसे देरी हो गई। इस पर राजा कुबेर को बहुत ज़्यादा गुस्सा आया और उन्होंने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। श्रापित माली कष्ट के कारण इधर-उधर भटकने लगा।

एक दिन दैवयोग से वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम तक पहुँच गया। वहां ऋषि ने अपने योग बल से उसके दुःख का कारण का पता लगाया और कहा कि यदि तुम योगिनी एकादशी का व्रत विधिविधान के साथ कर लो, तो तुम्हें इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। हेम माली ने मार्कण्डेय ऋषि की आज्ञा का पालन करते हुए सच्चे मन से योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उसका कोढ़ ख़त्म हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में योगिनी एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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योगिनी एकादशी व्रत पूजन विधि 

योगिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें।इसके बाद नहा-धोकर पीले रंग के कपड़े पहनें और विधिवत व्रत करने का संकल्प लें।फिर पूजा की चौकी पर एक आसान बनाएं और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।भगवान विष्णु का जल से अभिषेक करें और उन्हें पीले रंग के फूल, फल, हल्दी, तुलसी दल, अक्षत, पीले वस्त्र, धूप, दीप, पंचामृत आदि अर्पित करें।इसके बाद विष्णु चालीस या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।आख़िरी में भगवान विष्णु की आरती करें और फलाहारी व्रत करें।पूजा ख़त्म करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।अगले दिन यानी कि द्वादशी तिथि को पुनः भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद पारण मुहूर्त के दौरान कुछ खाकर व्रत खोलें।

व्रत वाले दिन न करें ये काम

एक दिन पहले यानी कि दशमी तिथि की रात में जौ, गेहूं और मूंग की दाल का सेवन न करें।व्रत वाले दिन नमक न खाएं।इस दिन प्याज़, लहसुन जैसा तामसिक भोजन एकदम वर्जित होते हैं।गुस्सा न करें।ईर्ष्या न करें।किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें।मन में किसी भी प्रकार का द्वेष नहीं होना चाहिए।

योगिनी एकादशी के दिन हो रहा है सुकर्मा योग का निर्माण

वैदिक ज्योतिष में सुकर्मा योग को सबसे अधिक शुभ बताया गया है। कहा जाता है कि इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। विशेष रूप से यह योग नौकरी बदलने तथा मांगलिक कार्य हेतु शुभ माना जाता है।

सुकर्मा योग आरंभ: 24 जून, 2022 की सुबह 04 बजकर 51 मिनट से

सुकर्मा योग समाप्त: 25 जून, 2022 की सुबह 04 बजकर 12 मिनट तक

विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए योगिनी एकादशी के दिन करें ये उपाय

यदि आपकी कुंडली में ग्रह दशा अनुकूल नहीं है और इसके कारण आपको काफ़ी नुकसान हो रहा है तो योगिनी एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।यदि आपके जीवन में आर्थिक समस्याएं आ रही हैं या आप धन संचय करने में असमर्थ हैं तो योगिनी एकादशी के दिन पूजा करते समय भगवान विष्णु को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा चढ़ाएं। फिर अगले दिन उन मुद्राओं के साथ थोड़े चावल लेकर अपने घर की तिजोरी में रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं।पापों से मुक्ति पाने के लिए योगिनी एकादशी के दिन सुबह उठकर अपने शरीर पर तिल का लेप लगाएं और नहाने के पानी में आंवले का रस मिलाकर स्नान करें। फिर दक्षिणावर्ती शंख में केसर युक्त दूध या गंगाजल डालकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें।घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने के लिए योगिनी एकादशी के दिन एक बांसुरी को अच्छी तरह से सजाकर, भगवान कृष्ण को अर्पित करें और साथ ही भगवान को पीली सरसों चढ़ाएं। इसके बाद वहां से सरसों के कुछ दाने लेकर पीले रंग के कपड़े में लपेटकर अपने घर की तिजोरी में रख दें।पितरों की शांति के लिए योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु या  भगवान कृष्ण के समक्ष बैठकर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।यदि आप कर्ज़ से परेशान हैं तो योगिनी एकादशी के दिन एक लोटे में जल भरकर, उसमें चीनी या बताशा मिलाएं और उसे किसी पीपल के वृक्ष पर अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के नीचे घी का एक दीपक जलाएं।

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