शत्रुहंता एवं विपरीत राजयोग का निर्माण, इन 3 राशियों को बनाएगा शक्तिशाली!

एस्ट्रोसेज के इस लेख में हम आपको शत्रुहंता और विपरीत राजयोग के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे जिसका निर्माण हाल ही में हुए मंगल के कन्या राशि में प्रवेश के साथ हो गया है। यह योग 18 सितंबर 2023 तक कन्या राशि में बना रहेगा। आइए बिना देर किये शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की और जानते हैं कि यह योग किन-किन राशियों को प्रभावित करेगा। 

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क्या आपने कभी शत्रुहंता योग के बारे में सुना है? निश्चित रूप से हम यह कह सकते हैं कि आप विपरीत राजयोग के बारे में अच्छे से जानते होंगे क्योंकि अक्सर एस्ट्रोसेज के लेखों में हमने इसका जिक्र किया है। लेकिन, शत्रुहंता योग आपके लिए एक नया पहलू है। इस ब्लॉग में हम इन दोनों योगों के निर्माण के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे, इन योगों का लाभ सबसे ज्यादा किन राशियों को मिलेगा। 

क्या है शत्रुहंता योग? 

अगर शत्रुहंता योग के बारे में बात करें तो, शत्रुहंता दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें शत्रु का अर्थ दुश्मन से है और हंता का मतलब शत्रु का नाश करने वाले से है। जैसे कि हम जानते हैं कि ज्योतिष में कुंडली का छठा भाव शत्रु का होता है और इस भाव में मंगल एवं शनि जैसे पापी ग्रहों की स्थिति या दृष्टि होने से शत्रुहंता योग का निर्माण होता है। यहां पर शत्रुओं से हमारा मतलब मनुष्य रूप शत्रुओं से नहीं है बल्कि कर्ज़ (जिससे चुकाने में आप असमर्थ रहें), ऋण, धन से जुड़ी समस्याएं, क़ानूनी परेशानियां आदि से हैं। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शत्रुहंता योग बनता है, तो ऐसे जातक के हमेशा शत्रु होंगे, लेकिन वह उन्हें परास्त करते हुए उन पर विजय हासिल करने में सक्षम होंगे।

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कुंडली में कब बनता है विपरीत राजयोग?

इसके विपरीत, कुंडली में विपरीत राजयोग का निर्माण उस समय होता है जब छठे भाव का स्वामी आठवें या बारहवें भाव में जाता है। सामान्यतौर पर, छठे भाव में बैठे मंगल क़ानूनी मुक़दमे, कर्ज़ और शत्रुओं आदि का नाश करते हैं। वहीं, जिन जातकों के छठे भाव के स्वामी आठवें या बारहवें  भाव में मौजूद होते हैं, उन्हें भावनात्मक रूप से कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है या फिर वह किसी बाधाओं में फंस सकते हैं। 

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हालांकि, विपरीत राजयोग इस बात को सुनिश्चित करता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है, तो उन जातकों को लाभ प्राप्त होने से पहले अपने जीवन में अनेक समस्याओं या नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन, अगर छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी एक साथ एक भाव में विराजमान होते हैं, तो विपरीत राजयोग को अत्यंत प्रबल माना जाता है।

शत्रुहंता और विपरीत राजयोग के प्रभाव

कुंडली में बनने वाले शत्रुहंता और विपरीत राजयोग, इन दोनों ही योगों के अपने-अपने और विशिष्ट प्रभाव है। यह दोनों ही योग जातक को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्रदान करते हैं।

शत्रुहंता और विपरीत राजयोग किसी व्यक्ति को कड़ी मेहनत करने और समस्याओं को पार करने की अपार क्षमता प्रदान करते हैं। कुंडली में बन रहे दोनों ही योग जातक को जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का सामना करते हुए उन पर जीत हासिल करने की शक्ति और दृढ़ता देते हैं। इन योगों से मिलने वाले कुछ विशेष लाभों की बात करें तो, जातकों को राजनीति, खेल, व्यवसाय, मीडिया, अभिनय, लेखन आदि में सफलता की प्राप्ति होती है।यह योग अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता का भी आशीर्वाद देते हैं। इसके अलावा, जिन जातकों की कुंडली में यह दोनों योग बनते हैं, उन्हें दूसरे लोगों से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। ऐसे जातक अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। साथ ही, उन्हें पाने की राह में समस्याओं के आने के बावजूद भी अपने कदम पीछे नहीं खींचते हैं।यह जातक जिस भी क्षेत्र का चुनाव करते हैं उसमें दृढ़ता और समर्पण के साथ आगे बढ़ते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं। 

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मंगल के कन्या में प्रवेश से बना शत्रुहंता एवं विपरीत राजयोग: इन 3 राशियों को होगा अपार लाभ

मेष राशि 

मेष राशि के जातकों के लिए मंगल आपके पहले/लग्न भाव और आठवें भाव के स्वामी हैं। मंगल महाराज कन्या राशि में प्रवेश करके आपके छठे भाव में विराजमान हैं और ऐसे में, मंगल की यह स्थिति मज़बूत विपरीत राजयोग का निर्माण कर रही है। छठे भाव में मंगल की स्थिति को अच्छा कहा जाएगा जो कि मेष राशि वालों को शत्रुओं पर जीत हासिल करने के मौके प्रदान करेगी। यदि कोई कानूनी विवाद चल रहा है, तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है।

छठे भाव में बैठे मंगल वकीलों और जजों के लिए विशेष रूप से फलदायी साबित होंगे क्योंकि इनकी यह स्थिति आपके करियर और पेशेवर जीवन का समर्थन करेगी। इस अवधि में यह जातक मुश्किल हालातों में भी कोई बड़ा केस जीतने में सफल रहेंगे। इनके जीवन में आने वाला यह कठिन समय विपरीत राजयोग को सक्रिय करेगा जो कि इन्हें करियर के क्षेत्र में नाम, प्रसिद्धि, सम्मान और वाहवाही पाने में सहायता करेगा और ऐसे में, सामाजिक रूप से इनकी प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी।

कर्क राशि 

मंगल को शक्तिशाली ग्रह के रूप में जाना जाता है जो कि साहस और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल की दृष्टि छठे भाव पर होने से भी शत्रुहंता योग का निर्माण होता है। कर्क राशि वालों के लिए मंगल आपके पांचवें और दसवें भाव के स्वामी हैं जो कन्या राशि में गोचर करके आपके तीसरे भाव में स्थित है। आपको बता दें कि तीसरे भाव में मौजूद मंगल की दृष्टि छठे भाव पर पड़ रही है। इसके परिणामस्वरूप, कर्क राशि के जातकों का आमना-सामना अपने शत्रुओं से हो सकता है जहाँ यह उन्हें परास्त करने में सक्षम होंगे।

हालांकि, आपको ध्यान रखना होगा कि कर्क राशि वालों के कई शत्रु बनेंगे, लेकिन यह अपने साहस, वीरता और आत्मविश्वास के दम पर उनको हराने में सफलता प्राप्त कर सकेंगे क्योंकि इस अवधि में तीसरे भाव में बैठा मंगल आपको इन पर जीत प्रदान करेगा। शत्रुहंता योग की मज़बूती इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति की कुंडली में मंगल कितना बलवान है। साथ ही, अन्य पहलू  भी देखे जाते हैं।

तुला राशि 

तुला राशि वालों के लिए मंगल आपके दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं जो कि कन्या राशि में बारहवें भाव में स्थित है। ऐसे में, दूसरे भाव के स्वामी के रूप में बारहवें भाव में मंगल की मौजूदगी आपके खर्चों में बढ़ोतरी करवाने का काम करेगी और इन खर्चों को पूरा कर पाना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। वहीं, सातवें भाव के स्वामी के रूप में बारहवें भाव में मंगल के बैठे होने से आपको छोटी-मोटी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन मंगल की छठे भाव पर दृष्टि शत्रुहंता योग को जन्म देगी। तुला राशि के जातकों को यह योग शत्रुओं से लड़ने की क्षमता प्रदान करेगा।

यह योग आपके पेशेवर जीवन को ऊंचाइयों पर लेकर जाएगा क्योंकि आपके पास अपने प्रतिद्वंदियों को हराने और हर कदम पर दुश्मनों से जूझने के बाद भी सफलता प्राप्त करने की अपार शक्ति होगी। ऐसे में, हम कह सकते हैं कि मंगल का यह गोचर इन जातकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

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शत्रुहंता योग और विपरीत राजयोग के दौरान करें ये अचूक उपाय

प्रत्येक मंगलवार और बृहस्पतिवार हनुमान चालीसा का पाठ करें।हर मंगलवार बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं। गुस्से को नियंत्रित करने के लिए ध्यान का अभ्यास करें। लाल फूल वाले पेड़ या पौधे लगाएं। “ॐ भौं भौमाय नमः” मंत्र का जाप करें। मंगल ग्रह को मज़बूत करने के लिए लाल रंग के वस्त्र, तांबे के बर्तन, गुड़, मसूर की दाल और बताशे आदि का दान करना भी फलदायी साबित होगा। 

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