शनि गोचर 2023: 30 साल बाद शनि करेंगे घर वापसी- जानें शनि के कुंभ में गोचर का प्रभाव!

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को वात्श्लेष्मिक प्रकृति का मंद गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। वह कृष्ण वर्ण और वायु तत्व के हैं और पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। शनि देव सप्तम भाव में दिग्बली अवस्था में होते हैं। तुला राशि में अपनी उच्च अवस्था में और मेष राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं। वृषभ और तुला शनि की स्वराशि होती हैं। शनि कर्मफल दाता और न्यायप्रिय ग्रह माने जाते हैं। शनि के द्वारा आयु, शारीरिक बल, विपत्तियां, प्रभुता, मोक्ष, ख्याति, उदारता, ऐश्वर्य, योगाभ्यास, नौकरी, दासता और मूर्छा आदि रोगों का विचार भी किया जाता है।‌

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शनि व्यक्ति को जुझारू बनाता है और जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में हो, वह व्यक्ति किसी भी परेशानी से कभी भी घबराता नहीं है। ऐसे लोगों के अंदर गजब का आत्मविश्वास पाया जाता है। वे अनुशासित होकर जीवन व्यतीत करते हैं। कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आ जाएं, वे कभी भी आशा की उम्मीद नहीं छोड़ते और इसी वजह से वे अपने कठिनतम समय को भी आसानी से गुजार लेने में सक्षम बन जाते हैं और शनि देव उन्हें तब आकर कुंदन बना देते हैं। शनि एक ऐसे न्यायाधीश हैं जो किसी से भी किसी तरह की घूस या रिश्वत बर्दाश्त नहीं करते बल्कि व्यक्ति जैसे कर्म करता है, उसको उसी के अनुसार अच्छे और बुरे फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि उन्हें न्याय दाता या न्यायाधीश की संज्ञा दी गई है। शनिदेव प्रजातंत्र के कारक ग्रह हैं। किसी राजा के लिए प्रजा सबसे महत्वपूर्ण होती है और प्रजा का प्रतिनिधित्व शनिदेव करते हैं। आपके घर के नौकर, आप के अधीन काम करने वाले लोग, गरीब तबके के लोग आदि सभी शनिदेव के आधिपत्य में आते हैं। यदि ऐसे लोग आपसे प्रसन्न हैं तो मान कर चलिए की शनिदेव की कृपा आप पर बरसेगी। 

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शनि व्यक्ति को रंक से राजा बना देते है लेकिन शनि कभी भी जल्दी-जल्दी काम नहीं करते अपितु मंद: मंद: चलति इति शनैश्चरा: के अनुसार शनि देव मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यही कारण है कि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष का समय व्यतीत करके ढाई वर्ष के बाद दूसरी राशि बदलते हैं और इस प्रकार पूरे राशि चक्र यानी कि 12 राशियों का एक चक्कर पूरा करने में शनि देव को लगभग 30 वर्ष का समय लग जाता है। 

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शनि ग्रह सबसे लंबी अवधि का गोचर काल रखते हैं और इसलिए किसी भी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह से बदल देने का पूर्ण सामर्थ्य रखते हैं। शनि एक कर्म प्रधान ग्रह हैं इसलिए व्यक्ति के कर्मों का फल शनि देव निर्धारित करते हैं। शनिदेव रातों-रात किसी की किस्मत नहीं बदलते अपितु व्यक्ति को तपा-तपा कर कुंदन बनाते हैं और फिर उसको तराशते हैं। शनि से प्रभावित व्यक्ति अपनी 34 वर्ष की आयु के उपरांत धीरे-धीरे उन्नति करते हैं। शनि द्वारा दी गई उन्नति पक्की होती है और यह व्यक्ति के जीवन में स्थायित्व प्रदान करते हैं।

शनि का कुंभ राशि में गोचर 2023: तिथि और समय 

वर्तमान समय में शनि देव अपनी राशि मकर में भ्रमण कर रहे हैं और इसी से निकलकर कुंभ राशि में लगभग 30 वर्ष के बाद उनकी घर वापसी होगी। कुंभ राशि में शनि का गोचर मंगलवार के दिन, 17 जनवरी 2023 को सायंकाल 5:04 बजे होगा। यह शनिदेव का अपनी राशि में गोचर है और कुंभ राशि प्रबल राशि होने के कारण और शनि के लिए मूल त्रिकोण राशि होने के कारण शनि ग्रह का कुंभ राशि में गोचर करना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह गोचर देश और दुनिया में व्यापक प्रभाव लेकर आने वाला है।

शनि की साढ़ेसाती: किसकी जीत किसकी हार

आज के समय में शनि की साढ़ेसाती है एक ऐसा शब्द है, जिसे लगभग हर व्यक्ति जानता है और जाने-अनजाने में उससे भयभीत रहता है, जबकि शनि आपको परेशान नहीं करते हैं अपितु आपके कर्मों का निर्धारण करते हैं और उसी के अनुसार सुख और दुःख प्रदान करते हैं। शनि को काल भी कहा जाता है। यही कारण है कि शनि की साढ़ेसाती के समय में व्यक्ति को काल के समान कष्ट भी मिल सकते हैं। यदि उसके कर्म अच्छे हैं तो उसे अच्छे परिणाम भी मिलेंगे। शनि, जैसा कि पहले बताया है, लगभग ढाई वर्ष में एक राशि बदलते हैं। इस एक गोचर की अवधि को ढैय्या या शनि की ढैय्या कहा जाता है। 

जब व्यक्ति की चंद्र राशि से द्वादश भाव में शनि का प्रवेश होता है तो व्यक्ति की साढ़ेसाती का प्रथम चरण शुरू हो जाता है। उसके बाद जैसे ही शनि व्यक्ति की चंद्र राशि के ऊपर गोचर करते हैं, साढ़ेसाती का दूसरा चरण शुरू होता है और जैसे ही शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव की राशि में प्रवेश करते हैं, साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम चरण शुरू हो जाता है। इसके बाद चंद्र राशि से दूसरे भाव से निकल जाने के बाद ही व्यक्ति को साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार चंद्र राशि के सापेक्ष शनि का अलग-अलग तीन भावों में गोचर, जो ढाई-ढाई वर्ष की अलग-अलग अवधि में होता है, साढ़े सात वर्ष के कुल मान का हो जाता है, जिसे हम साढ़ेसाती के नाम से जानते हैं।

वर्ष 2023 में शनि ग्रह की चाल बदलने से और उनका कुंभ राशि में गोचर होने से जहां एक तरफ धनु राशि के जातकों को साढ़ेसाती से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी तो वहीं मकर राशि वालों की साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होगा जिसे उतरती हुई साढ़ेसाती कहते हैं। कुंभ राशि में शनि का गोचर कुंभ राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा और मध्यम चरण लेकर आएगा तो मीन राशि वालों के लिए यह साढ़ेसाती का प्रथम चरण होगा जिसे चढ़ती हुई साढ़ेसाती कहा जाता है।

शनि की ढैय्या: किसकी पनौती किसकी प्रगति

एक भाव में शनि ढाई वर्ष तक स्थित रहकर ढैय्या का निर्माण करते हैं। ढैय्या किसी व्यक्ति का वह समय है, जब व्यक्ति की चंद्र राशि से शनि देव का गोचर चतुर्थ अथवा अष्टम भाव में होता है। इसे शनि की पनौती भी कहा जाता है और अष्टम भाव में शनि को कंटक शनि की संज्ञा भी दी गई है। वर्ष 2023 में 17 जनवरी को जब शनि राशि परिवर्तन करके कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तो मिथुन राशि और तुला राशि के जातकों को ढैय्या से मुक्ति मिलेगी तथा कर्क राशि के लोगों के लिए कंटक शनि और वृश्चिक राशि के लोगों के लिए ढैय्या अथवा पनौती का समय शुरू होगा।

शनि का कुंभ राशि में गोचर: जानिए आप पर प्रभाव

शनि ग्रह का गोचर बहुत ज्यादा प्रभावशाली होता है। जिस समय शनि का गोचर होता है, उस समय चंद्र आदि ग्रहों की स्थिति को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि शनि जिस समय गोचर कर रहे हैं, उस समय पर शनि का पाया अथवा शनि पाद कौन सा है। इसके आधार पर व्यक्ति को शनि के गोचर फल का प्रभाव भी पता चल जाता है। 

यदि जिस दौरान शनि देव किसी राशि प्रवेश कर रहे हों, उस समय चंद्रमा पहले, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो यह स्वर्ण पाद कहलाता है। दूसरे, पांचवें और नौवें भाव में होने से रजत पाद, तीसरे, सातवें और दसवें भाव में होने से ताम्र पाद और चौथे, आठवें और बारहवें स्थान में होने से शनि का पाया लौह पाद माना जाता है।

सोने का पाया होने से व्यक्ति को संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना होता है क्योंकि यह एक अशुभ पाया माना जाता है। यह बेवजह की कलह अधिक होने और मानसिक तनाव की बढ़ोतरी का समय होता है। 

रजत अथवा चांदी का पाया होने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को धन लाभ होता है। उसकी पद और प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। जीवन में पदोन्नति, भूमि, भवन, मकान और वाहन आदि की प्राप्ति के योग बनते हैं। 

ताम्र अथवा तांबे का पाया शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे व्यक्ति के कार्य में उसके व्यवसाय अथवा नौकरी में लाभ और उन्नति होने लगती है। उसके रसूखदार लोगों से संपर्क स्थापित होते हैं। सभी प्रकार के सुख जैसे सवारी की प्राप्ति, उच्च विद्या की प्राप्ति, विवाह होना, पारिवारिक सुखों की बढ़ोतरी और सुख सुविधाओं के योग बनते हैं और व्यक्ति को विदेश यात्रा का सुख भी मिलता है। 

लोहे अथवा लौह पाद को अशुभ माना जाता है। इसके कारण मानसिक तनाव, स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं, उलझनें, आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं तथा दुर्घटना आदि होने के योग बनते हैं। जातक के कार्यों में विघ्न पड़ते हैं और खर्चों में अधिकता होती है।

17 जनवरी 2023 को जब शनि का कुंभ राशि में गोचर होगा, उस समय चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे। इसके अनुसार विभिन्न राशियों के लिए शनि का पाया और उसका प्रभाव इस प्रकार होगा:

मिथुन राशि, वृश्चिक राशि और मकर राशि के जातकों के लिए शनि का स्वर्ण पाया होगा। इस कारण से यह मध्यम रूप से फलदायक रहेगा। पारिवारिक और व्यावसायिक उलझनों की बढ़ोतरी हो सकती है। शत्रुओं का भय होगा और मानसिक तनाव की बढ़ोतरी के योग बन सकते हैं।

कर्क राशि, तुला राशि और मीन राशियों के लिए शनि का पाया रजत (चांदी) का होगा इसलिए इसके शुभ परिणाम मिलने के योग ज्यादा होंगे। इससे व्यक्ति को मेहनत के अनुपात में अच्छे परिणाम मिलेंगे। सुख संसाधनों में बढ़ोतरी होगी। समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान की प्राप्ति होगी। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में उन्नति के योग बनेंगे। भूमि, भवन, मकान और वाहन प्राप्ति के योग बनेंगे तथा आकस्मिक धन लाभ भी हो सकता है।

वृषभ राशि, कन्या राशि और कुंभ राशि के लिए शनि ताम्र पाद से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए यह आपके लिए शुभ समय हो सकता है। आपको आपके कार्य और व्यवसाय में अच्छी सफलता के योग बनेंगे। लंबी यात्राओं के योग बनेंगे जिनमें आपको सुख और शांति तथा उन्नति की प्राप्ति होगी। पारिवारिक और निजी जीवन में खुशियों की बरसात होगी। नया वाहन खरीदने के योग बन सकते हैं तथा समाज के उच्च और महत्वपूर्ण लोगों से आपके संपर्क बनेंगे, जो आपके जीवन में लाभकारी साबित होंगे।

मेष राशि, सिंह राशि और धनु राशियों के लिए शनि लौह पाद से कुंभ राशि में गोचर करेंगे जिसके कारण यह अशुभ हो सकते हैं। इससे पारिवारिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भी गिरावट आने की संभावना बन सकती है। विभिन्न प्रकार की उलझनें, कलह, क्लेश और तनाव बढ़ सकते हैं। किसी प्रकार की दुर्घटना या चोट लगने का भय तथा व्यवसाय में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस दौरान आपको अपने खर्चों पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि वह बेतहाशा बढ़ सकते हैं।

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30 साल बाद शनि की घर वापसी का क्या होगा देश और दुनिया पर असर?

शनि एक बहुत मजबूत ग्रह हैं और वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है इसलिए शनि का गोचर भी अपने आप में विशेषता रखता है। आखिर 30 साल बाद शनि की घर वापसी हो रही है। शनि महाराज अपनी राशि कुंभ में लौट रहे हैं। यह एक विशेष समय है। कुंभ एक वायु प्रधान राशि है और शनि वात के कारक हैं। जब शनि का गोचर कुंभ राशि में होगा, उस समय देव गुरु बृहस्पति शनि से अगले भाव में मीन राशि में अपनी ही राशि में स्थित होंगे और राहु का गोचर मेष राशि में तथा मंगल का गोचर वृषभ राशि में होगा। शनि से पीछे मकर राशि में सूर्य और शुक्र स्थित होंगे। 

निश्चित तौर पर शनि का यह गोचर देश और दुनिया पर विशेष रूप से प्रभाव डालने वाला गोचर साबित होगा। आइए ज्योतिष के आईने में देखते हैं कि वे कौन से मुख्य प्रभाव हैं जो हमें शनि के इस गोचर के बाद देखने को मिल सकते हैं:-

शनि के गोचर के प्रभाव से विभिन्न स्थानों पर सर्दी बढ़ने की आशंका रहेगी और शीतलहर चलेगी। शनि के प्रभाव से वायु की तीव्रता कम होगी लेकिन वायु ठंडी हो जाएगी जिससे भूमंडलीय परिवर्तन होंगे।यदि स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार देखें तो शनि का गोचर चंद्र राशि से अष्टम भाव में और लग्न भाव से दशम भाव में होने वाला है। यह समय मजबूत न्यायिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है।देश में न्यायपालिका के प्रभाव में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और शनि के प्रभाव से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर बड़े महत्वपूर्ण निर्णय सामने आएंगे जिनका दूरगामी और दीर्घावधि प्रभाव पड़ेगा।इस दौरान सरकार भी कुछ महत्वपूर्ण कानून बना सकती है जिनमें अल्पसंख्यक और निर्धन वर्ग के लिए कोई विशेष योजना भी शामिल हो सकती है।भारत के पश्चिमी राज्यों में ठंड का प्रकोप बढ़ सकता है और वातावरण में नमी बढ़ने के योग बनेंगे।शनि के इस गोचर से नौकरीपेशा लोगों को आशा की किरण नजर आएगी और मंदी की चपेट में आ रहे समय से बाहर निकलने में मदद मिलेगी तथा सेवा प्रदाता कंपनियों को लाभ मिलेगा।शनि के गोचर के प्रभाव से खाद्यान्नों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।आलू, शकरकंद और ऐसे सभी खाद्य पदार्थ, जो जमीन के अंदर से निकलते हैं, वे भरपूर मात्रा में उत्पादित होंगे जिससे उनके दामों में कमी देखने को मिलेगी।भारत देश-विदेशों से कम दामों पर कच्चा तेल और गैस खरीदने में कामयाब रहेगा जिससे देश में इन वस्तुओं में कोई कमी नहीं होगी।शनि के प्रभाव से सत्ताधारी दल को जनता का समर्थन मिलेगा।विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों में शनि के प्रभाव से उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे।भारत के विदेशी व्यापार में प्रगति होगी और कुछ नए देशों से मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे।शनि के गोचर के प्रभाव से गृह स्तर पर आंतरिक संघर्षों को बढ़ने से रोकना सरकार के लिए चुनौती बनेगा।किसी विपक्षी बड़े नेता के लिए यह समय कष्टकारी साबित हो सकता है।शनि के गोचर के प्रभाव से भारत की सीमाओं पर बढ़ते तनाव को भारत मजबूती से संभाल पाएगा।यदि शनि के गोचर का विश्वव्यापी प्रभाव देखा जाए तो पश्चिमी देश एकजुट होने का प्रयास करते नजर आएंगे।नाटो देश एकजुट होने का प्रयास करेंगे और रूस के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।एशिया और प्रशांत के बीच अच्छी साझेदारी के योग बनेंगे।विश्व स्तर पर एल्युमिनियम और लोहे की वस्तुओं में पहले तेजी और फिर मंदी के योग बनेंगे।शनि के कुंभ राशि में प्रवेश के बाद हवा से फैलने वाली बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।वर्तमान समय में चल रहे कोरोना के प्रकोप से बचना एक कठिन कार्य होगा और इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।एक नियमबद्ध और पक्के तरीके से सतत प्रयासों और विभिन्न देशों की सरकारों के संयुक्त प्रयासों से कोरोना वायरस से जीत हासिल करने में सफलता मिलेगी।प्रवासी मजदूरों के मामलों में विशेष कानून देखने को मिल सकते हैं।विभिन्न बड़े देश वर्क परमिट वीजा में बढ़ोतरी कर सकते हैं।नौकरी के सिलसिले में एक देश से दूसरे देश लेबर का आना-जाना सुगम होगा और उनके अधिकारों में बढ़ोतरी हो सकती है। उनके अधिकारों की मांग भी उठेगी।

शनि ग्रह के शुभ प्रभाव प्राप्त करने के अचूक उपाय

यदि आप भी शनि की साढ़ेसाती अथवा शनि की ढैया से प्रभावित हैं या आपकी कुंडली में शनि के अशुभ परिणाम मिल रहे हैं अथवा शनि का गोचर आपके लिए अशुभ फलदायी साबित होने जा रहा है तो आपको कुछ विशेष अचूक उपाय करने चाहिए जिनसे आपको शनिदेव के अच्छे प्रभावों में वृद्धि देखने को मिलेगी और अपने जीवन पर शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से काफी हद तक कमी महसूस होने लगेगी। शनि ग्रह के ये अचूक उपाय निम्नलिखित हैं:-

आपको शनिवार के दिन भीगे हुए साबुत उड़द पक्षियों को डालने चाहिए।11 या 21 कच्चे नारियल अपने सिर से वार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देने से भी आपको मानसिक तनाव से और शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।शनि देव के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः का जाप करना चाहिए।शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना भी लाभदायक रहेगा।शनिवार के दिन किसी काले धागे में बिच्छू जड़ी या धतूरे की जड़ को अपनी दाहिनी बाजू अथवा गले में धारण करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।रुई की एक बत्ती में लोबान लगाकर सरसों के तेल का दीपक शनिवार को सायंकाल में पीपल वृक्ष के नीचे जलाएं।शनिदेव के किसी भी स्तोत्र का मन लगाकर पाठ करें।

हम आशा करते हैं कि यह आर्टिकल आपको शनि से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा और आवश्यक उपाय करने से आपको अपने जीवन में शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।

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