शत्रु राशि मिथुन में मंगल का गोचर शनि के साथ बनाएगा षडाष्टक योग, जानें प्रभाव!

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मंगल ग्रह हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि यह बेहद प्रभावशाली ग्रह होता है। कुंडली में मंगल दोष होने के कारण मनुष्य के विवाह में कई बाधाएं आने लगती हैं। 16 अक्टूबर, 2022 को मंगल अपनी शत्रु राशि मिथुन में गोचर करने जा रहा है। ऐसे में जातकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? साथ ही देश-दुनिया में इसका क्या असर देखने को मिलेगा? यह जानने के लिए पढ़ें वैदिक ज्योतिष पर आधारित एस्ट्रोसेज का यह विशेष ब्लॉग, जो हमारे विद्वान ज्योतिषी द्वारा मंगल ग्रह की चाल और स्थिति का विश्लेषण कर तैयार किया गया है।

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मंगल के मिथुन में गोचर का प्रभाव

मिथुन जातकों पर असर  चूंकि मंगल 16 अक्टूबर को अपने शत्रु ग्रह मिथुन की राशि में अपना गोचर करेंगे, जिसके चलते ये गोचर कई जातकों के स्वभाव में आक्रामकता लेकर आएगा। साथ ही मिथुन राशि के जातकों पर इस गोचर का प्रभाव उनके दांपत्य जीवन में कुछ उथल-पुथल मचा सकता है। क्योंकि इस दौरान आपका साथी से क्रोध के कारण विवाद संभव है। इसके अलावा मिथुन के राशि चक्र की तीसरी राशि होने के कारण, मंगल के 16 अक्टूबर को गोचर करते ही मिथुन जातकों का अपने भाई-बहनों से बहस व नोकझोंक होने की आशंका है। साथ ही मिथुन में मंगल का गोचर आपके मानसिक तनाव में भी वृद्धि लेकर आएगा। ऐसे में अपनी ऊर्जा को व्यर्थ न करते हुए उन्हें सही दिशा में लगाना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। 

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मंगल-शनि का षडाष्टक योगमिथुन राशि में मंगल ग्रह के गोचर से मकर राशि में उपस्थित शनि और मंगल के बीच “षडाष्टक योग” का निर्माण होगा। वैदिक ज्योतिष की मानें तो, जब दो ग्रहों के बीच की दूरी का संबंध एक दूसरे से छठे व आठवें (6-8) घर की दूरी पर हो तो इस स्थिति में उन दोनों ग्रहों के बीच षडाष्टक योग बनता है। ऐसे में 16 अक्टूबर को मंगल जब मिथुन राशि में अपना गोचर करेंगे तो शनि मकर राशि में होंगे। इस तरह से मंगल से शनि की स्थिति आठवे घर में और शनि से मंगल की स्थिति छठे घर में होने से षडाष्टक योग बनेगा। शनि और मंगल ग्रह दोनों पाप ग्रह की श्रेणी में आते हैं। इसलिए शनि-मंगल द्वारा षडाष्टक योग का बनना ज्यादातर लोगों में तामसिक गुणों को बढ़ाने वाला है। आशंका है कि इस योग के कारण ही दुनियाभर के कुछ हिस्सों में जनता किसी लंबी व गंभीर बीमारी से परेशान रहेगी। साथ ही भारत की जनता में भी मानसिक तनाव की वृद्धि देखी जा सकती है।शनि निर्माण कार्य के कारण होते हैं, जबकि मंगल ऊर्जा के, इसलिए इन दोनों ग्रहों के बीच इस योग के बनने से देशभर की कई महत्वपूर्ण योजनाएं बीच में ही रुक सकती है। सूर्य-बुध-शुक्र पर होगी मंगल की चतुर्थ दृष्टिचूंकि बुध के साथ पहले ही सूर्य और शुक्र कन्या राशि में उपस्थित है और अब 16 अक्टूबर को मंगल देव का भी वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में गोचर होगा। ऐसे में मिथुन में गोचर करते ही उनकी चतुर्थ दृष्टि कन्या राशि में उपस्थित त्रिग्रहों सूर्य-बुध-शुक्र पर पड़ेगी।इसलिए मंगल की इस दृष्टि से छात्र, प्रेमी व सरकारी नौकरी से जुड़े जातक सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हैं।  

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मंगल गोचर का शेयर बाज़ार पर प्रभाव तांबा, सोना, लोहा व अन्य धातुएं, ऊर्जा, मशीनरी, गुड़, धनिया, हल्दी, गन्ना, किशमिश, लौंग, सुपारी, किराना, लाल मिर्च, शराब, मसूर तथा गेहूं मंगल ग्रह के द्वारा ही नियंत्रित होते हैं। ऐसे में मंगल ग्रह जो पाप ग्रह है उनके मिथुन राशि जो एक सौम्य राशि है, उसमें गोचर करने से शुरुआत में तो शेयर बाज़ार में सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।परंतु बाद में मंदी का दौर आने से तेजड़ियों और मंदरियों को शुरुआत में ही इसका लाभ उठाने की सलाह दी जाती है। मंगल का देश पर प्रभावभारत की कुंडली कर्क राशि की है, ऐसे में मंगल के मिथुन में गोचर करने से देश की कुंडली अनुसार मंगल द्वादश भाव में प्रवेश करेंगे। इसके परिणामस्वरूप देश की राजनीति में काफी हलचल देखने को मिलेगी। संभावना है कि कोई बड़ा नेता संन्यास लेने की घोषणा कर दें। मंगल का ये गोचर दूसरे देशों के साथ भारत की कोई डील या समझौता करवाएगा।देश की जनता खुलकर ख़र्चा करते देखे जाएंगे।      

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