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शनि की राशि में मंगल के प्रवेश से, इन 4 राशियों को फूंक-फूंककर रखना होगा कदम!

मंगल का कुंभ राशि में गोचर: जानें 12 राशियों पर प्रभाव!

मंगल का कुंभ राशि में गोचर: एस्ट्रोसेज एआई आपके पाठकों के लिए “मंगल का कुंभ राशि में गोचर” का यह विशेष ब्लॉग लेकर आया है जिसके माध्यम से आपको मंगल गोचर से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि और समय आदि। वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को अहम स्थान दिया है जिन्हें ग्रहों के सेनापति, युद्ध के देवता और लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है। 

इसी क्रम में, अब यह जल्द ही अपनी राशि में परिवर्तन करते हुए कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। हालांकि, हम सभी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि मंगल ग्रह की चाल, दशा, स्थिति या राशि में होने वाला हर बदलाव संसार के साथ-साथ राशियों को प्रभावित करने में सक्षम होता है। ऐसे में, हमारा यह ब्लॉग आपको “मंगल का कुंभ राशि में गोचर” के बारे में विस्तार से बताने जा रहा है। 

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एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग में आप मंगल गोचर का मनुष्य जीवन समेत सभी राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जान सकेंगे। अगर आपकी कुंडली में मंगल दुर्बल हैं, तो आप कैसे इस गोचर के नकारात्मक प्रभाव से स्वयं को बचा सकते हैं? कुंडली में मंगल की शुभ-अशुभ स्थिति आपके जीवन को कैसे प्रभावित करती है? जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर इनका प्रभाव आदि के बारे में आपको जानकारी प्रदान करेंगे। बता दें कि मंगल का कुंभ राशि में गोचर का यह ब्लॉग ख़ासतौर पर हमारे अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषियों द्वारा मंगल ग्रह और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तैयार किया गया है ताकि आप मंगल गोचर के दौरान मंगल ग्रह से शुभ परिणाम प्राप्त कर सकें। तो चलिए बिना देर किए शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की और जानते हैं सबसे पहले मंगल गोचर का समय। 

मंगल का कुंभ राशि में गोचर: तिथि और समय 

बात करें मंगल ग्रह की, तो ज्योतिष की दुनिया में मंगल देव साहस और सेना के कारक माने गए हैं जो अपना राशि परिवर्तन लगभग हर 45 दिनों में करते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो मंगल ग्रह एक राशि में करीब 45 दिन तक विराजमान होते हैं और फिर अगली राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी क्रम में, मंगल देव अब 23 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 33 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। बता दें कि कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं और इनके साथ मंगल ग्रह तटस्थ संबंध रखते हैं। ऐसे में, मंगल के कुंभ राशि में प्रवेश से परिणाम मिलेजुले रह सकते हैं। हालांकि, इस राशि परिवर्तनं का आप पर कैसा असर होगा, यह पूरी तरह से कुंडली में मंगल की स्थिति पर निर्भर करता है। 

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कुंभ राशि में मंगल का प्रभाव 

  • कुंभ राशि में मंगल देव की मौजूदगी से जातक को अपने काम करने के तरीके से प्रगति मिलती है और उसकी सोच सबसे अलग होती है। 
  • यह लोग अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि समाज के हित से जुड़े विचारों, नए प्रयोगों और उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं। 
  • ऐसे जातक अपनी ऊर्जा का उपयोग नए आइडियाज, सामाजिक सुधार और मानवता से जुड़े कार्यों में लगाते हैं। 
  • मंगल की उपस्थिति कुंभ राशि में होने से जातक भावनाओं से ऊपर तर्क और समझदारी को महत्व देता है। साथ ही, अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए ज्यादातर साहसी और नए रास्ते अपनाते हैं।
  • मंगल के प्रभाव से ऐसे जातकों की सोच स्वतंत्र, विद्रोही और पुरानी परंपराओं या मान्यताओं को चुनौती देने वाली होती है। 
  • दूसरी तरफ, मंगल कुंभ राशि में बैठकर व्यक्ति को कभी-कभी अनिश्चितता, भावनात्मक रूप से दूरी बनाए रखने वाला या अपनी बात पर अडिग रहने वाला बना सकते हैं। 
  • कुंभ राशि में मंगल के तहत जन्मे जातकों में किसी के साथ विवाद होने की स्थिति में भावनाओं की कमी, अचानक गुस्सा या फिर जल्दबाज़ी में फैसले लेने की प्रवृत्ति भी देखने को मिल सकती है। षत 

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ज्योतिषीय दृष्टि से मंगल ग्रह 

वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को साहस, व्यक्ति की ऊर्जा, कार्य शुरू करने की क्षमता, साहस और महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना गया है। 

इन्हें ज्योतिष की दुनिया में कुंज या लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है। यह इस बात को दर्शाते हैं है कि हम अपने आत्मविश्वास को कैसे व्यक्त करते हैं, जीवन की समस्याओं का सामना किस तरह करते हैं और अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कितनी मजबूती से आगे बढ़ते हैं। 

  • शायद ही आप जानते होंगे कि मंगल दृढ़ निश्चय,  शारीरिक शक्ति, सही समय पर ठोस निर्णय लेने और अनुशासन का भी प्रतिनिधित्व करता है। 
  • अगर किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल देव शुभ स्थिति में होते हैं, तो वह व्यक्ति को मज़बूत नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, सफलता प्राप्त करने की प्रबल इच्छा और प्रतिस्पर्धी सोच का आशीर्वाद देते हैं। 
  • मंगल के शुभ प्रभाव से ऐसे लोग अक्सर रक्षा क्षेत्र, खेल, इंजीनियरिंग, सर्जरी, रियल एस्टेट या अन्य व्यवसाय से जुड़े क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करते हैं।
  • इसके विपरीत, अगर मंगल महाराज कमज़ोर या दुर्बल अवस्था में होता है, तो व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध, अधीरता और आक्रामकता बढ़ सकती है।
  • साथ ही, व्यक्ति को दुर्बल मंगल के कारण जल्दबाज़ी में निर्णय लेना, दुर्घटनाएँ, झगड़े और कानूनी परेशानियाँ आदि का सामना करना पड़ सकता है।
  • मंगल ग्रह की नकारात्मक स्थिति की वजह से कुंडली में मांगलिक दोष भी जन्म लेता है। 
  • कुंडली में मंगल दोष जैसा अशुभ दोष जातक के विवाह, दांपत्य जीवन, रिश्तों और वैवाहिक स्थिरता को प्रभावित करता है। 
  • बात करें मंगल के महत्व की, तो राशि चक्र में यह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी हैं।
  • किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल महाराज की की स्थिति, उनकी दृष्टि और अन्य ग्रहों के साथ युति दर्शाती है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं, कामुक ऊर्जा, सहनशक्ति और आंतरिक शक्ति का उपयोग किस प्रकार करता है।
  • आध्यात्मिक दृष्टि से मंगल देव अच्छे कर्म, आत्म-अनुशासन, रचनात्मकता और आक्रामक प्रवृत्तियों को छोड़ने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

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धार्मिक दृष्टि से मंगल का महत्व 

मंगल ग्रह को धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना गया है। बता दें कि सप्ताह में मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित होता है। इस दिन को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बहुत से लोग यह नहीं जानते होंगे कि मंगलवार का नाम ही ‘मंगल’ ग्रह के नाम पर रखा गया है और इस दिन हनुमान जी की उपासना से भी मंगल देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा गया है, इसलिए इन्हें भौम पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव के पसीने की बूंद से मंगल देव की उत्पत्ति हुई थी जिसके पश्चात उन्हें आकाश में देवता के रूप में स्थापित किया गया।

चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं कुंडली के भिन्न-भिन्न भावों पर मंगल ग्रह का प्रभाव जानते हैं।

मंगल ग्रह का अलग-अलग भावों पर प्रभाव 

मंगल की स्थिति जातकों के जीवन को कैसे प्रभावित करती है, इसके बारे में जानने के बाद आपको अवगत करवाते हैं केंद्र भावों यानी कि पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव पर मंगल ग्रह का प्रभाव। 

प्रथम भाव

जिन जातकों के लग्न भाव में मंगल ग्रह विराजमान होते हैं, उन्हें अपने जीवन में पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मंगल की प्रबल ऊर्जा व्यक्ति को आक्रामक और चिड़चिड़ा बनाने का काम करती है।

चौथा भाव 

ऐसे जातक जिनकी कुंडली के चौथे भाव पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है, उन्हें अपने जीवन में पर्याप्त मात्रा में धन-धान्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, समाज में लोकप्रियता और मान-सम्मान भी मिलता है।

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सातवां भाव: 

यदि मंगल देव आपके सातवें भाव में उपस्थित होते हैं, तो जातकों को रिश्तों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पाता है या फिर उसे जीवनसाथी की तलाश में कठिनाइयों से दो-चार होना पड़ता है।

दसवां भाव

कुंडली के दसवें भाव में मंगल महाराज के बैठे होने से जातक अपने कार्य के प्रति अत्यधिक समर्पित और जुनूनी हो सकता है। साथ ही, यह स्थिति सेना, राजनीति और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी सफलता दिलाने में सहायक होती है। 

अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि कुंडली में कमज़ोर मंगल होने पर कैसे संकेत देता है।

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कुंडली में अशुभ मंगल के संकेत 

  • कुंडली में मंगल ग्रह के कमज़ोर स्थिति में होने की वजह से जातक की भावनाओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में, जातक तनाव का शिकार हो सकता है।
  • यदि आपका मंगल कुंडली में पीड़ित होता है या ख़राब होता है, तो यह जातक को आंखों से जुड़े रोग, ब्लड प्रेशर, फोड़े-फुंसी और पथरी जैसे रोग देने का काम कर सकते हैं। 
  • जिन जातकों का मंगल अशुभ या दुर्बल अवस्था में होता है, उनके जीवन में धीरे-धीरे धन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा, जातक ज़मीन-जायदाद से जुड़े विवादों में भी फंस सकता है।
  • मंगल महाराज के कुंडली में नकारात्मक स्थिति में होने के कारण जातक अपने जीवन में स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहने लगता है जैसे कि उस पर थकान हावी होने लगती है। साथ ही, उसका मन किसी भी काम में नहीं लगता है और पाचन से जुड़े रोग भी घेरने लगते हैं। 
  • मंगल ग्रह कुंडली में अशुभ या दुर्बल स्थिति में होने की वजह से जातक के विवाह में देरी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में, शादी की बात पक्की होते-होते अचानक से बिगड़ जाती है या फिर शादी-विवाह के मार्ग में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

मंगल का कुंभ राशि में गोचर: सरल एवं प्रभावी उपाय 

मंगल ग्रह के लिए मंत्र जाप: कुंडली में मंगल देव को मज़बूत करने के लिए मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप करना शुभ होता है। आप मंगलवार के दिन “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का चंदन की माला से 108 बार जाप करें। इस उपाय को करने से मंगल ग्रह की ऊर्जा संतुलित रहती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। 

मंगलवार व्रत करें: मंगल महाराज से शुभ परिणाम पाने के लिए मंगलवार का व्रत करें। संभव हो, तो इस दौरान नमक का सेवन करने से बचें और फलाहार करें। इसके अलावा, नियमित रूप से हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें, फिर सूर्यास्त के बाद भोजन का  सेवन करें। 

लाल रंग वस्तुओं का दान: मंगल ग्रह से शुभ परिणामों की प्राप्ति के लिए मंगलवार के दिन लाल रंग की वस्तुओं जैसे लाल वस्त्र, मसूर की दाल, लाल चंदन, गुड़ और तांबे के बर्तन आदि का दान करें। इन उपायों को करने से मंगल देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मंगल का कुंभ राशि में गोचर कब होगा?

मंगल देव 23 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं। 

2. कुंभ राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की ग्यारहवीं राशि कुंभ के स्वामी शनि देव हैं। 

3. क्या मंगल और शनि एक-दूसरे के शत्रु हैं?

ज्योतिष के अनुसार, मंगल और शनि ग्रह एक-दूसरे से तटस्थ संबंध रखते हैं।  

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