शनि कुंभ राशि में अस्त: सभी राशियों के जीवन में आएंगे अहम बदलाव!

वैदिक ज्योतिष में शनि का प्रभाव काफी अहम माना जाता है। शनि देव को आयु, दुःख, रोग, पीड़ा, लोहा और जल जैसी चीजों का कारक माना जाता है। इसके साथ ही शनि देव को कर्म प्रभावी भी कहा जाता है क्योंकि यह हमेशा मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। इन्हें मकर और कुंभ राशि का स्वामित्व प्राप्त है। इसके अलावा तुला इनकी उच्च और मेष इनकी नीच राशि मानी जाती है। शनि का गोचर किसी भी राशि में लगभग ढाई साल का होता है, जिसे ढैय्या के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि शनि देव को ज्यादातर लोग क्रूर समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जातकों की कुंडली में पीड़ित स्थिति होने के कारण शनि देव नकारात्मक प्रभाव देते हैं। जिन जातकों की कुंडली में यह मजबूत स्थिति में मौजूद होते हैं, उन्हें भाग्य का पूरा साथ मिलता है और उन्हें अच्छे धन की प्राप्ति भी होती है।

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ज्योतिष में शनि का महत्व

शनि के कई सारे लाभकारी प्रभाव हैं। उनका शासन छठे, आठवें, दसवें और बारहवें भाव पर होता है। इनकी गति काफी धीमी होती है और यह ढाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। शनि देव पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पर भी शासन करते हैं। इनकी मित्रता देव गुरु बृहस्पति और शुक्र देव के साथ होती है। वहीं सूर्य और चंद्रमा शनि के शत्रु ग्रह माने गए हैं। सप्ताह का दिन शनिवार, शनि देव को ही समर्पित है और उनका पसंदीदा रंग काला है। तो आइए अब शनि के अस्त होने की तिथि और समय के बारे में जान लेते हैं।

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कुंभ राशि में शनि अस्त: तिथि और समय

शनि 30 जनवरी, 2023 को 12 बजकर 02 मिनट पर कुंभ राशि में अस्त हो जाएंगे। कुंभ राशि के ग्यारहवें भाव पर शनि देव का ही शासन है। तो जाहिर है, कुंभ राशि पर इसका अहम प्रभाव पड़ेगा। 

शनि का हमारे जीवन पर प्रभाव

शनि देव नियम, लीडरशिप, महत्वाकांक्षा, नेतृत्व और विनम्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके प्रभाव से जातकों के जीवन में कई सारे अहम बदलाव आते हैं, यह बदलाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह के हो सकते हैं। कुंडली में शनि देव की अनुकूल स्थिति से जातकों को कई फायदे होते हैं और उन्हें भाग्य का पूरा साथ मिलता है। वहीं अगर यह आपकी कुंडली में पीड़ित अवस्था में मौजूद हों, तो आपको जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि शनि एक उदार ग्रह हैं, जो मनुष्यों को समर्पण की शिक्षा देते हैं। 

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कुंडली में शनि देव की कमजोर स्थिति के प्रभावस्वरूप, जातकों को जीवन में विवादों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही वे स्वार्थी स्वभाव के हो सकते हैं, जिसके कारण उन्हें जीवन में कई कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर कहें तो शनि देव जितनी भी महान चीजों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे सभी चीजें जातकों से दूर हो जाती हैं और यह सब होता है शनि की पीड़ित अवस्था के कारण।

ग्रह शनि के बारे में वैज्ञानिक तथ्य

सौर मंडल में शनि दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है, जिसके आस-पास की रिंग काफी खूबसूरत दिखती है। यह रिंग बर्फ और पत्थरों से निर्मित होती है। इस ग्रह के अंदर हीलियम और हाइड्रोजन गैस भारी मात्रा में पाई जाती है। इसके साथ ही शनि के पास कुल 82 चंद्रमा हैं, जिनमें से 52 की पहचान हो चुकी है तथा अन्य बाकियों की खोज अभी भी जारी है।

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शनि कुंभ राशि में अस्त: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय

मेष

मेष राशि के जातकों के लिए शनि आपके दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं जो अब अपनी ही राशि में आय, धन लाभ…(विस्तार से पढ़ें)

वृषभ

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि नौवें और दसवें भाव के स्वामी हैं जो अब स्वयं की राशि के दसवें भाव में अस्त होने…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आठवें और नौवें भाव के स्वामी हैं और अब यह अपनी ही राशि के नौवें भाव…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क

कर्क राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके सातवें और आठवें भाव के स्वामी हैं और अब यह आपके दीर्घायु…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह

सिंह राशि के जातकों के लिए शनि आपके छठे और सातवें भाव के स्वामी हैं जो अब सातवें भाव यानी कि जीवनसाथी…(विस्तार से पढ़ें)

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कन्या

कन्या राशि वालों के लिए शनि देव आपके पांचवें और छठे भाव के स्वामी हैं और यह आपके छठे भाव में अस्त हो रहे…(विस्तार से पढ़ें)

तुला

तुला राशि के जातकों के लिए शनि एक योगकारक ग्रह है जिन्हें चौथे और पांचवें भाव का स्वामित्व प्राप्त है और…(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि आपके चौथे और तीसरे भाव के स्वामी हैं जो अब आपके चौथे भाव …(विस्तार से पढ़ें)

धनु

धनु राशि वालों के लिए शनि महाराज आपके दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी हैं और अब यह आपके तीसरे भाव में अस्त…(विस्तार से पढ़ें)

मकर

मकर राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके लग्न और दूसरे भाव के स्वामी हैं जो अब परिवार, बचत, वाणी के…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ

कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि महाराज आपके लग्न और बारहवें भाव के स्वामी हैं और अब ये आपके लग्न भाव में…(विस्तार से पढ़ें)

मीन

मीन राशि के जातकों के लिए शनि ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी है और अब ये आपके बारहवें भाव में अस्त हो…(विस्तार से पढ़ें)

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