साल का आखिरी चंद्रग्रहण 7-8 सितंबर को, खगोल और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से अहम, राशियों पर पड़ेगा असर

वराहमिहिर की बृहत्संहिता के अनुसार, यदि एक ही मास में दो ग्रहण हों तो भूकंप, महामारी और राजकीय अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। बड़ी शक्तियों के बीच तनाव, जनसामान्य के रिश्तों में खटास, जलजनित समस्याएँ तथा संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका है।

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