सभी एकादशी तिथियों में सर्वश्रेष्ठ है निर्जला एकादशी, इन नियमों का पालन करके पाएँ शुभ फल!

यूं तो साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती हैं लेकिन इनमें से एक एकादशी तिथि ऐसी होती है जिस दिन व्रत रखने से सभी एकादशी व्रत से मिलने वाले फल के समान शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत कहा जाता है। यह एकादशी ज्येष्ठ के महीने में पड़ती है।

ऐसे में स्वाभाविक है अन्य एकादशी तिथियों की तुलना में इसका महत्व कई गुना ज्यादा बताया गया है। अपने इस विशेष ब्लॉग में आज हम जानते हैं इस वर्ष यह बेहद ही शुभ फलदाई निर्जला एकादशी किस दिन मनाई जाएगी? इस दौरान क्या कुछ नियमों का पालन करना निर्धारित किया गया है? और साथ ही जानते हैं इस व्रत से जुड़े कुछ नियम, कायदे और पूजन विधि आदि की संपूर्ण जानकारी।

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इस वर्ष किस दिन मनाई जा रही है निर्जला एकादशी?

वर्ष 2022 में निर्जला एकादशी शनिवार 11 जून को पड़ रही है।

एकादशी के अगले दिन जब हम व्रत पूरा करते हैं तो उसे पारणा कहते हैं। बात करें निर्जला एकादशी व्रत के पारण मुहूर्त की तो, नई दिल्ली के लिए एकादशी का पारणा मुहूर्त रहने वाला है:

निर्जला एकादशी पारणा मुहूर्त: 05:22:35 से 08:09:53 तक 12, जून को

अवधि: 2 घंटे 47 मिनट

आप यहां क्लिक करके अपने शहर के अनुसार इस दिन का पारणा मुहूर्त जान सकते हैं।

एकादशी के दिन कौन सा शुभ योग बन रहा है?

बात करें निर्जला एकादशी के दिन बनने वाले शुभयोग की तो, इस दिन परिघ योग बन रहा है जो 11 जून शनिवार को शाम 08 बजकर 46 मिनट तक रहने वाला है।

ज्योतिष में परिघ योग को शुभ योग माना जाता है। कहते हैं इस योग में शत्रुओं के विरुद्ध यदि कोई कार्य किया जाए तो इससे व्यक्ति को सफलता अवश्य मिलती है। यानी सरल शब्दों में कहें तो शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह योग बेहद ही शुभ फलदाई माना गया है।

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निर्जला एकादशी व्रत नियम

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत अन्य सभी एकादशी महत्व की तुलना में कई गुना ज्यादा बताया गया है। ऐसे में इसके नियम भी थोड़े बहुत अनोखे और कठिन होते हैं। तो आइए जान लेते हैं क्या कुछ होते हैं निर्जला एकादशी व्रत के अनूठे व्रत नियम::

एक तो यह एकादशी ज्येष्ठ के महीने में पड़ती है जिस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप होता है। दूसरे जैसा कि नाम से ही साफ है इस एकादशी व्रत में अन्न के साथ-साथ जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है। यह नियम इस एकादशी व्रत को महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद ही कठिन भी बनाता है। इस व्रत में ध्यान रखने वाली बात है कि एकादशी तिथि के सूर्योदय से लेकर अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन नहीं ग्रहण करना होता है। इसके अलावा यदि आप इस दिन जल या जल से भरे पात्र का दान करते हैं तो इसे भी बेहद शुभ माना जाता है। यदि किसी का निर्जला एकादशी व्रत रहने का मन है या श्रद्धा है लेकिन उनका स्वास्थ्य सही नहीं है तो ऐसी स्थिति में आप दिनभर उपवास के दौरान गुनगुने पानी में नींबू डालकर पी सकते हैं। इसके अलावा यदि आप उपवास नहीं रख सकते हैं यानी पूरी तरह से अन्न और जल त्याग कर नहीं रह सकते हैं तो आप इस दौरान फल खाकर भी व्रत रह सकते हैं। इसके अलावा एकादशी के दिन रात में सोने से बचना चाहिए। मुमकिन हो तो इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें, उनकी पूजा करें, जागरण करें और इसी में खुद को संलग्न रखते हुए एकादशी तिथि की रात गुजारें। अगले दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करें और उसके बाद अपने व्रत का पारण करें।

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निर्जला एकादशी के दिन भूल से भी ना करें ये काम

इस दिन घर में चावल ना बनाएं। इस दिन गलती से भी एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ें। यदि पत्ते बेहद आवश्यक हैं तो आप एक दिन पहले ही पत्तों को तोड़ कर रख सकते हैं। इसके अलावा निर्जला एकादशी के दिन अपने पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाने से बचें। इस दिन घर में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, का सेवन ना करें। साथ ही किसी से लड़ाई-झगड़ा ना करें, किसी का बुरा ना सोचें, किसी का अहित ना करें, और ना ही क्रोध करें।

निर्जला एकादशी के दिन दान का महत्व

यूं तो हिंदू धर्म में जितने भी व्रत और उपवास किए जाते हैं उनका पारण करने से पहले दान देने का विधान बताया गया है। हालांकि इसका महत्व निर्जला एकादशी के दिन बढ़ जाता है। ऐसा क्यों? क्योंकि जैसा कि हमने पहले भी बताया कि यूं तो साल भर में 24 एकादशी तिथि पड़ती है लेकिन एक अकेली निर्जला एकादशी ही है जिस दिन व्रत करने से आपको साल भर की एकादशी व्रत के फल के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। 

ऐसे में इस दौरान यदि आप दान भी करते हैं तो इसका महत्व और कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा निर्जला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन से नकारात्मकता और दुख दूर होते हैं, पुण्य की प्राप्ति होती है, इत्यादि। अब सवाल उठता है कि आखिर निर्जला एकादशी के दिन हम क्या दान कर सकते हैं? तो आइए इसके बारे में भी जान लेते हैं।

आप चाहें तो निर्जला एकादशी के दिन अनाज, जल, कपड़े, और जूते, छतरी, पंखी, पेय वस्तुओं आदि का दान कर सकते हैं। क्योंकि इस दौरान गर्मी बहुत भीषण होती है ऐसे में कोशिश करें कि आप जिसे भी दान कर रहे हैं उसे गर्मी से निजात दिलाने वाली किसी चीज का दान करें तो इससे इस एकादशी व्रत के प्रभाव से मिलने वाले फल में वृद्धि होती है।

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निर्जला एकादशी पर राशि अनुसार क्या करें दान

दान देना हिंदू संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। जरूरी नहीं दान में आप कुछ बहुत बड़ा या कोई अमूल्य वस्तु ही दें। आप अपनी यथाशक्ति के अनुसार खुले दिल और श्रद्धा के साथ जो भी दान करते हैं उससे आपको सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए आगे बढ़ते हैं और जान लेते हैं कि निर्जला एकादशी के दिन आप अपनी राशि के अनुसार किन वस्तुओं का दान करके 100 पीढ़ियों के लिए परमधाम की प्राप्ति का शुभ वरदान प्राप्त कर सकते हैं।

मेष राशि के जातक इस दिन 7 तरह के अनाज का दान करें। वृषभ राशि के जातक सफेद वस्त्रों का दान करें। मिथुन राशि के जातक हरे फल, आम, खरबूजे, आदि का दान करें। कर्क राशि के जातक सार्वजनिक जगह पर जल की व्यवस्था कराएं। इसके लिए आप वाटर कूलर लगवा सकते हैं या फिर चाहे तो आप पंखे और कूलर का दान भी कर सकते हैं। सिंह राशि के जातक धार्मिक स्थानों पर पंखे, एसी आदि लगवा सकते हैं। कन्या राशि के जातक अनाथालय या मंदिर में लंगर करवा सकते हैं। तुला राशि के जातक निर्जला एकादशी के दिन मीठे जल या फल का दान कर सकते हैं। वृश्चिक राशि के जातक भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए तरबूज का दान कर सकते हैं। धनु राशि के जातक पीला केसर युक्त दूध दान करें। ऐसा करने से आप अपने जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।मकर राशि के जातक पौधे लगाकर इस दिन का शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। मीन राशि के जातक पीपल का पेड़ लगा सकते हैं। हालांकि यहाँ इस बात का ध्यान रखें कि पेड़ लगाकर ही आपकी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती है, आपको उसका ध्यान भी रखना है। ऐसा करने से आपको और आपके परिवार को निरोगी काया का वरदान प्राप्त होगा।

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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