शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में अवश्य शामिल करें उनका यह प्रिय भोग

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली हैं। कहा जाता है मां ब्रह्मचारिणी संसार में ऊर्जा का प्रवाह करती हैं। ऐसे में मां की पूजा करने से व्यक्ति को आंतरिक शांति प्राप्त होती है। 

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन से संबंधित इस खास ब्लॉग में हम जानेंगे दूसरे दिन की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है? इस दिन माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है ऐसे में मां का स्वरूप क्या है? मां की पूजा का महत्व क्या होता है? मां का प्रिया भोग क्या है? इस दिन आप कौन से रंग के वस्त्र पहन कर पूजा करें तो आपको शुभ फल प्राप्त होंगे? साथ ही राशि अनुसार उपाय की जानकारी भी हम आपके यहां देने वाले हैं। तो इन सभी बातों को जानने के लिए यह लेख अंत तक अवश्य पढ़ें। 

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शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन – पूजा: शुभ मुहूर्त और सही विधि  

मां ब्रह्मचारिणी की सही पूजन विधि:

नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है इस दिन भी सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें। पूजा के लिए साफ आसान बिछाएँ और इस पर बैठकर मां की पूजा प्रारंभ करें। पूजा में माँ को फल-फूल, अक्षत, रोली, चंदन, आदि अर्पित करें। इसके अलावा मां ब्रह्मचारिणी को भोग के रूप में पंचामृत अवश्य चढ़ाएं और साथ ही मिठाई का भोग भी अवश्य लगाएँ। माता को पान, सुपारी, लौंग, अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 

देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें और अंत में मां की आरती कहें।  

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शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन – माँ का स्वरूप

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, सबसे पहले बात करें मां के स्वरूप की तो मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और तप की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूरी आस्था के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें धैर्य की प्राप्ति होती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है। 

मां के नाम को देखें तो इसमें ब्रह्मा का मतलब होता है तपस्या और चारणी का मतलब होता है आचरण करने वाली। ऐसे में ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जाप करने की माला है और बाएं हाथ में उन्होने कमंडल धारण किया हुआ है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व 

कहा जाता है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से भगवान शिव की प्रसन्नता भी हासिल होती है। इसके अलावा व्यक्ति को यह नियम के बंधन से मुक्ति मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को आदि और व्याधि रोगों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। इसके अलावा मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी ने अपने तप के माध्यम से हजारों राक्षसों का अंत किया। तप करने की माता ब्रह्मचारिणी में असीम शक्ति होती है। ऐसे में मां की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में ज्ञान की वृद्धि होती है और समस्याओं का अंत होता है। जिस घर में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है उस घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होने लगता है। साथ ही ऐसे जातकों के जीवन में संयम, बल, आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप अर्थात ब्रह्मचारिणी स्वरूप दिव्य और अलौकिक प्रकाश लेकर आता है।

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शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन – प्रिय भोग  

इसके बाद बात करें मां के प्रिय भोग की तो आप नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर अर्थात चीनी या पंचामृत का भोग अवश्य लगाएँ। यह दोनों ही चीज़ें मां ब्रह्मचारिणी को बेहद ही प्रिय होती हैं। ऐसे में जो भी भक्त इस दिन मां की विधिपूर्वक पूजा करता है और मां को शक्कर या पंचामृत का भोग लगाते हैं उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में बरगद का फूल भी अवश्य शामिल करें। यह भी माँ को बेहद प्रिय होता है।

शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन – शुभ रंग  

नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं मां ब्रह्मचारी को सफेद रंग के वस्त्र बेहद प्रिय होते हैं। हालांकि अगर आप स्वयं अपने लिए वस्त्र का रंग चुनना चाहते हैं तो इस दिन की पूजा में गुलाबी या सफेद रंग का चयन कर सकते हैं।  

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शारदीय नवरात्रि दूसरा दिन – राशि अनुसार उपाय

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त करने के लिए आप राशि अनुसार कुछ बेहद ही सरल उपाय अपना सकते हैं। इन्हें करने से आपको मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होगा। क्या कुछ हैं ये उपाय चलिए जान लेते हैं:  

इस दिन मेष राशि के जातक पूजा में सफेद रंग के फूल अवश्य शामिल करें। वृषभ राशि के जातक मां ब्रह्मचारिणी के समक्ष घी का दीपक अवश्य जलाएं। मिथुन राशि के जातक देवी मां को सुगंध अवश्य अर्पित करें। कर्क राशि के जातक इस दिन की पूजा में शुद्ध जल अवश्य शामिल करें। सिंह राशि के जातक दूसरे दिन की पूजा में हल्दी अवश्य शामिल करें। कन्या राशि के जातक शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां को बताशों का भोग अवश्य लगाएँ।तुला राशि के जातक मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग की मिठाई अवश्य खिलाएं।वृश्चिक राशि के जातक इस दिन की पूजा में शुद्ध जल अवश्य अर्पित करें। धनु राशि के जातक मां दुर्गा को पीले रंग के फूल अवश्य अर्पित करें। मकर राशि के जातक इस दिन की पूजा में शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाएं। कुंभ राशि के जातक देवी को सुगंध अवश्य अर्पित करें। मीन राशि के जातक शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा में ताज़े पीले रंग के फूल अवश्य शामिल करें। 

इसके अलावा नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के साथ-साथ ग्रहों में चंद्रमा को भी समर्पित होता है। ऐसे में आप चाहें तो माँ को चांदी की कोई वस्तु समर्पित कर सकते हैं। अगर आप विद्या के क्षेत्र से जुड़े हैं या इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो दूसरे दिन की पूजा में मां ब्रह्मचारिणी के साथ मां सरस्वती की पूजा अवश्य करें। इससे आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।

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मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

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