शुक्रवार व्रत या संतोषी मां का व्रत शुरू करने के इच्छुक लोगों को ये बातें ज़रूर पता होनी चाहिए।

हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों यानी वारों का अपना अलग-अलग महत्व होता है। सभी दिनों में किसी न किसी देवी-देवता की पूजा अर्चना करने का अपना विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार इन्हीं सातों दिनों में से शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और माता संतोषी को समर्पित किया गया है। मां संतोषी अपने भक्तों को बहुत प्रेम और स्नेह प्रदान करती हैं। उन्हें सुख, समृद्धि, सौभाग्य और धन धान्य से परिपूर्ण रखती हैं। 

ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक शुक्रवार के दिन निष्ठा भावना से मां संतोषी का व्रत एवं पूजन अर्चन करता है, मां संतोषी उनकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करती हैं। आइए, आज हम आपको मां संतोषी के व्रत यानी शुक्रवार के व्रत से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं। 

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संतोषी माता का व्रत कौन से महीने से शुरू करना चाहिए?

हिन्दू धर्म के नियमों के अनुसार मां संतोषी यानी की शुक्रवार का व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से प्रारंभ करना उचित रहता है। ऐसे में जो भी भक्त इस दिन से लगातार 16 शुक्रवार तक व्रत करता है, उसे मां संतोषी सुख और सौभाग्य की प्राप्ति हेतु आशीर्वाद देती हैं। परंतु व्यक्ति को हर हाल में इस बात का ख्याल रखें कि पितृपक्ष के दौरान किसी भी नए व्रत की शुरुआत नहीं की जाती। इसलिए इस दिन व्रत का आरंभ करने से भी बचना चाहिए। । 

शुक्रवार का व्रत कब से शुरू करें 2022?

वैदिक ज्योतिष अनुसार हर मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखे जाने का विधान है। जब ये त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है तो उसे ही शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। पंचांग अनुसार वैशाख माह में पड़ने वाला प्रदोष व्रत शुक्र प्रदोष व्रत होगा, जो 13 मई 2022, शुक्रवार को है। ऐसे में इस दिन प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में लोग शुक्रवार के व्रत की शुरुआत कर सकते हैं। 

बता दें कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 13 मई, शुक्रवार को शाम 05 बजकर 30 मिनट से होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 मई शनिवार को दोपहर 03 बजकर 25 मिनट पर होने वाला है। इसलिए यदि आप शुक्रवार का व्रत शुरू करना चाहते हैं तो इस तिथि से आप इस व्रत का शुभारंभ करते हुए मां संतोषी की पूजा-आराधना नियमनुसार कर सकते हैं। 

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शुक्रवार व्रत में क्या खाना चाहिए

मां संतोषी के व्रत के दौरान भूलकर भी खट्टे फल और सब्जी इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के दिन सिर्फ एक बार शाम के समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। बेहतर रहेगा यदि आप व्रत के दौरान चना, हलवा, फल, दूध और गुड़ का ही सेवन करें। ऐसी मान्यता है कि अगर आप 16 शुक्रवार तक निष्ठा भावना और विधि विधान के साथ माता संतोषी की पूजा-अर्चना एवं व्रत करते हैं तो आपकी समस्त मनोकामनाएं निश्चित रूप से पूर्ण होती हैं।  

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शुक्रवार के व्रत के नियम

कभी भी शुक्रवार के दिन मांसाहारी एवं तामसिक भोजन का सेवन न करें। व्रत वाले दिन खासतौर से किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, झगड़े से दूर रहें। अगर आप मां संतोषी की पूजा करते हैं तो भूल कर भी किसी नारी का अपमान न करें। अन्यथा ऐसा करने से माता संतोषी कुपित हो सकती हैं। व्रत के दिन संध्या पूजा के बाद दान करना उचित रहता है।  

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मां संतोषी को कौन सा फूल पसंद है ? 

ऐसा माना जाता है कि मां संतोषी कमल के फूल पर अपना आसन ग्रहण करती हैं। वैसे भी माता संतोषी को मां दुर्गा के सर्वाधिक शांत एवं कोमल स्वरूपों में से एक माना जाता है। अतः मां संतोषी की पूजा कमल के फूल से करनी चाहिए। 

संतोषी मां का व्रत करने से क्या फल मिलता है?

सनातन धर्म अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति निष्ठा भावना से मां संतोषी का व्रत करता है तो, उसके लंबे समय से फंसे हुए कार्य निश्चित ही पूर्ण हो जाते हैं। व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति होती है।ऐसा माना जाता है कि मां संतोषी का व्रत करने से अविवाहित कन्या को सुयोग्य एवं सुशील वर की प्राप्ति होती है। वहीं न्यायालय संबंधित मामलों में भी सफलता प्राप्त होती है।विवाहित जातकों के जीवन में पुनः प्रेम और अनुकूलता आती है। 

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संतोषी माता व्रत और पूजन विधि

शुक्रवार व्रत की पूजा करने से पूर्व एक पात्र में जल भरें। फिर उस जल भरे पात्र के ऊपर एक कटोरी रखें और उस कटोरी में गुड़ और भुने हुए चने रखें। अब मां की प्रतिमा या चित्र के समक्ष एक दीपक जलाएं। अब मां संतोषी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। ध्यान रहें कथा सुनते या पढ़ते समय अपने हाथों में गुड़ और भुने हुए कुछ चने ज़रूर रखें। साथ ही दीपक के आगे या जल के पात्र को सामने रखकर ही कथा प्रारंभ करें और कथा पूरी होने पर संतोषी मां की आरती करें। आरती के पश्चात मां को प्रसाद का भोग लगाएं और फिर उस प्रसाद को बाटें। व्रत के नियम अनुसार मां संतोषी के व्रत के अनुष्ठानों का पालन करते समय पहली प्रार्थना मां संतोषी के पिता भगवान श्री गणेश और फिर माता रिद्धि-सिद्धि के लिए करनी चाहिए। क्योंकि इसके बाद ही की गई मां संतोषी की आराधना फलदायी सिद्ध होगी। इस दिन व्रती को पूरे दिन व्रत का पालन करते हुए भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए।  ये नियम लगातार 16 शुक्रवार तक जारी रखते हुए व्रत करना चाहिए। शुक्रवार को व्रत के दौरान आप फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। परंतु भोजन में या शुक्रवार के दिन घर पर किसी भी प्रकार के खट्टी खाद्य सामग्रियों का उपयोग करने से बचें। 

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